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BCCI की बढ़ सकती थी परेशानी इसलिए DDCA ने नकारी लोढ़ा पैनल की सिफारिशें

दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने से मना कर दिया। ये सिफारिशें अगर लागू हो जाती हैं तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की राज्य इकाइयां परेशानी में पड़ सकती हैं और उनके कामकाज पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

Author नई दिल्ली | February 18, 2016 1:18 AM
दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ

दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने से मना कर दिया। ये सिफारिशें अगर लागू हो जाती हैं तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की राज्य इकाइयां परेशानी में पड़ सकती हैं और उनके कामकाज पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। डीडीसीए के उपाध्यक्ष सीके खन्ना और चेतन चौहान ने संयुक्त बयान जारी कर यह जानकारी दी है। बयान के मुताबिक डीडीसीए की प्रबंध समिति की बुधवार को लोढ़ा समिति के विभिन्न सिफारिशों की समीक्षा के लिए बैठक हुई। समिति बीसीसीआइ के संचालन ढांचे में आमूलचूल सुधारों से संबंधित प्रमुख सिफारिशों से सहमत नहीं है।

डीडीसीए चुनाव और पदाधिकारियों के कार्यकाल, डीडीसीए पदाधिकारियों का एक साथ बीसीसीआइ पद भी संभालना, प्राक्सी मतदान और हितों के टकराव सहित अन्य मसलों पर लोढ़ा पैनल से सहमत नहीं है। एक व्यक्ति के एक पद पर रहने के मसले पर डीडीसीए ने बयान में कहा है कि डीडीसीए की प्रबंध समिति को लगता है कि यह फैसला संबंधित राज्य इकाई की स्वतंत्रता है कि पदाधिकारियों की नियुक्ति से डीडीसीए के प्रशासनिक काम प्रभावित होते हैं या उनमें रुकावट आती है। इस बयान पर दो बयान में कहा गया है कि जब तक कार्यकारी समिति (निदेशकों) के सदस्यों को नहीं लगता कि डीडीसीए का कामकाज प्रभावित हो रहा है तब तक इस नियम को लागू करने का कोई उचित कारण नहीं हो सकता है। डीडीसीए प्राक्सी मतदान जारी रखने के पक्ष में है।

बयानके मुताबिक यह व्यवस्था जारी रहनी चाहिए क्योंकि कई संघों में स्वयं मतदान का प्रावधान है। जो संघ कंपनी अधिनियम के तहत आते हैं वे कानूनी तौर पर 1956 के अधिनियम की धारा 176-178 से बंधे हुए हैं। यहां तक कि एक व्यक्ति का प्राक्सी नियुक्त किए जाने पर डीडीसीए का कोई भी सदस्य आकर उसके बदले मतदान कर सकता है। डीडीसीए हालांकि भविष्य में राज्य संघों को आरटीआइ कानून के तहत लाने के प्रति आशावादी दिखा लेकिन उसने चुनावों और पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर सिफारिशों को नामंजूर कर दिया। बयान में कहा गया है कि पदाधिकारियों का चुनाव डीडीसीए संविधान के तहत लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है। इसके कार्यकाल में किसी तरह की सीमा तय करना उचित नहीं होगा।

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