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बाखबर: एक महायुद्ध लड़ते हुए

सबसे जोखिम भरे दृश्य पूर्ण बंदी के ऐन बाद दिखे। भयातुर खरीदारों की भीड़ों ने जरूरी ‘डिस्टेंसिंग’ की परवाह नहीं की। पूर्ण बंदी से सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाले दिहाड़ी मजदूरों की परेशानियां और पलायन की खबरें दिखा कर प्रशासन को कदम उठाने के लिए चेताया!

कोरोनावायरस लॉकडाउन के चलते देश सके विभिन्न इलाकों से मजदूर अपने अपने घरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। (वीडियो ग्रैब इमेज/ट्विटर)

कोरोना वायरस का इलाज तो हो सकता है, लेकिन ‘मोरोना’ वायरस का इलाज नहीं हो सकता…’शहजाद पूनावाला के इस तंज पर शाहीनबागी सर जी ने ज्यों ही जवाबी हमला बोलने की कोशिश की, त्यों ही एंकर ने डांट दिया कि आज देश कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है और आपको किंतु-परंतु लगाने की पड़ी है, सरकार ने गरीबों के लिए पैकेज भी दिया है, फिर भी अगर आपको उनकी इतनी ही फिक्र है, तो अपने घर की रसोई उनके लिए क्यों नहीं खोल देते… और एंकर ने शाहीनबागी की ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ को तुरंत बंद कर दिया!
हाय! हमें तो बुरा लगा, लेकिन सरजी इतनी बेइज्जती पर भी फ्रेम में लटके रहे!

इसी तरह का दृश्य दूसरे चैनल पर दिखा। कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए सरकार 1.70 करोड़ रुपए के राहत पैकेज का एलान कर चुकी थी, कोरोना से जंग में चिर-विपक्षी सोनिया जी पीएम को समर्थन व्यक्त कर चुकी थीं, राहुल भी समर्थन व्यक्त कर चुके थे और चिदंबरम ने तो एक दिन पहले ही एक चैनल पर पीएम के इक्कीस दिन की पूर्ण बंदी को उचित ठहराया था और आर्थिक पैकेज की मांग की थी।

फिर भी कांग्रेसीनुमा एक सज्जन कोरोना से लड़ने में सरकार की कमियों को देर तक गिनाते रहे और शाहीनबागी जी की तरह ही मार खाते रहे।
ऐसे छिद्रान्वेषियों को सलाम, जो हर हाल में सिर्फ छिद्रान्वेषण किया करते हैं! ऐसे छिद्रान्वेषियों को अपने छिद्र कभी नहीं दिखते!

इस महामारी से लड़ने में खबर चैनलों ने अपनी भूमिका अच्छी तरह निभाई है। क्या ‘कर्तव्य’ है, क्या ‘अकर्तव्य’ है, वे ग्राफिक से बताते रहते हैं कि जरूरी हो तभी बाहर निकलें, नहीं तो घर में ही बंद रहें। एक-दूसरे से एक मीटर की दूरी बनाए रखें। जिनको जुकाम खांसी हो, वे मास्क का उपयोग करें, बीस सेकेंड तक हाथ धोएं या सेनेटाइज करें… अमिताभ बच्चन से लेकर कई ‘सेलीब्रिटीज’ बताते रहते हैं।

जबसे पीएम ने इक्कीस दिन की पूर्ण बंदी का ऐलान किया है, तबसे हर खबर चैनल आंकड़े दे-देकर बताता रहता है कि आज तक इतने लोग और संक्रमित हुए हैं और इतने और मरे हैं और हम हर बार इन आकड़ों को देख कर डरते भी हैं और अधिक सावधनी बरतने को उद्यत होते हैं, फिर भी दहशत महसूस होती रहती है। कोरोना का डर हमें ‘अस्तित्ववादी’ बनाता है!

पूर्ण बंदी से ऐन पहले की एक बहस में एक बड़े डॉक्टर ने उचित ही चेताया कि ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ का सख्ती से पालन ही सबसे बेहतर उपाय है। अगर देश भर अभी से पूर्ण बंदी नहीं किया, तो जुलाई तक पंद्रह लाख से अधिक लोग खत्म हो सकते हैं। यह स्थिति समूची जीडीपी को जीरो कर सकती है, जबकि बंदी से जीडीपी सिर्फ दो प्रतिशत गिरेगी!

शुक्रवार की सुबह चैनलों ने बताया कि अब तक देश में कुल 724 लोग प्रभावित हुए और 17 मरे हैं। इटली, स्पेन, ईरान की तुलना में हमारी स्थित बेहतर है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल लोगों को अपनी सरकार की तैयारियों के बारे में दिन में दो बार-बता कर आश्वस्त करते रहते हैं कि अगर कोरोना के मामले बढ़ते हैं, तो हम उसके लिए तैयार हैं और शनिवार से चार लाख गरीबों को मुफ्त भोजन कराने वाले हैं। उधर यूपी के सीएम योगी भी अपनी तैयारियां बताते रहते हैं। अन्य राज्य सरकारों की खबरें भी आश्वस्त करने वाली दिखती हैं। कोरोना से लड़ने की तैयारियां शुभ-शुभ खबरें हैं।

इन दिनों खबरें देखना डरावना और अवसादी अनुभव है, फिर कोरोना के फैलाव तथा परिणामों को जानने के लिए चैनलों से बेहतर कोई दूसरा माध्यम नहीं। वे अपने-अपने तरीके से इस महामारी को रोज फैलते दिखाते हैं और हमारी हिम्मत बढ़ाने के लिए सुनवाते हैं : ‘हम होंगे कामयाब…! फाइट कोरोना! डिफीट कोरोना! घर में रहें। सुरक्षित रहें! स्टे होम! स्टे सेफ!!’

चैनलों के रिपोर्टर, कैमरा मैन, वैन ड्राइवर, पुलिस, डॉक्टर, नर्स, एंबुलेस ड्राइवर और जरूरी सामान पहुंचाने वाले लोग प्रशंसा के हकदार हैं, क्योंकि वे इन दिनों भी जोखिम उठा रहे हैं। 1.70 करोड़ रुपए का ‘राहत पैकेज’ घोषित करने आईं वित्तमंत्री निर्मला सीतारामण ने इनको उचित ही ‘कोरोना योद्धा’ कहा और जोखिम में लगे लोगों के लिए पचास लाख रुपए के बीमे की व्यवस्था की। रिजर्व बैंक ने भी तीन महीने के लिए रेपो-रेट घटाया है।

सबसे जोखिम भरे दृश्य पूर्ण बंदी के ऐन बाद दिखे। भयातुर खरीदारों की भीड़ों ने जरूरी ‘डिस्टेंसिंग’ की परवाह नहीं की। पूर्ण बंदी से सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाले दिहाड़ी मजदूरों की परेशानियां और पलायन की खबरें दिखा कर प्रशासन को कदम उठाने के लिए चेताया! शुक्रवार की सुबह खबर दी जाने लगी कि बंदी के बाद कोरोना के फैलाव में अपेक्षाकृत ‘ठहराव’ दिखता है! आमीन!!

एबीपी का एक रिपोर्टर दिखाता है कि किस तरह बहुत से लोग एनएच 24 पर पैदल जा रहे हैं। एक बताता है कि सुना था कि यूपी सरकार बस चला रही है, उसी का इंतजार कर रहे हैं। अगर न मिली, तो पैदल ही जाएंगे। आजमगढ़ पहुंचना है…

चैनल पहली बार पूरी तरह ‘इंटर एक्टिव’ हैं। ‘इंडिया टुडे’ और ‘रिपब्लिक’ अपनी-अपनी हेल्पलाइन चला रहे हैं, ताकि लोग अपनी परेशानी बता सकें और चैनल संबद्ध विभाग तक पहुंचा सकें, ताकि उचित उपाय किए जा सकें। इसी तरह ‘टाइम्स नाउ’ पूछता है, क्या आपके मुहल्ले में जरूरी सामान की आपूर्ति पर्याप्त है? अगर नहीं तो इस नंबर पर फोन कर बताएं। वह बताता है कि पीएम दिन-रात निगरानी रख रहे हैं!
सच! हम एक महायुद्ध के बीच हैं और समूचा भारत उससे लड़ रहा है! हम होंगे कामयाब!!

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