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कथक में बहुरंग और प्रकृति का चित्रण

पिछले दिनों दिल्ली में नृत्य समारोह के आयोजन में प्रसार भारती अभिलेखागार की ओर से डीवीडी ‘पंडित बिरजू महाराज का कथक’ का लोकार्पण किया गया।

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पिछले दिनों दिल्ली में नृत्य समारोह के आयोजन में प्रसार भारती अभिलेखागार की ओर से डीवीडी ‘पंडित बिरजू महाराज का कथक’ का लोकार्पण किया गया। इसे प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार, सुरेश चंद्र पंडा, पंडित बिरजू महाराज व नृत्यांगना शास्वती सेन ने लोकार्पण किया।

कार्यक्रम में सुजाता बनर्जी की नृत्य रचना ‘टू गेदर वी कैन’ में पर्यावरण परिवर्तन और उससे प्रभावित प्रकृति व जीवन का चित्रण किया गया था। इसे कथक की तकनीकी बारीकियों के साथ उठान, तिहाइयों, परणों और गत निकास के जरिए पिरोया गया था। नृत्य करते हुए, कलाकार संवाद बोलते हैं कि यह जीवन धरती पर है और धरती अपना संतुलन खो रही है। अतिवृष्टि को बंदिश ‘घनघोर बादर घनन-घनन गरजत है’ के जरिए निरूपित किया गया। वहीं, गतों और तिहाइयों से गरमी के मौसम की परेशानियों को दर्शाया गया। इसमें शिरकत करने वाले कलाकार थे-मिथुन गिल, रूपल गांधी, सोनिया चंदरिया, विद्या पटेल, अयान, कंचन व करण। संगीत की रचना शम्मी पीठिया ने की थी।

समारोह की अगली पेशकश ‘कन्या अंबालिका’ थी। इसकी परिकल्पना पारमीता मैत्रा ने की थी। नारी शोषण और अत्याचार को नायिका फूलमती के जरिए पेश किया गया। ईंट भट्ठे की पृष्ठभूमि में नायिका फूलमती के जीवन चरित्र को नृत्यांगना ने प्रदर्शित किया। उस की मजबूरी और मातृत्व की चुनौती को स्वीकारने के दृश्य को परमीता ने चित्रित किया। नृत्य में हर चरित्र को दृश्यमान किया गया था। इससे प्रस्तुति नृत्य पक्ष कम नाट्य अभिनय ज्यादा प्रबल होता नजर आया। नृत्यांगना नकारात्मक चरित्र को अपने स्वयं के अभिनय में भी दर्शातीं तो प्रभाव ज्यादा अच्छा पड़ता। नृत्य के दौरान नायिका के भावों को दर्शाने के लिए रचनाआें-‘सैंया न जा परदेस’, ‘तुझको भी काष जलवा-ए कतरा’ व ‘नि सई असी नैना दी’ का चयन किया गया। इस प्रस्तुति के लिए अरूप शंकर मित्रा की कथा, अमल चक्रवर्ती की स्क्रिप्ट व देबाशीष घोष के संगीत को आधार बनाया गया।

पंडित जयकिशन महाराज की नृत्य रचना ‘मीराधे’ अगली पेशकश थी। इस नृत्य प्रस्तुति में नायिका राधा व मीरा और उनका कृष्ण क प्रति समर्पण व प्रेम निरूपित किया गया। जहां एक ओर रचना ‘हमको ना तरपाओ कान्हा’ में राधा के भावों को जया भट्ट ने दर्शाया, वहीं दूसरी ओर रचना ‘तोहे ढूंढू इत-उत याम’ में मीरा के भावों को अनुकृति विश्वकर्मा ने प्रस्तुत किया। इसके अलावा ‘कृष्ण कान्हा और घनश्याम’, ‘सांवरे तेरे मैं रंग राची’ व ‘श्रीकृष्ण निरतत थुंग-थुंग’ के जरिए कृष्ण व दोनों नायिकाओं के भावों का चित्रण नृत्यांगनाओं व नर्तक त्रिभुवन महाराज ने पेश किया।

कमानी सभागार में आयोजित नृत्य समारोह का समापन वाद्य प्रसंग से हुआ। इस प्रस्तुति के दौरान पंडित बिरजू महाराज, जयकिशन महाराज, उत्पल घोषाल, प्रसून चतुरलाल ने अलग-अलग वाद्यों पर पांच तालों को बजाया। जबकि कृष्ण मोहन मिश्रा, राममोहन महाराज, दीपक महाराज, इप्सीता मिश्रा ने नृत्य पेश किया। तीन ताल पर सिंजिनी कुलकर्णी, त्रिभुवन महाराज और रागिनी महाराज ने कथक नृत्य पेश किया। ममता महाराज ने धमार ताल पर नृत्य पेश किया।

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