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संपादकीयः गिरफ्तारी और सियासत

जब सीबीआई के अधिकारी उनके घर पहुंचे, तो चिदंबरम ने उनके साथ सहयोग नहीं किया। कई घंटे तक वे सीबीआई के सामने नहीं आए। कांग्रेस के दफ्तर में प्रेस वार्ता करके उन्होंने सफाई दी कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वे कानूनी रास्ते तलाश रहे थे। फिर जब न्यायालय ने इस मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, तो सीबीआई की सक्रियता तेज हो गई।

Author Published on: August 23, 2019 2:16 AM
INX मामले में सीबीआई ने काफी छानबीन की और चिदंबरम के बेटे के खिलाफ मामला दर्ज किया। उसकी एफआईआर में चिदंबरम का नाम नहीं था, पर अदालत ने उन्हें मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर पूछताछ करने का निर्देश दिया।

पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद सियासी सरगर्मी कुछ बढ़ गई है। गिरफ्तारी के तरीके और अदालत के निर्देश पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। कांग्रेस और विपक्षी दल इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रहे हैं। आपातकाल के बाद शायद इस तरह किसी बड़े नेता की गिरफ्तारी नहीं हुई। पी. चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्तमंत्री रहते हुए कम से कम चार मामलों में रिश्वत लेकर संबंधित कंपनियों को लाभ पहुंचाया। इसमें उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की कंपनी और कुछ अन्य फर्जी कंपनियों के जरिए रिश्वत के पैसे लिए गए और कुछ भारतीय कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई। उनमें आइएनएक्स मीडिया कंपनी प्रमुख है, जिसे इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी चलाते थे। इस मामले में सीबीआई ने काफी छानबीन की और चिदंबरम के बेटे के खिलाफ मामला दर्ज किया। उसकी एफआईआर में चिदंबरम का नाम नहीं था, पर अदालत ने उन्हें मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर पूछताछ करने का निर्देश दिया।

अदालत ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि जरूरी नहीं कि जिसके खिलाफ मामला दर्ज हो उसे ही आरोपी माना जाए, पीछे रह कर संचालन करने वाले को ज्यादा दोषी माना जाना चाहिए। इसी आधार पर चिदंबरम को गिरफ्तार किया गया। हालांकि सीबीआई के उन्हें गिरफ्तार करने के तरीके को लेकर भी कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं। जब सीबीआई के अधिकारी उनके घर पहुंचे, तो चिदंबरम ने उनके साथ सहयोग नहीं किया। कई घंटे तक वे सीबीआई के सामने नहीं आए। कांग्रेस के दफ्तर में प्रेस वार्ता करके उन्होंने सफाई दी कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वे कानूनी रास्ते तलाश रहे थे। फिर जब न्यायालय ने इस मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, तो सीबीआई की सक्रियता तेज हो गई। आखिरकार बुधवार की रात को कुछ अधिकारी दीवार फांद कर चिदंबरम के घर में दाखिल हुए और उन्हें गिरफ्तार किया।

इस घटना के बाद कांग्रेस कहते नहीं थक रही कि भाजपा सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। वह अपने सभी विरोधियों पर शिकंजे कस रही है। इसके लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, पुलिस जैसी संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है। इन मुद्दों को लेकर वह देशव्यापी अभियान छेड़ने के लिए भी कमर कस रही है। पर सवाल है कि राजनेता अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने के लिए कानूनी रास्ते निकालते रहते हैं, हर तरह से अदालतों और जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश करते रहते हैं, वह कहां तक उचित है!

इस मामले में अदालत का कहना है कि पी. चिदंबरम और उनके बेटे ने कभी अपेक्षित सहयोग नहीं किया। वे लगातार अग्रिम जमानत लेकर कानूनी शिकंजे से बचते चले आ रहे थे। क्या एक सामान्य नागरिक को इस तरह कानूनी कार्रवाई से बचते रहने की छूट मिल सकती है! फिर चिदंबरम खुद देश के जिम्मेदार पदों का निर्वाह कर चुके हैं, उनसे कानूनी कार्रवाई में मदद की अपेक्षा की जाती थी। मगर वे जिस तरह गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपते फिर रहे थे, उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जहां तक सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग की बात है, कांग्रेस खुद इस आरोप से मुक्त नहीं है। भ्रष्टाचार के मामलों में अपनी खाल बचाने के लिए जब राजनेता और राजनीतिक दल सियासी चालें चलते हैं, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर ही होती है।

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