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नन्हीं दुनियाः बुद्धिमान मछुआरा और दुष्ट राजा

मगनू एक गरीब मछुआरा था। एक दिन उसके जाल में बहुत बड़ी मछली फंस गई। मगनू बड़ा खुश हुआ। उसने आज तक इतनी बड़ी मछली नहीं पकड़ी थी।
Author February 14, 2016 02:25 am

मगनू एक गरीब मछुआरा था। एक दिन उसके जाल में बहुत बड़ी मछली फंस गई। मगनू बड़ा खुश हुआ। उसने आज तक इतनी बड़ी मछली नहीं पकड़ी थी। वह खुशी-खुशी मछली को कंधे पर लाद कर तेजी से अपने घर की ओर चल दिया। तभी दो सिपाहियों ने उसका रास्ता रोक लिया। उन्होंने कड़क आवाज में कहा,‘अरे मछुआरे, इतनी बड़ी मछली का तू क्या करेगा? यह तो शाही बावर्चीखाने में जानी चाहिए।’
मगनू ने गिड़गिड़ाकर कहा, ‘नहीं भैया, ऐसा मत करो। मैं अपनी पत्नी को यह उपहार में देना चाहता हूं ताकि वह हमारे दोनों छोटे-छोटे बच्चों और हम दोनों के लिए बढ़िया भोजन बना कर दे सके।’
लेकिन सिपाहियों ने उसकी एक न सुनी। वे मगनू को मछली सहित पकड़ कर राजा के पास ले गए।
महल में पहुंचकर उन्होंने राजा से कहा, ‘महाराज! यह धृष्ट मछुआरा शाही रसोई के लिए मछली नहीं दे रहा था, अपनी पत्नी के लिए ले जा रहा था..।’ मगनू घबरा गया। वह राजा के सामने साष्टांग दंडवत करके उनसे क्षमा मांगने लगा। राजा निर्दयी था। उसने कहा, ‘मैं तुम्हें क्षमा कर सकता हूं। लेकिन तभी, जब तुम कुछ अनूठा काम करके दिखाओ।’
मगनू ने पूछा, ‘कैसा अनूठा काम महाराज?’ राजा ने कहा, ‘जैसे..जैसे..तुम एक साथ रोकर और हंस कर दिखाओ। जाओ तुम्हें एक दिन का समय देता हूं, कल आना और यह काम करके दिखाना।’ सभी दरबारी मन ही मन खूब हंस रहे थे। भला कोई इंसान हंसने और रोने का काम एक साथ कैसे कर सकता है।
मगनू उदास मन से घर पहुंचा। पत्नी ने उसे खाली हाथ और मुंह लटकाए हुए देखा तो पूछा, ‘क्या बात है, आज बहुत उदास लग रहे हो?’ मगनू ने पूरी बात बता दी। उसकी पत्नी बुद्धिमान थी। उसने कहा, चिंता मत करो, यह तो बहुत आसान काम है..और उसने मगनू को उपाय बता दिया।
अगले दिन मगनू महल में जा पहुंचा। राजा का अभिवादन करके उसने कहा, ‘महाराज! मैं अब आपको वह अनूठा काम करके दिखाता हूं।’ कह कर उसने थैले से एक बड़ा सा प्याज निकाला और उसे हाथों में दबा कर फोड़ दिया। प्याज के फूटने पर मगनू की आंखों से झरझर आंसू बहने लगे। उसी समय उसने ठहाके मारकर हंसना शुरू कर दिया। जो दरबारी कल उसका मजाक उड़ा रहे थे, वे ही आज तालियां बजाकर उसकी सूझबूझ की सराहना करने लगे। मगनू ने सचमुच अनूठा काम करके दिखाया।
लेकिन राजा बड़ा दुष्ट था। अपनी बात से मुकरते हुए उसने कहा, ‘चलो, यह तो बड़ा आसान काम था, लेकिन असली अनूठा काम तुम कल करके दिखाना। कल तुम दरबार में आओ तो ऐसे आना कि निवस्त्र भी न हो और नंगा भी दिखे। मगनू राजा की इस हरकत से बहुत दुखी हुआ और उदास मन से घर पहुंच गया। घर जाकर उसने पत्नी को सारी बात बताई। पत्नी ने कहा, ‘चिंता क्यों करते हो? तुम अभी थके हुए हो, खाना खाकर सो जाओ। मैं तुम्हें उपाय बता दूंगी।’
अगले दिन मगनू फिर दरबार में जा पहुंचा। उसे देखकर दरबारियों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। मगनू राजा के सामने खड़ा होकर बोला, ‘महाराज की जय हो! देखिए महाराज, मैं निर्वस्त्र नहीं हूं, लेकिन मैंने कपड़े भी नहीं पहने हैं।’ राजा ने देखा, मगनू बिल्कुल सही कह रहा था। उसने मछली पकड़ने वाले जाल को ही अपनी शरीर पर सलीके से लपेट रखा था।
इस बार राजा ने कहा, ‘भाई, तुम्हें मान गए। बस एक बार तुम्हारी बुद्धिमानी का नमूना और दिखाओ। कल हमें तुम ऐसी कहानी सुनाओ, जो हम कभी भूल न सके। मगनू ने घर आकर पत्नी को राजा के नए सवाल के बारे में बताया। पत्नी ने उसे कहानी बता दी।

मगनू राजदरबार में हाजिर हुआ और बोलाए ‘महाराज! सुनिए न भूलने वाली कहानी। एक अमीर था। उसके पास दस हजार सोने की और दस हजार चांदी की मोहरें थीं। हजारों तांबे के सिक्के थे। एक दिन घोड़े पर सवार होकर घर लौटते समय उसने सड़क पर पड़ा तांबे का एक सिक्का देखा।
घर पहुंचते ही उसने अपने कई सेवकों को वह सिक्का ढूंढ़ कर लाने को भेज दिया। राजा ने बीच में ही टोकते हुए चिल्लाकर कहा, ‘ क्या बकवास करते हो? इतना अमीर आदमी एक तांबे के सिक्के के पीछे क्यों भागेगा?’
मगनू ने चट से कहा, ‘महाराज! वैसे ही जैसे आप जैसा सम्राट शाही रसोई के लिए एक गरीब की मछली के पीछे अपने सैनिक दौड़ा देता है…।’ राजा का सिर शर्म से झुक गया। उसने कहा, ‘हमें तुम्हारा जवाब पसंद आया। तुम्हें तुम्हारी बुद्धिमानी और मछली की पूरी कीमत मिलेगी।’ यह कहकर राजा ने मगनू को सौ सोने की मोहरों से भरी थैली इनाम में दिलवाई। मगनू खुशी-खुशी घर लौट आया। ०

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