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India vs Pakistan: सचिन, द्रविड़, लक्ष्‍मण, धोनी को मिलाकर बनता है एक विराट कोहली

सचिन तेंदुलकर नहीं होते तो आज हम विराट कोहली को भी नहीं देख पा रहे होते। लेकिन एक सच यह भी है कि अगर कोहली नहीं होते तो सचिन की विरासत को आगे बढ़ाना मुश्किल होता।

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विराट कोहली को लिमिटेड ओवर्स के गेम में चेज करते हुए देखना थोड़ा गैर भारतीय लगता है। एमएस धोनी ने कई बार भारत के लिए शानदार फिनिशर की भूमिका और यादगार जीत भी दिलाई, लेकिन टॉप ऑर्डर के किसी एक ऐसे बल्‍लेबाज का नाम लेना बेहद कठिन है, जिसके पास कोहली जैसा कंट्रोल हो। जैसा कि कहा जाता है- मैच बनाके फिर जिताना।

तेंदुलकर ने लिमिटेड ओवर्स में इसकी शुरुआत की थी, लेकिन बहुत सारे मौकों पर उस तरह से गेम को फिनिश नहीं कर पाए, जिस प्रकार से इन दिनों कोहली कर रहे हैं। लेकिन यह भी सच है कि तेंदुलकर नहीं होते तो आज हम कोहली को भी नहीं देख पा रहे होते। हालांकि, एक सच यह भी है कि अगर कोहली नहीं होते तो सचिन की विरासत को आगे बढ़ाना मुश्किल होता। मैच के दौरान कोहली ने सचिन तेंदुलकर को झुककर सलाम करके इसका सबूत भी दिया।

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वैसे कोहली में सिर्फ तेंदुलकर की ही झलक नहीं दिखाई देती है। उनमें कुछ और भारतीय सितारों की झलक दिखती है। इनमें पहला नाम वीवीएस लक्ष्‍मण का है, क्‍योंकि यह वो खिलाड़ी है, जो कोहली से पहले रनों का पीछा करने में माहिर माना जाता था। हालांकि, उन्‍होंने यह काम अधिकतर टेस्‍ट मैचों की चौथी पारी में किया।

2000 के दशक के बीच में राहुल द्रविड़ बल्‍लेबाज बने, जिन्‍होंने मैच फिनिशर के तौर पर अपनी पहचान बनाई। वन-डे मैचों में अंडर रेट किए गए राहुल द्रविड़ भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्‍होंने इस पहचान को अर्जित किया। हालांकि, द्रविड़ ने 10 रन प्रति ओवर के मैच चेज नहीं किए, लेकिन वह पहले ऐसे भारतीय खिलाड़ी रहे, जिन्‍होंने इनिंग को कंस्‍ट्रक्‍ट करने का हुनर दिखाया। द्रविड़ की यही क्‍वालिटी कोहली में भी दिखती है।

पिछले कुछ सालों में धोनी ने कई बेहतरीन चेज में शानदार बल्‍लेबाजी की। उन्‍होंने अपने धैर्य से विपक्षियों के हाथ जीत छीन ली। उन्‍हें दबाव में लाकर गलती करने पर मजबूर किया और सही मौके पर फायदा उठाया। कोहली में धोनी के ये गुण भी मौजूद हैं।

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