ताज़ा खबर
 

मोदी नहीं बेदी के ख़िलाफ़ है दिल्ली

विवेक सक्सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने भले ही दिल्ली विधानसभा चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा हो। लेकिन गुप्तचर ब्यूरो (आइबी) की नवीनतम रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक राजधानी में ज्यादातर मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में हैं। लेकिन वे किरण बेदी के खिलाफ हैं। लोकसभा चुनाव में […]
Author February 1, 2015 08:28 am
लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रति रखने वाले सरकारी कर्मचारी केंद्र सरकार से अब बेहद खफा हैं। (फ़ोटो-पीटीआई)

विवेक सक्सेना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने भले ही दिल्ली विधानसभा चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा हो। लेकिन गुप्तचर ब्यूरो (आइबी) की नवीनतम रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक राजधानी में ज्यादातर मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में हैं। लेकिन वे किरण बेदी के खिलाफ हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रति विशेष झुकाव रखने वाले सरकारी कर्मचारी केंद्र सरकार से अब बेहद खफा हैं। अहम बात तो यह है कि प्रशासनिक अनुभव व स्वच्छ छवि होने के बावजूद किरण बेदी का व्यक्तित्व मतदाता को आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

आइबी की रिपोर्ट भाजपा के लिए के लिए चिंताजनक कही जा सकती है। इसके मुताबिक जिस तरह भाजपा ने आम आदमी पार्टी (आप) और उसके संयोजक केजरीवाल के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी है, उसका दिल्ली की जनता पर बहुत गलत प्रभाव पड़ा है। आम आदमी को लगने लगा है कि केजरीवाल का हौवा इतना जबरदस्त है कि उससे प्रधानमंत्री और भाजपा दोनों घबड़ा गए हैं। हर विधानसभा सीट पर दो सांसद और डेढ़ दर्जन प्रभावशाली मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपना भी गलत संकेत दे रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जनता नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं है। उनकी अपनी छवि ज्यों की त्यों है। लेकिन किरण बेदी का व्यक्तित्व समस्याएं पैदा कर रहा है। वकीलोें से उनकी पुरानी अदावत भी भाजपा के लिए परेशानी पैदा कर सकती है क्योंकि पूरी दिल्ली में वकीलों के संगठन इस आशय के पर्चे बांट रहे हैं। इन पर्चों में कहा गया है कि हम भाजपा या नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं हैं पर किरण बेदी की तानाशाही वाले रवैए को देखते हुए हम आगाह करना चाहते हैं कि अगर वे मुख्यमंत्री बनीं तो दिल्ली का भट्ठा बैठ जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक उनकी छवि किसी भी रूप में जनता को अपना लगने वाले नेता की नहीं बन पा रही है। इसकी वजह उनका आपना आचरण और अफसराना रवैया भी है। वे आम मतदाता तो दूर रहा, पार्टी कार्यकर्ताओं तक से निकतटा स्थापित नहीं कर पा रही हैं। लोगों के मन में यह धारणा बन गई है कि मुख्यमंत्री के रूप में वे सहज उपलब्ध नहीं होंगी। अहम बात यह है कि उनके व्यक्तित्व में नारी सुलभ कोमलता की झलक नहीं मिलती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों की सरकार से नाराजगी बढ़ी है। इसकी वजह मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद जिस तरह से कड़ाई के साथ बायोमैट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू की गई है, उससे वे कर्मचारी भी नाराज हैं, जो कि लोकसभा चुनाव के पहले तक मोदी समर्थक थे। सबसे ज्यादा नाराजगी महिलाओं में है। राजधानी के दूरदराज इलाकों से आने वाले कर्मचारियों के लिए मंत्रालयों मे सुबह नौ से शाम 5-30 तक और अधीनस्थ दफ्तरों में 9-30 से 6 बजे तक का समय निर्धारित है। वे 10 मिनट तक देर से आ सकते हैं। अगर वे आधा घंटे देरी से आए तो उनकी आधे दिन की गैरहाजिरी लग जाती है। सरकारी कर्मचारियों में यह अफवाह फैली है कि अब इस हाजिरी को आधार कार्ड से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद महीने के अंत में वेतन मिलने पर ही पता चलेगा कि किसकी कितनी छुट्टी या वेतन कटा।

अहम बात यह है कि रिपोर्ट में सरकार को आगाह किया गया है कि अभी तक सकारात्मक रवैया अपनाने वाली मीडिया का रुख भी बदल रहा है। वह दिनों-दिन भाजपा के प्रति कड़ा रवैया अपना रहा है। सिर्फ दो-तीन चैनलों व अखबारों को छोड़कर बाकी सब अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आलोचनात्मक रुख अपना रहे हैं।
* गुप्तचर ब्यूरो ने सौंपी केंद्र सरकार को रिपोर्ट
* बायोमैट्रिक हाजिरी से खफा हैं सरकारी कर्मचारी
* बेदी के खिलाफ वकील दिल्ली में बांट रहे हैं पर्चे

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. D
    Dr
    Feb 1, 2015 at 3:28 pm
    राजनैतिक दलों की चिंता - केजरीवाल ने क्यों खाई बच्चों की कसम ! केजरीवाल ने बच्चों की कसम एक बार खाई थी वे इतने दोषी ! हमने तो श्री राम जी की कसमें कितने बार खाई हैं है होश !! केजरी वाल ने तो बच्चों की कसम खाई थी किन्तु हमने तो श्री राम मंदिर बनाने के लिए खाई हैं श्री राम जी की कसमें क्या हुआ कसमों का ! मैंने सुना है कि जिसकी झूठी कसमें खाई जाती हैं उसे पीड़ा पहुँचती है ! कहीं हमारी कसमों का ही दुष्परिणाम तो नहीं है कि श्री राम लला जी चबूतरे पर पड़े शर्दी गर्मी वर्षा रहे हैं !
    (0)(0)
    Reply