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शोध: अमेरिका में मस्तिष्क खा जाने वाले अमीबा का संक्रमण

मस्तिष्क के उत्तकों को खाने वाले अमीबा का प्रसार अमेरिका और कई अन्य देशों में चिंता का कारण बनता जा रहा है। अभी तक इस अमीबा से संक्रमित 97 फीसद लोगों की मौत हो चुकी है। नेग्लेरिया फाओलेरी नामक अमीबा का संक्रमण कुछ समय पहले अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों में फैला था, लेकिन अब यह देश के उत्तरी इलाके में फैलने लगा है। इस अप्रत्याशित प्रसार का कारण जलवायु परिवर्तन माना जा रहा है।

Author Updated: January 4, 2021 11:33 PM
Diseaseसांकेतिक फोटो।

अमेरिका में मस्तिष्क के उत्तकों को धीरे-धीरे खा जाने वाले नए किस्म के एक अमीबा के संक्रमण का पता चला है। अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों से शुरू हुआ यह संक्रमण अब वहां के उत्तरी इलाकों में फैलने लगा है। इस अमीबा का नाम ‘नेग्लेरिया फाओलेरी’ है। इस अमीबा के संक्रमण के अप्रत्याशित प्रसार का कारण जलवायु परिवर्तन माना जा रहा है। यह अमीबा एक इंसान से दूसरे इंसान को संक्रमित नहीं करता।

इस साल सितंबर की शुरुआत में टेक्सास में छह साल के बच्चे ने एक मस्तिष्क खाने वाले अमीबा की वजह से अपनी जान गंवा दी थी। इस बात की पुष्टि होने के बाद वहां शोधकर्ताओं का दल यह पता करने में जुट गया कि इसके प्रसार की वजह क्या है। इस खबर ने अमेरिका में सनसनी फैला दी थी। बताया गया था वह बच्चा एक किस्म के अमीबा से संक्रमित था। यह अमीबा उसके शहर के पानी की आपूर्ति प्रणाली में पाया गया था।

अमेरिका के ‘सेंटर्स फॉर द डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (सीडीसी) ने इस नए तरह के संक्रमण को लेकर शोध शुरू किया। सीडीसी के मुताबिक, इस संक्रमण के मामले अब तेजी से फैल रहे हैं। ये मामले अमेरिका के उत्तर एवं मध्य पश्चिमी राज्यों में बढ़ रहे हैं।

शोध के शुरुआती नतीजों में पाया गया है कि यह संक्रमण अमीबा युक्त पानी पीने से नहीं होता, बल्कि यह पानी के नाक में जाने से होता है। यह अमीबा नाक की परतों से शरीर में प्रवेश करता है और दिमाग में घुस जाता है। इस अमीबा के संक्रमण के कुछ खास लक्षण हैं। जैसे, बहुत तेज माइग्रेन, हाइपरथर्मिया, गर्दन में अकड़न और उल्टी जैसे लक्षणों के बाद चक्कर आना, बहुत ही ज्यादा थकान, भ्रम-मतिभ्रम की स्थिति। इसके संक्रमण के 12 दिन के बाद मौत हो जाती है।

हाल ही ‘इमरजिंग इंफेक्शियस डिजीज’ नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक नेग्लेरिया फाओलेरी के प्रसार की वजह बढ़ते तापमान और पानी में होनी वाली मनोरंजन गतिविधियां हैं। लेकिन इसकी पुष्टि के लिए और अध्ययन की जरूरत है। यह महासागरों में मौजूद नमकीन पानी से नहीं फैलता है, लेकिन फिर भी दुनिया के कई और देशों में इस संक्रमण के फैलने की भी खबरें हैं।

शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि नेग्लेरिया फाओलेरी गर्म साफ पानी और मिट्टी में रहता है। चूंकि यह अमीबा नाक के जरिए शरीर में घुसता है, ऐसे पानी में तैरना नुकसानदायक हो सकता है। इस अमीबा के जरिए होने वाली बीमारी को ‘प्राइमरी एसेशियल अमीबिक मेनिनजोएनसेफालिटिल (पीएएम)’ कहा जाता है। यह अमीबा एक इंसान से दूसरे इंसान को संक्रमित नहीं करता।

सीडीसी का कहना है कि नेग्लेरिया फाओलेरी बहुत ही कम होने वाला संक्रमण है। अब तक इस अमीबा से संक्रमण के 34 मामले सामने आए हैं। लेकिन इसमें मरने वालों की दर 97 फीसद है।

अमेरिका में इसका संक्रमण जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीने में पाया गया है, जब तापमान ज्यादा था। इस बीमारी की मौजूदगी की पहचान का कोई टेस्ट नहीं बन सका है। लक्षणों से ही इस बीमारी की पहचान हो पाती है। जब तक लक्षण प्रमुखता से दिखते हैं, तब तक मरीज की स्थिति नियंत्रण से बाहर चली जाती है।

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