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सीआईसी का आदेश-सार्वजनिक होगा महात्मा गांधी की हत्या पर नाथूराम गोडसे का बयान

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा, कोई नाथूराम गोडसे और उनके सह-आरोपी से इत्तेफाक भले ही ना रखें, लेकिन हम उनके विचारों का खुलासा करने से इनकार नहीं कर सकते।

नाथू राम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को महात्‍मा गांधी की हत्‍या की थी।

महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े नाथूराम गोडसे के बयान सहित अन्य संबंधित रिकॉर्ड को तुरंत राष्ट्रीय अभिलेखागार की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का आदेश केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दिया है। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा, कोई नाथूराम गोडसे और उनके सह-आरोपी से इत्तेफाक भले ही ना रखें, लेकिन हम उनके विचारों का खुलासा करने से इनकार नहीं कर सकते। उन्होंने अपने आदेश में कहा, ना ही नाथूराम गोडसे और ना ही उनके सिद्धांतों और विचारों को मानने वाला शख्स किसी के सिद्धांतों से असहमत होने की स्थिति में उसकी हत्या करने की हद तक नहीं जा सकता है। दक्षिणपंथी कार्यकर्ता गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी।

याचिका दायर करने वाले आशुतोष बादल ने दिल्ली पुलिस से इस हत्याकांड का आरोपपत्र और गोडसे के बयान सहित अन्य जानकारी मांगी है। दिल्ली पुलिस ने उनके आवेदन को राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत के पास भेजते हुए कहा है कि रिकॉर्ड उन्हें सौंप दिया गया है। राष्ट्रीय अभिलेखागार ने बंसल से कहा कि वह रिकॉर्ड देखकर स्वयं सूचनाएं हासिल कर लें। सूचना पाने में असफल रहने के बाद बंसल केन्द्रीय सूचना आयोग पहुंचे हैं। आचार्युलु ने राष्ट्रीय अभिलेखागार के केंद्रीय जन सूचना आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह फोटोप्रति के लिए तीन रुपये प्रति पेज फीस न लें।

हालांकि, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय अभिलेखागार ने सूचना सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं जताई है। आचार्युलु ने कहा कि मांगी गई सूचना के लिए किसी छूट की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि सूचना 20 वर्ष से ज्यादा पुरानी है, ऐसी स्थिति में यदि वह आरटीआई कानून के प्रावधान 8:1:ए: के तहत नहीं आता तो उसे गोपनीय नहीं रखा जा सकता। इस सेक्शन के तहत देश की सुरक्षा या दूसरे देशों से रिश्तों को प्रभावित करने वाली सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं।

आचार्युलु ने कहा कि इस मामले में सेक्शन 8(1)(a) लागू नहीं होता क्योंकि गोडसे के बयान से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच शत्रुता नहीं फैलेगी। सूचना आयुक्त ने कहा कि गांधी का जीवन, चरित्र और शांति दूत, स्वतंत्रता संग्राम व हिंदू-मुस्लिम एकता के महानायक की उनकी छवि शारीरिक रूप से उन्हें मिटाने या उनकी नीतियों के खिलाफ सैकड़ों पेज लिखने के बाद भी नहीं मिट सकती।

 

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