Dance Festival: The story of the rivers 'Ganges to Kaveri' - नृत्य समारोह : ‘गंगा से कावेरी’ नदियों की कथा - Jansatta
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नृत्य समारोह : ‘गंगा से कावेरी’ नदियों की कथा

ओडिशी नृत्यांगना अल्पना नायक ने दिव्यांग शिष्य-शिष्याओं को ओडिशी नृत्य सिखाने का बीड़ा उठाया। 15 साल से वे इस प्रयास में जुटी हुई हैं। उनके ये शिष्य-शिष्याएं मंच पर नृत्य पेश करते हैं, तो दर्शक कुछ अचंभे में पड़ जाते हैं।

भरतनाट्यम शैली में गुरु सरोजा वैद्यनाथन की शिष्याओं ने कावेरी की कथा पेश की।

पिछले दिनों नृत्य समारोह ‘गंगा से कावेरी’ का आयोजन इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया। इस समारोह में एक ही मंच पर कई गुरुओं की शिष्य-शिष्याओं ने नृत्य रचनाएं पेश कीं। समारोह में गुरु राजा राधा व कौशल्या रेड्डी, गुरु सरोजा वैद्यनाथन, गुरु गीता चंद्रन, गुरु रंजना गौहर और गुरु गीतांजलि लाल की शिष्याओं ने शिरकत की। आयोजन का विषय ‘गंगा से कावेरी’ समीचीन था और आकर्षक भी। सभी कलाकारों ने अलग नदियों का चयन भी किया। पर नदी संस्कृति से वैसा जुड़ाव नृत्य में न के बराबर दिखा। दरअसल, जीवन का अस्तित्व नदी और जल के संकट से जुड़ा है। इस विषय को किसी भी कलाकार ने छूने की कोशिश नहीं की। सबसे बेहतरीन प्रस्तुति ब्रम्हपुत्र थी। इसकी परिकल्पना ओडिशी नृत्यांगना रंजना गौहर ने की थी। उन्होंने ब्रम्हपुत्र के उद्गम की कथा से लेकर असम के कामाख्या मंदिर की कथा को पिरोया।कलाकारों का आपसी तालमेल बेहतरीन था। रचना ‘कामाख्या देवी नील पर्वतवासिनी’ पर आधारित नृत्य अंश की प्रस्तुति मोहक थी।

भरतनाट्यम शैली में गुरु सरोजा वैद्यनाथन की शिष्याओं ने कावेरी की कथा पेश की। इसी शैली में गुरु गीता चंद्रन की शिष्याओं ने नर्मदा नदी की कथा पेश की। मध्यप्रदेश से गुजरात तक बहने वाली नर्मदा नदी को शंकरी कहा जाता है। शिव की पुत्री नर्मदा में प्रवाहित हर पत्थर शिवलिंग में परिवर्तित हो जाता है। उनकी प्रस्तुति रचना ‘त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे’ पर आधारित थी। ओडिशी नृत्यांगना विंदु जुनेजा ने भी नर्मदा पर बेहतरीन नृत्य रचना ‘हर-हर नर्मदे’ पेश की थी, पुराना किला नृत्य समारोह के दौरान। कुचिपुडी नृत्य शैली में यमुना नदी की कथा को गुरु राजा, राधा और कौशल्या रेड्डी के निर्देशन में नाट्यतरंगिनी की शिष्याओं ने पेश किया। नृत्य समारोह का आरंभ कथक नृत्य शैली में प्रस्तुत नृत्य रचना गंगा से हुआ। इसकी परिकल्पना गुरु गीतांजलि लाल ने की थी।

नृत्य की एक शाम

ओडिशी नृत्यांगना अल्पना नायक ने दिव्यांग शिष्य-शिष्याओं को ओडिशी नृत्य सिखाने का बीड़ा उठाया। 15 साल से वे इस प्रयास में जुटी हुई हैं। उनके ये शिष्य-शिष्याएं मंच पर नृत्य पेश करते हैं, तो दर्शक कुछ अचंभे में पड़ जाते हैं। अल्पना के शिष्य-शिष्याओं ने इंद्रधनुष समारोह में ओडिशी नृत्य पेश किया। यह समारोह अल्पना की ओर से आजाद भवन सभागार में आयोजित था। अल्पना की युवा शिष्याओं ने उड़िया गीत पर अभिनय पेश किया। गीत ‘राधा रानी संगे नाचे मुरलीपाणी’ पर राधा, कृष्ण और गोपियों के भावों को पेश किया गया। अल्पना ने नृत्य नर्तर्की को पेश किया। यह नृत्य रचना आचार्य नंदिकेश्वर रचित अभिनय दर्पण पर आधारित थी। कलाकारों की अगली पेशकश आरभि पल्लवी थी। यह रचना ‘अई गिरि नंदिनी नंदिता मेदिनी’ पर आधारित थी। इस समारोह में संगत कलाकारों में शामिल थीं, मंजीरे पर नृत्यांगना अल्पना नायक, प्रशांत बेहरा, प्रफुल्ल मंगराज, धीरज पांडया और लावण्य अंबडे।

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