jansatta column Rajapat, Political Chuckles Mamta Banerjee's martyr rally and BJP government in West Bengal - राजपाट: सियासी चकल्लस - Jansatta
ताज़ा खबर
 

राजपाट: सियासी चकल्लस

मोदी रैली के दौरान तंबू ढह जाने से 90 लोग घायल हो गए थे। तीन की हालत खस्ता है। भाजपा ने इसका दोष भी तृणमूल कांग्रेस की सरकार पर मढ़ दिया तो सरकार ने उदासीनता के आरोप को नकारते हुए तपाक से फरमाया कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जांच कर रही हैं।

Author July 21, 2018 6:28 AM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पीएम नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

विवाद की शुरुआत तो रैली को लेकर ही हो गई थी। पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच घमासान पहले से जारी था। रैली के दौरान हुए हादसे ने दोनों दलों के बीच तलवारें खींच डाली। दरअसल मोदी रैली के दौरान तंबू ढह जाने से 90 लोग घायल हो गए थे। तीन की हालत खस्ता है। भाजपा ने इसका दोष भी तृणमूल कांग्रेस की सरकार पर मढ़ दिया तो सरकार ने उदासीनता के आरोप को नकारते हुए तपाक से फरमाया कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जांच कर रही हैं। पर केंद्र सरकार का राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगना तृणमूल कांग्रेस के लोगों को अखर रहा है।

रिपोर्ट आलाकमान ने भी मांगी है पर अपनी पार्टी के लोगों से। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तो अपने अफसरों की टीम ही कोलकाता रवाना कर दी। ममता के समर्थकों को मोदी के इस आरोप से गुस्सा है कि सूबे में सिंडीकेट राज है। जवाब में ममता के समर्थकों ने केंद्र पर धार्मिक कट्टरवाद का सिंडीकेट चलाने का आरोप जड़ दिया। लोकसभा के अगले चुनाव से पहले दोनों दल में तल्खी बढ़ रही है। अब शनिवार को ममता करेंगी अपनी शहीद रैली। जाहिर है कि निशाने पर केंद्र सरकार और भाजपा दोनों होंगे। आलाकमान भी आएंगे अगले महीने यहां। कोलकाता में रैली करेंगे तो तल्खी और बढ़ेगी। पार्टी अध्यक्ष ने तो अपनी पार्टी के नेताओं से सूबे की 42 में से कम से कम 22 सीटें जीतने का लक्ष्य भी तय कर रखा है। भले सियासी पंडित इसे दिवास्वप्न ही क्यों न समझें। पर भाजपा कमर तो कस ही रही है। उसके लिए तो इतना ही काफी है कि उसे सीटें भले न मिल पाईं हों पर वोट के पैमाने पर तो उसने वाम मोर्चे और कांग्रेस दोनों को ही पछाड़ दिया है।

राजपाट: दुविधा में लालू

संकटों से निपटने का पुराना रिकार्ड है लालू यादव का। लेकिन इन दिनों राजद सुप्रीमो पर संकट कुछ ज्यादा ही गहरा गया है। कोई समाधान भी सूझ नहीं रहा। बीमार हैं और अदालत की इजाजत से इलाज चल रहा है। शरीर को तो संभाल लेंगे पर पार्टी को कैसे संभालें, इस सवाल ने उलझन बढ़ा रखी है। दोनों बेटों पर भरोसा किया था। पर अचानक यह भरोसा डगमगाने लगा है। खुद पटना में हैं लालू। अपनी पार्टी के नेताओं को जमकर समझा रहे हैं कि यह संकट नहीं परीक्षा की घड़ी है। घबराना नहीं है। संभलना है। बड़े बेटे तेज प्रताप आजकल सूबे का दौरा कर रहे हैं। खुद को बड़ा नेता बनाने की होड़ में पड़ गए लगते हैं। कहीं किसी गांव में कुएं पर नहा रहे हैं तो कहीं किसी गरीब के साथ भोजन कर रहे हैं। छोटे भाई तेजस्वी के साथ उनकी अनबन अब किससे छिपी है।

लालू ने छोटे को प्रतिभाशाली मान सियासत में बड़ा बनाया था। पर तेज प्रताप छोटे को छोटा ही साबित करने पर तुल गए हैं। तेजस्वी पिछले एक पखवाड़े से सूबे से बाहर हैं। लालू को ऐसे में चिंता होगी ही। दोनों बेटे ही आपस में भिड़ेंगे तो दुश्मन को ताकतवर होने का मौका अपने आप मिल जाएगा। दोनों एकजुट रहे तो मजबूत हो जाएंगे। दुविधा यह है कि दुश्मन तो एक हो रहे हैं और दोनों बेटे जुदा हैं। लालू करें तो क्या करें?

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App