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सितारों की कमाई तो छप्परफाड़

सत्तर के दशक में बड़ी फिल्म के लिए एक वितरण क्षेत्र का अधिकार 20 से 30 लाख रुपए में बिक जाता था। फिल्म के आकार के हिसाब से अब हर वितरण क्षेत्र सात से दस करोड़ रुपए के बीच बैठता है।

Author September 7, 2018 3:37 AM
कुछ समय पहले खबर आई थी कि कंगना रानौत ने फिल्म में काम करने का मेहनताना 11 करोड़ रुपए कर दिया है।

श्रीशचंद्र मिश्र

कुछ समय पहले खबर आई थी कि कंगना रानौत ने फिल्म में काम करने का मेहनताना 11 करोड़ रुपए कर दिया है। कहते हैं कि कंगना के इस भाव को सुन कर कई निर्माता उनसे बिदक गए हैं। अगर यह खबर सच है और कंगना को नई फिल्म के लिए कोई 11 करोड़ रुपए देगा तो निश्चित रूप से यह एक रेकॉर्ड होगा। आज तक किसी हीरोइन को एक फिल्म के लिए इतना पैसा नहीं दिया गया। हीरो हालांकि इस सीमा को कब का लांघ गए हैं। ‘एक था टाइगर’ के समय यह चर्चा हुई थी कि सलमान खान को उस फिल्म के लिए 28 करोड़ रुपए दिए गए थे। उसके बाद ‘सुल्तान’ के लिए सलमान को सौ करोड़ रुपए मिलने की चर्चा उड़ी। अपुष्ट खबरों की मानें तो सलमान, आमिर, अक्षय, शाहरुख व अजय एक फिल्म के लिए 40 से 50 करोड़ रुपए तक पा रहे हैं।

बात हीरोइनों को मिलने वाले मेहनताने की हो तो ‘रोबोट’ में रजनीकांत ने जहां 35 करोड़ रुपए कथित रूप से लिए थे, वहीं फिल्म की हीरोइन ऐश्वर्य राय को छह करोड़ रुपए मिले थे। तब एक फिल्म के लिए किसी हीरोइन को मिलने वाली यह सबसे ज्यादा रकम थी। बाद में इसे करीना कपूर ने तोड़ा। मधुर भंडारकर की फिल्म ‘हीरोइन’ के लिए उन्हें सात करोड़ रुपए दिए बताए गए। कंगना के 11 करोड़ रुपए मांगने में अनूठा कुछ नहीं है। कुछ साल पहले विद्या बालन की कई महिला प्रधान फिल्मों की सफलता ने उन्हें ढेरों पुरस्कार दिलाए। ‘द डर्टी पिक्चर्स’ के बाद उन्होंने अपना मेहनताना आठ करोड़ रुपए कर दिया। यह बात अलग है कि उनकी बाद की कुछ फिल्में नहीं चलीं। फिल्मी सितारे कितना मेहनताना लेते हैं, यह अधिकृत रूप से कोई नहीं बता सकता। फिल्म इंडस्ट्री में यह प्रचलित धारणा रही है सितारे आयकर बचाने के लिए मेहनताने का बड़ा हिस्सा काले धन के रूप में लेते हैं। पिछले कुछ सालों से कई बड़े स्टार आयकर का अग्रिम भुगतान कर रहे हैं, लेकिन एक फिल्म का वे कितना पाते हैं, यह कभी स्पष्ट नहीं हो पाता।

आजादी से पहले तक फिल्मी कलाकार विभिन्न कंपनियों के मुलाजिम के तौर पर काम करते थे और उन्हें मासिक वेतन मिलता था। अशोक कुमार, दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर आदि तक को शुरुआती सफर में मासिक वेतन पर गुजारा करना पड़ा। लेकिन फिल्म कंपनियों का वर्चस्व खत्म होते ही स्टार सिस्टम की नींव पड़ गई। फिल्म के हिसाब से सितारों को अनुबंधित करने का सिलसिला शुरू हुआ। बाजार में हैसियत व लोकप्रियता के हिसाब से सितारों का भाव तय होने लगा। ‘आराधना’ से सुपर स्टार बने राजेश खन्ना ने एक फिल्म के लिए बारह लाख रुपए लेकर दिलीप कुमार का रेकॉर्ड तोड़ा। यह वाकया भी काफी दिलचस्प है। सड़क पर बंदरों का तमाशा दिखाने वाले सैंडो एमएमए चिनप्पा देवर धीरे-धीरे सर्कस मालिक के रूप में स्थापित हो गए। जानवरों पर केंद्रित ‘हाथी मेरे साथी’ में काम करने के लिए उन्होंने राजेश खन्ना से संपर्क किया। राजेश खन्ना ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। देवर ने दाम बढ़ाना शुरू कर दिया। प्रस्ताव जब बारह लाख रुपए तक पहुंच गया तो राजेश खन्ना को हां करना पड़ा।

सितारों की कमाई का अंदाजा इसलिए नहीं हो पाता क्योंकि अरसे तक लगभग सभी बड़े स्टार एक विशेष फॉर्मूले को अपनाए रहे। हीरो नाममात्र का मेहनताना लेते थे लेकिन एक वितरण क्षेत्र का अधिकार अपने नाम करा लेते थे।फिल्मों का बाजार सात-आठ वितरण केंद्रों में सिमटा है। सत्तर के दशक में बड़ी फिल्म के लिए एक वितरण क्षेत्र का अधिकार 20 से 30 लाख रुपए में बिक जाता था। फिल्म के आकार के हिसाब से अब हर वितरण क्षेत्र सात से दस करोड़ रुपए के बीच बैठता है। आज के खान, दत्त, देवगन या रोशन कुछ साल पहले तक इसी से संतुष्ट हो जाते थे। अब उनकी इच्छाएं बढ़ गई हैं। किसी फिल्म का एक क्षेत्र के लिए वितरण अधिकार पाकर उसे कायदे से रिलीज करवाने की माथापच्ची में कोई उलझना नहीं चाहता। लिहाजा सभी बड़े हीरो या तो अपने स्तर पर फिल्म बना रहे हैं या फिल्म में कुछ टका हिस्सेदारी पा रहे हैं। फिल्म अगर हिट हो जाए तो यह हिस्सेदारी की रकम 40 से 50 करोड़ रुपए तक बैठ जाती है। ऐसा बेहद कम होता है कि फिल्म न चले फिर भी उस सूरत में भी 15-20 करोड़ रुपए कहीं नहीं गए।

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