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ट्रंप की भारत यात्रा के निहितार्थः क्या-क्या साधने की जुगत एक-दूसरे से

विदेश मंत्रालय के अधिकारी मानकर चल रहे हैं कि कोई बड़ा करार सामने नहीं आएगा। पांच सहमति पत्रों पर चर्चा हुई है, उनको लेकर अरसा पहले सहमति बन चुकी है। साझा घोषणापत्र में जिक्र करने के लिए इन सहमतिपत्रों का ब्योरा रखा जाएगा।

Author Updated: February 25, 2020 2:31 AM
चीन के बाद अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

दीपक रस्तोगी

सोमवार सुबह अमदाबाद पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके साथ आए लोग भारत में कुल 36 घंटे बिताएंगे। अमदाबाद और आगरा में उनका जबरदस्त स्वागत हुआ है। मंगलवार का उनका पूरा दिन नई दिल्ली के नाम होगा। जश्न और समारोहों के अलावा उनकी इस यात्रा के मायने तलाशने में समीक्षक जुटे हुए हैं। ट्रंप को अपनी इस यात्रा में महात्मा गांधी और विवेकानंद याद तो आ रहे हैं, लेकिन उनकी जुबान पर कारोबार का मंत्र जोर-जोर से उच्चारित होता दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति होने के नाते रणनीतिक और सामरिक मुद्दों पर भी उनकी बातें सुनने को मिली हैं। लेकिन उन बातों की प्रतिध्वनियां कुछ और कहती दिखी हैं। भारत यात्रा में ट्रंप की समूची कवायद अपने देश की आर्थिकी को दुरुस्त करने की कवायद और अपनी चुनावी तैयारियों तक सीमित दिख रही है।

ट्रंप और मोदी का ‘रसायन’
विदेश मंत्रालय के अधिकारी मानकर चल रहे हैं कि कोई बड़ा करार सामने नहीं आएगा। पांच सहमति पत्रों पर चर्चा हुई है, उनको लेकर अरसा पहले सहमति बन चुकी है। साझा घोषणापत्र में जिक्र करने के लिए इन सहमतिपत्रों का ब्योरा रखा जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके रिश्तों के रसायन की खूब चर्चा है। हमेशा की तरह। भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी इसे व्यापक रूप देने में परोक्ष रूप से जुटे हुए हैं। ट्रंप की इस यात्रा में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की राजनीति में नए प्रभाव डालने की कोशिश हो रही है। पाकिस्तान से सीमापार के आतंकवाद, पाकिस्तान से रिश्ते, अफगानिस्तान में तालिबान के साथ अमेरिकी वार्ता, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, चीन के साथ दोनों देशों के रिश्तों को लेकर कई संकेत देने की कोशिश की जा रही है।

समझौतों को लेकर सवाल
समीक्षकों में इस यात्रा को लेकर बहुत उत्साह नजर नहीं आ रहा है क्योंकि किसी बड़े समझौते पर सहमति होने की उम्मीद नहीं है। ट्रंप खुद ही कह चुके हैं कि एक बड़ी व्यापार संधि पर इस बार सहमति नहीं हो पाएगी। इस यात्रा के कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने अमेरिका के प्रति भारत की व्यापार नीति की आलोचना की थी और कहा था कि भारत हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है। दरअसल, साफ दिख रहा है कि पूरी यात्रा का आयोजन अमदाबाद वाले रोड शो को केंद्र में रखते हुए किया गया है, जिसके जरिए ट्रंप अमेरिका में कुछ ही महीनों में होने वाले चुनावों से ठीक पहले यह दिखा सकें कि उनका दुनिया भर में मान है और भारत जैसे बड़े देश में उनका व्यापक असर है। वे आगामी चुनावों में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के मत को भी जीतना चाहेंगे। अनुमान है कि अमेरिका में भारतीय मूल के कम से कम 45 लाख नागरिक रहते हैं। ट्रंप को लगता है कि यह यात्रा प्रवासी वोटों को प्रभावित कर सकती है। सर्वे में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता का आंकड़ा 50 फीसद के भीतर ही रहा है। इस आंकड़े को वे बढ़ाना चाहेंगे।

व्यापार का मुद्दा
चीन के बाद अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साल 2018 में भारत और अमरीका का द्विपक्षीय कारोबार रेकॉर्ड 142.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। साल 2019 में अमेरिका और भारत का व्यापार घटकर 23.2 अरब डॉलर पर आ गया था। बीते तीन साल में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव धीरे-धीरे बढ़ा है। अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा अब धीरे-धीरे कम होने लगा है और अब यह भारत और चीन के व्यापार घाटे का 10वां हिस्सा भर है। इसके बावजूद इस मुद्दे पर तल्खी है। अमेरिकी राष्ट्रपति सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भारत कैसे अमेरिका से आयातित उत्पादों पर ज्यादा कर लगाता है। भारत ने 16 जून, 2019 से अमेरिका में बने या अमेरिका से आयातित 28 उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाया। व्यापार वार्ता रुकते ही अमरीका ने ई-कॉमर्स में असहमतियों का हवाला देकर भारतीयों के लिए एचवन-बी वीजा का कोटा 15 फीसद घटा दिया। 13 नवंबर 2019 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके समकक्ष रॉबर्ट लाइटजर व्यापार समझौते पर शुरुआती बातचीत के लिए मिले। अमेरिका से एक समिति इसके बाद भारत आई। लेकिन ट्रंप के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में रॉबर्ट को शामिल नहीं किया गया।

चुनाव से पहले कवायद
जहां तक व्यापार का सवाल है, दोनों देशों के अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि विवाद के मुद्दों पर प्रगति अमेरिका में चुनावों के पहले संभव नहीं है। अमेरिका चाहता है कि भारत के दूध और मुर्गीपालन बाजार को उसके लिए खोला जाए। अमेरिकी कंपनियों के बनाए हुए चिकित्सा उपकरणों के दामों पर भारत की तरफ लगाए हुए नियंत्रण को अमेरिका हटवाना चाहता है। इससे अमेरिकी राजस्व बढ़ेगा। जबकि भारत की मांग है कि अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में ही डाटा को संग्रह करें। ऐसे में मोदी सरकार ने ट्रंप प्रशासन से कहा है कि उन्होंने 2019 में जो व्यापार संबंधी रियायतें वापस ली थीं उन्हें बहाल किया जाए और अमेरिकी बाजार को भारतीय दवाओं और कृषि उत्पादों के लिए और खोला जाए।
इस पर इस दौरे में सहमति नहीं बन रही। हां, रक्षा संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जरूर है, जिन्हें खूब प्रचारित किया जा रहा है।

क्या कहते हैं जानकार

ट्रंप ऐसे देश का दौरा कर रहे हैं, जहां उन्हें कड़े सवालों से रूबरू नहीं होना है। अमेरिका में भारतीय समुदाय मुख्यत: डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट करता है। चर्चा इस बात की है कि ट्रंप के दौरे के पीछे घरेलू वजहें हैं और इसका मकसद कुछ हद तक चुनाव में भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाताओं को आकर्षित करना है।
– कार्तिक रामकृष्णन, प्रोफेसर, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी

ट्रंप ने आज दो बातें कही भारत और अमेरिका साथ हैं इसलामिक चरमपंथ से लड़ने में। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को (अमेरिका) के लिए प्राथमिकता बताया है। अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी की जमीन तैयार करने में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है।
– विवेक काटजू, पूर्व विदेश सचिव

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