ताज़ा खबर
 

प्रेगनेंसी के दौरान न करें साबुन का ज्यादा प्रयोग, बरना हो सकता है खतरा

साबुन और शैंपू जैसे व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों, डिब्बाबंद खाद्य और कई अन्य दैनिक उत्पादों के लंबे समय तक संपर्क में रहना गर्भपात का कारण हो सकता है।

Author बीजिंग | Published on: September 4, 2015 1:22 PM

साबुन और शैंपू जैसे व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों, डिब्बाबंद खाद्य और कई अन्य दैनिक उत्पादों के लंबे समय तक संपर्क में रहना गर्भपात का कारण हो सकता है। चीन में बीजिंग की पेकिंग यूनिवर्सिटी में 300 से अधिक महिलाओं पर किए गए एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ फैथलेट्स जिनका प्रयोग दैनिक इस्तेमाल की चीजों में किया जाता है, उनका गर्भपात से संबंध हो सकता है जो कि अधिकांश गर्भावस्था के 5 से 13 हफ्तों में होता है।

अध्ययन में इसके प्रमाण मिले हैं कि इन उत्पादों को बनाने वाले कारखानों के कामगार ही नहीं, इनके संपर्क में आने वाले आम लोगों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ता जियानयिंग ह्यू और उनके सहयोगियोंने चीन में 172 स्वस्थ गर्भवती महिलाओं और 132 महिलाओं जिनका गर्भपात हो चुका था, के पेशाब के नमूनों की जांच की।

उन्होंने पाया कि कुछ फैथलेट्स के उच्च स्तरों से संपर्क में रहने का गर्भपात से संबंध हो सकता है। इनमें से कई उत्पाद रंग-रोगन, मेडिकल ट्यूब्स, विनायल फ्लोरिंग, साबुन, शैंपू और अन्य चीजों में शामिल होते हैं।

फैथलेट्स पर हुए पूर्व शोध बताते हैं कि इनके कम स्तर के कुछ मिश्रणों से लंबे समय तक संपर्क में रहना प्रयोगशालाओं के जीवों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है और उनके गर्भपात के खतरे को बढ़ा सकता है।

एक अध्ययन में पाया गया कि कारखानों में काम करने के कारण फैथलेट्स के उच्च स्तरों से संपर्क में आने वाली महिलाएं के गर्भपात का खतरा अधिक होता है। यह अध्ययन एंवयारमेंट साइंस एंड टेक्नोलोजी जर्नल में प्रकाशित हुआ।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories