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दिन भर की भूख हड़ताल के बाद एलान,मांगें मनवाए बिना नहीं लौटेंगे आंदोलनकारी किसान

दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने सोमवार को एक दिन की भूख हड़ताल की। सुबह आठ बजे से बैठे किसानों ने शाम पांच बजे पानी पीकर भूख हड़ताल खत्म की। किसान नेताओं ने सोमवार के आंदोलन के सफल रहने का दावा किया और कहा कि मांगें पूरी कराए बगैर किसान वापस नहीं लौटेगा। सोमवार के बाद आंदोलन के अगले चरण की रणनीति तय की जाएगी।

Author नई दिल्‍ली | December 15, 2020 9:10 AM
donationआंदोलन के समर्थन में मेरठ से दिल्ली पहुंचे बच्चों ने अपने गुल्लक किसान नेताओं को सौंपे।

किसान नेताओं के मुताबिक, दिल्ली के सिंघु बार्डर पर केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के परिवारों की दो हजार से अधिक महिलाएं आने वाले दिनों में इस आंदोलन में शामिल होंगी। दूसरी ओर, पंजाब और हरियाणा में किसानों ने जिला मुख्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। जिला आयुक्त कार्यालयों के बाहर नारेबाजी की और विरोध मार्च निकाला।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आज का आंदोलन सफल रहा, किसान वापस नहीं जाएगा। हम प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से ही रखना चाहते हैं। सरकार चाहती है कि हंगामा हो। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह तय हुआ है कि जिन थानों से हमें परेशान किया जाएगा, हम वहां पर पशु बांधना शुरू करेंगे।
उधर, भूख हड़ताल पर बैठे किसानों की चिंता में सातवीं कक्षा की कुछ छात्राएं सिंघु बॉर्डर पर पहुंच गर्इं। वे एक दिन पहले सिंघु बॉर्डर पर जमा किसानों को देखने आर्इं थीं। सोमवार छात्राएं किसानों के समर्थन में पोस्टर लिए हुए नारे लगा रही थीं।

किसान नेताओं ने बताया कि पंजाब के विभिन्न हिस्सों से महिला सदस्यों के यहां आने के मद्देनजर बंदोबस्त किए जा रहे हैं, तंबू लगाए जा रहे हैं तथा अलग से लंगर की व्यवस्था की जा रही है। अतिरिक्त अस्थायी शौचालयों की भी व्यवस्था की जा रही है। किसान नेताओं ने बताया कि प्रदर्शन स्थल पर महिलाओं को सुरक्षित एवं आरामदायक माहौल देने के उद्देश्य से यह किया जा रहा है।

किसान नेता हरेंदिर सिंह लाखोवाल ने कहा कि रविवार को दिल्ली के एक संगठन ने करीब 200 तंबू दान किए हैं, जिन्हें सिंघु और टीकरी सीमाओं पर खासकर महिलाओं के लिए लगाया जा रहा है। राष्ट्रीय किसान महासंघ के नेता शिव कुमार कक्का ने बताया कि यह केवल पंजाब के किसानों का नहीं बल्कि देशभर के किसानों का आंदोलन है और सीमाओं पर चल रहे प्रदर्शनों का महिलाएं पहले से हिस्सा हैं। कक्का ने कहा, ‘महिलाओं के लिए अलग से लंगर शुरू करने के बारे में विचार कर रहे हैं। उनके लिए पेयजल और स्रान की खातिर पानी के टैंकर की अलग से व्यवस्था की जा रही है।’

उधर, नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान के बाद पंजाब और हरियाणा में किसानों ने जिला आयुक्त कार्यालयों के बाहर नारेबाजी की और विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के पंजाब से सटे शंभू सीमा पर इकट्ठा हो जाने के बाद हरियाणा पुलिस ने अंबाला-पटियाला राजमार्ग को बंद कर दिया। पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने भी प्रदर्शन किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने शंभू बार्डर पर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। विपक्षी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के कार्यकर्ताओं ने अमृतसर में प्रदर्शन किया। पंजाब में लुधियाना, पटियाला, संगरूर, बरनाला, बठिंडा, मोगा, फरीदकोट, फिरोजपुर और तरणतारण समेत कई जिलों में प्रदर्शन किया गया। हरियाणा में फतेहाबाद, जींद, सिरसा, कुरूक्षेत्र, गुड़गांव, फरीदाबाद, भिवानी, कैथल और अंबाला में प्रदर्शन की खबर है।

निगम चुनाव का बहिष्कार करेगा इनेलो

केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के जारी आंदोलन के बीच इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने सोमवार को कहा कि वह केंद्र और राज्य की सरकारों द्वारा किसानों पर कथित तौर पर किए गए ‘अत्याचार’ के खिलाफ हरियाणा में आगामी निगम चुनावों का बहिष्कार करेगा। हरियाणा में नगर निकायों का चुनाव 27 दिसंबर को होगा।इनेलो नेता और पार्टी के विधायक अभय सिंह चौटाला ने बयान में आरोप लगाया कि भाजपा के मंत्री प्रदर्शनकारी किसानों को ‘आतंकवादी और गद्दार’ बताकर उनका अपमान कर रहे हैं।

चौटाला ने कहा कि उनकी पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अन्नदाता पर ढाए गए अत्याचारों के खिलाफ निगम चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार किसानों की उपेक्षा कर रही है, यह बहुत दुखद और निंदनीय है।’

इनेलो नेता ने कहा कि राज्य में भाजपा-जजपा सरकार ऐसे समय में चुनाव करवा रही है, जब पिछले 18 दिनों से किसान कृषि कानूनों को निरस्त करने समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली की सीमाओं के पास प्रदर्शन कर रहे हैं। अंबाला, पंचकूला और सोनीपत नगर निगमों के मेयर और पार्षद की सीटों के लिए चुनाव होगा। रेवाड़ी नगर परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों, रोहतक में सांपला, रेवाडी में धारूहेड़ा, हिसार जिले में उकलाना की निगम समितियों के लिए चुनाव होगा।

वार्ता की अगली तारीख के लिए किसानों के संपर्क में सरकार

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को कहा कि किसानों के साथ वार्ता की अगली तारीख तय करने के लिए सरकार उनसे संपर्क में है। तोमर ने कहा, ‘बैठक निश्चित रूप से होगी। हम किसानों के साथ संपर्क में हैं।’ उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। किसान नेताओं को तय करके बताना है कि वे अगली बैठक के लिए कब तैयार हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों की 40 यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ सरकार की बातचीत की अगुवाई तोमर कर रहे हैं। इसमें उनके साथ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग तथा खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल हैं। केंद्र और किसान नेताओं के बीच अब तक हुई पांच दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं।

कृषि क्षेत्र के खिलाफ प्रतिगामी कदम
का सवाल ही नहीं : राजनाथ

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि कृषि क्षेत्र ‘जननी’ है और इसके खिलाफ प्रतिगामी कदम उठाने का सवाल ही नहीं है। औद्योगिक संगठन फिक्की की आम बैठक को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि हाल में कृषि क्षेत्र में किए गए सुधार किसानों के बेहतर हित को ध्यान में रखकर किए गए हैं और सरकार हमेशा चर्चा और संवाद के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘कृषि क्षेत्र के खिलाफ प्रतिगामी कदम उठाने का सवाल ही नहीं है। हालिया सुधार भारत के किसानों की बेहतरी को ध्यान में रखकर किए गए हैं।’ सिंह ने कहा, ‘फिर भी हम अपने किसान भाइयों की हमेशा सुनने को तैयार हैं, हम उनकी आशंकाओं को दूर करेंगे और भरोसे के साथ उन्हें वह देंगे जो हम दे सकते हैं। हमारी सरकार हमेशा चर्चा और संवाद के लिए तैयार है।’ रक्षामंत्री ने कहा कि कृषि ऐसा एक क्षेत्र है जिसने खुद को महामारी के दुष्प्रभाव से बचाया है, बल्कि बेहतर किया है। हमारे यहां उत्पादन और खरीद बहुत हुआ और सभी गोदाम भरे हुए हैं।’

नए किसान कानून महंगाई बढ़ाने का लाइसेंस : केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को किसान आंदोलन के समर्थन में आयोजित आम आदमी पार्टी (आप) के सामूहिक उपवास में कहा कि नए कानून में लिखा है कि जब तक दाल की कीमत दोगुनी नहीं हो जाएंगी, तब तक छापेमारी नहीं की जा सकती। मान लीजिए इस साल गेहंू 10 रुपए किलो है और अगले साल जब तक गेहूं 20 रुपए किलो नहीं हो जाता, तब तक सरकार छापामारी नहीं कर सकती।

अगले साल 40 रुपए किलो, उससे अगले साल 80 रुपए किलो और उससे अगले साल तक गेहंू 160 रुपए किलो तक नहीं हो जाएगा, तब तक छापेमारी की कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे में चार साल के अंदर गेहूं 16 गुना महंगा हो जाएगा। पार्टी मुख्यालय पर सामूहिक उपवास में उपस्थित मंत्रियों, विधायकों व कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस कानून में महंगाई बढ़ाने का लाइसेंस दिया गया है।

उन्होंने कहा कि महंगाई दोगुनी नहीं होने पर सरकार छापामारी नहीं कर सकती है। ‘मैं मुख्यमंत्री हूं और मुझे पता है कि दाल के दाम बढ़ रहे हैं। मगर मैं जमाखोरों पर छापेमारी नहीं कर सकता है। कानून ने मेरे हाथ काट दिए।’उन्होंने कहा कि चंद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह कानून लाया गया है। उन्होंने कहा कि बाकी
लोग किसानों पर नहीं बल्कि किसान लोगों पर अहसान कर रहे हैं, जो कह रहे हैं कि यह कानून वापस लो। हमें इन कानूनों की खिलाफत करनी है।

एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी देने वाला कानून इस देश के अंदर लाया जाए। इन कृषि कानूनों के विरोध में अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को किसानों के समर्थन में अपने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, पार्षदों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ उपवास रखा।

पवित्र है किसान आंदोलन : अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसान और जवान किसी भी देश की नींव किसान होते हैं मगर कुछ लोग किसानों को आतंकवादी बता रहे हैं। मेरी अपील है कि वे अपनी गंदी राजनीति बंद करें। केजरीवाल ने कहा कि किसानों का यह आंदोलन बहुत पवित्र है, कहीं भी किसी तरह की कोई हिंसा नहीं हुई। किसानों के ऊपर तरह-तरह के आरोप लगाकर उनको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

वे कह रहे हैं कि किसान आंतकवादी, देशद्रोही, टुकड़े टुकड़े गैंग के सदस्य हैं। किसान चीन और पाकिस्तान के एजंट है। यहां जो किसान बैठे हैं, इन्हीं लोगों के भाई, बेटे चीन और पाकिस्तान की सीमा पर देश की रक्षा कर रहे हैं। ये एक दिन अपने बेटे-बेटियों को चीन और पाकिस्तान की सीमा पर भेज कर देखें, तब पता चलेगा कि कलेजे पर क्या बीतती है। इस दौरान उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सत्येंद्र जैन व गोपाल राय, एनडी गुप्ता और सांसद संजय सिंह के अलावा विधायक व पार्षद आदि मौजूद रहे।

कृषि कानूनों का दस संगठनों ने किया समर्थन

दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के जारी आंदोलन के बीच विभिन्न राज्यों के 10 किसान संगठनों ने कृषि कानूनों को किसान हितैषी बताया है। इन संगठनों के नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और अपना समर्थन पत्र सौंपा। इससे पहले हरियाणा और उत्तराखंड के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल भी कृषि मंत्री से मिल चुका है।

उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार और हरियाणा के 10 किसान संगठनों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। आॅल इंडिया किसान को-आॅर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले इन किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के तीनों नए कृषि कानूनों का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि तीनों कानून किसानों के हित में हैं और इन्हें वापस नहीं लिया जाना चाहिए। बैठक के बाद कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि आॅल इंडिया किसान को-आॅर्डिनेशन कमेटी के सदस्यों ने हमें समर्थन के बारे में चिट्ठी दी है।

उधर, गृह मंत्री अमित शाह ने आंदोलनकारी किसानों की मांगों और संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ बैठक की। दोनों मंत्रियों ने विरोध प्रदर्शन को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए उनकी मांगों को हल करने के तरीकों पर चर्चा की। तोमर के मुताबिक, जल्द समाधान किए जाने की इसलिए भी जरूरत है क्योंकि किसानों के आंदोलन से दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों की प्रमुख सड़कें बाधित होने के कारण विभिन्न जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही आमजन के आवामगन पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है।

शाह के 6, कृष्ण मेनन मार्ग स्थित आवास पर हुई बैठक में दोनों ने देशभर के किसानों और उनके नेताओं से संपर्क के बाद गतिरोध को दूर करने के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है। लगभग 40 मिनट की बैठक में दोनों नेताओं ने उन 32 किसान प्रतिनिधियों के साथ फिर से संपर्क करने पर चर्चा की, जिन्होंने अब तक केंद्र के साथ पांच दौर की वार्ता की है। रविवार को शाह ने अपने आवास पर तोमर की उपस्थिति में पंजाब भाजपा नेताओं के साथ भी किसानों के मुद्दों पर चर्चा की। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश भी बैठक में मौजूद रहे।

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