Ethical contracting in the Kolkata Metro debates on the safety of fast - कोलकाता: मेट्रो में नैतिक ठेकेदारी ने तेज की सुरक्षा पर बहस - Jansatta
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कोलकाता: मेट्रो में नैतिक ठेकेदारी ने तेज की सुरक्षा पर बहस

कोलकाता में अगर दमदम मेट्रो स्टेशन पर कोई अपराध हुआ तो लोगों को इसकी शिकायत के लिए सिंथी थाने तक जाना पड़ता है। इस चक्कर में कई लोग शिकायत ही दर्ज नहीं कराते। मारपीट की घटना भी दमदम स्टेशन पर हुई थी। लेकिन कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। कोलकाता में मेट्रो का पूरा नेटवर्क कोलकाता पुलिस के अधीन है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि मेट्रो के 27.22 किमी लंबे रूट में महज 23 स्टेशन हैं। अब देश के इस सबसे पहले मेट्रो के लिए अलग से पुलिस थानों की स्थापना की मांग तेज हो रही है।

नैतिक ठेकेदारी के खिलाफ कोलकाता में होक आलिंगन कार्यक्रम के जरिए विरोध जताया गया।

कोलकाता मेट्रो के एक कोच में बीते सप्ताह हुई नैतिक ठेकेदारी की घटना से पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसबीच, इससे मेट्रो रेलवे व स्टेशनों पर सुरक्षा के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हाल के कुछ महीनों से महानगर में नैतिकता के अलंबरदारों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। अब ताजा मामले में कोलकाता मेट्रो में एक युवा जोड़े के कथित रूप से अश्लील तरीके से लिपटने के आरोप में कुछ लोगों ने नैतिक ठेकेदार की भूमिका निभाते हुए दमदम स्टेशन पर उसके साथ मारपीट की। हालांकि इस मामले में पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। कुछ दूसरे सहयात्रियों ने उस जोड़े को बचा कर बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मेट्रो में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने एक जोड़े के रवैए पर आपत्ति जताते हुए उनसे संयत रहने को कहा। लेकिन उलटे युवक उस बुजुर्ग से भिड़ गया। वाद-विवाद बढ़ने के बाद दमदम स्टेशन पर मेट्रो से बाहर निकलते ही कुछ लोगों ने युवक की पिटाई कर दी। इस घटना के खिलाफ अगले दिन ही बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया। मेट्रो रेलवे प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर इस मामले पर सफाई दी।

इस घटना के विरोध में अगले दिन छात्रों ने विभिन्न मेट्रो स्टेशनों के बाहर प्रदर्शन किया और लोगों को गले लगाया। मोरल पुलिसिंग की घटनाओं पर समाज के लोगों की राय मिलीजुली है। युवा तबका जहां इसके खिलाफ है वहीं बुजुर्गों का कहना है कि युवा वर्ग को सार्वजनिक स्थानों पर शालीनता का ध्यान तो रखना ही चाहिए। हालांकि वह लोग भी मारपीट को गलत मानते हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना के समर्थन व विरोध में नए पोस्टों की बाढ़ सी आ गई है। अभिनेता पार्नो मित्र कहते हैं कि हमारे समाज में असहिष्णुता बढ़ रही है। लेकिन नैतिक अलंबरदारी व मारपीट का समर्थन नहीं किया जा सकता। लेखक शीर्षेंदु मुखर्जी कहते हैं कि दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थानों पर शालीनता की सीमा नहीं लांघना ही बेहतर है। लेकिन मेट्रो की घटना हैरान करने वाली है। उनका सवाल है कि क्या हम जंगल में रह रहे हैं ?

दूसरी ओर, इस घटना ने मेट्रो रेलवे में सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने घटना के पांच दिन बाद इस मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू की है। पहले तो वह पीड़ित जोड़े की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं होने का हवाला देकर जांच से बचती रही। यहां मेट्रो स्टेशन तो स्थानीय थाने के अधिकार क्षेत्र में हैं, लेकिन मेट्रो रेलवे पुलिस कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (दक्षिण क्षेत्र) के अधीन है। इससे ज्यादातर मामलों में शिकायत दर्ज कराने वालों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ती है। कोलकाता मेट्रो ने इस मामले में दिल्ली मेट्रो से सबक नहीं सीखा है। दिल्ली पुलिस ने मेट्रो रेलवे से संबंधित शिकायतों की जांच व निपटारे के लिए छह मेट्रो थानों की स्थापना की है। इससे लोगों को पता होता है कि किसी अपराध की शिकायत कहां करनी है।

 

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