केंद्र ने बिहार सरकार से PDS के लाभार्थियों का विवरण वेब पोर्टल पर डालने को कहा

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान के निर्देश पर बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की समीक्षा करने के लिए राज्य के दौरे पर आई एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम ने प्रदेश सरकार से पीडीएस के खाद्यान्नों को समय पर उठाने और सभी लाभार्थियों का डाटा वेब पोर्टल पर डालने के लिए कहा है।

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केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान के निर्देश पर बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की समीक्षा करने के लिए राज्य के दौरे पर आई एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम ने प्रदेश सरकार से पीडीएस के खाद्यान्नों को समय पर उठाने और सभी लाभार्थियों का डाटा वेब पोर्टल पर डालने के लिए कहा है।

पत्र सूचना कार्यालय द्वारा गुरुवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बिहार के शेखपुरा जिले के बरबीघा में जागो मांझी नामक एक वृद्ध की कथित रूप से भूख से मौत के मद्देनजर पासवान के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय केंद्रीय टीम ने राज्य में पीडीएस की समीक्षा करने के लिए खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव दीपक कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने पिछले महीने के अंतिम सप्ताह में इस प्रदेश का दौरा किया था।

खाद्य मंत्रालय की इस टीम ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पीडीएस के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने पर पाया कि कुछ जिलों में खाद्यान्नों का समय से उठान न होने से पीडीएस के लाभार्थियों को समय पर राशन नहीं मिल पा रहा है। राज्य सरकार ने अभी तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों के आंकड़े पीडीएस पोर्टल पर अपलोड नहीं किए हैं, जो अनुदान वाले खाद्यान्नों के आबंटन के लिए अनिवार्यता है।

इससे अभी भी बड़ी संख्या में बिहार में लोगों को दो रुपए किलो की दर से गेहूं और तीन रुपए किलो की दर से चावल नहीं मिल पा रहा है। केंद्रीय टीम की समीक्षा के बाद बिहार सरकार से कहा गया है कि वह भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से खाद्यान्नों का समय पर उठान सुनिश्चित करे, ताकि माह के प्रारंभ में ही खाद्यान्न राशन की दुकानों तक पहुंच जाएं। यह भी कहा गया है कि वे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के सभी लाभार्थियों का डाटा राज्य के पीडीएस पोर्टल पर अपलोड करे।

समीक्षा के दौरान केंद्रीय टीम को यह बताया गया कि खाद्यान्नों के उठान की समस्या केवल पटना, अररिया, भोजपुर, भागलपुर और सहरसा जिलों में ही है। इन जिलों में अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर गोदामों में छापे मारे गए और कुछ निजी ट्रांसपोर्टरों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। राज्य सरकार को इस बात से भी अवगत कराया गया कि आॅनलाइन आबंटन का फॉर्मेट भी एनआइसी द्वारा सुझाए गए फार्मेट के अनुसार नहीं है और उसे तदनुसार संशोधित करने का अनुरोध किया गया है।

राज्य सरकार से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह आॅनलाइन आबंटन का लिंक राज्य के खाद्य विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराए, जो वर्तमान में राज्य नागरिक आपूर्ति पोर्टल पर ही उपलब्ध है। समीक्षा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लीकेज को रोकने के उद्देश्य से राज्य लाभार्थियों की बायोमीट्रिक पहचान के लिए राशन की दुकानों पर यथाशीघ्र उपकरण लगाए।

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