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कॉरपोरेट छूट : कितनी कारगर औषधि

इस कर व्यवस्था में सरकार लोगों को कई तरह के फायदे पहुंचने की उम्मीद जता रही है। हालांकि, उम्मीदों को नियमों का जामा नहीं पहनाया गया है। यह पूरी तरह से कंपनियों के विवेक पर छोड़ दिया गया है कि छूट का लाभ वे कहां पहुंचाएं।

Author नई दिल्ली | September 24, 2019 4:16 AM
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में कई सूत्री राहत पैकेज का ऐलान किया। इसमें मुख्य था कॉरपोरेट कर में छूट। सरकार का कहना है कि इससे उपभोक्ता बाजार में मांग बढ़ेगी। उद्योगों की स्थिति दुरुस्त होगी। अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। विनिर्माण क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने एवं मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए आयकर अधिनियम में नए प्रावधान किए गए हैं।

घरेलू कंपनियों पर लगने वाला कॉरपोरेट कर घटा दिया गया है। पहले यह कर 30 फीसद था, जिसे घटाकर 22 फीसद कर दिया गया है। सरचार्ज और सेस लगाकर पहले कर 34.94 फीसद हो जाता था और अब यह कर 25.17 फीसद हो जाएगा। अगर कोई कंपनी नई है, तो उसे 15 फीसद का कर देना पड़ेगा। सेस और सरचार्ज मिलाकर ये कर 17.5 फीसद हो जाएगा, जो पहले 29.12 फीसद था। नई कर प्रणाली एक अप्रैल, 2019 से लागू होगी। ऐलान सितंबर में हुए हैं, तो जिन कंपनियों ने पुरानी दर पर एडवांस कर का भुगतान किया है, उन्हें पैसे वापस मिल जाएंगे। कॉरपोरेट कर में छूट से सरकार को हर साल कम से कम 1.45 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

इस कर व्यवस्था में सरकार लोगों को कई तरह के फायदे पहुंचने की उम्मीद जता रही है। हालांकि, उम्मीदों को नियमों का जामा नहीं पहनाया गया है। यह पूरी तरह से कंपनियों के विवेक पर छोड़ दिया गया है कि छूट का लाभ वे कहां पहुंचाएं। सरकार यह मानकर चल रही है कि इस व्यवस्था से नौकरियां जाने का खतरा कम होगा। कंपनियों के पास पैसे बचेंगे, तो वो अपने कर्मचारियों पर खर्च कर सकेंगी। अगर नौकरियां बनी रहेंगी, तो लोग खरीदारी करेंगे। इससे बाजार में मांग बढ़ेगी। नौकरियां बनी रहेंगी तो लोग घर भी खरीद पाएंगे।

कंपनियों पर लगा कर घटने से उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनियां बैंकों से लिए गए कर्ज को वापस कर देंगी। अगर बैंकों के पास कर्ज का पैसा वापस आ जाएगा, तो वे और नए कर्ज बांट सकेंगी। इससे रोजगार बढ़ेगा। अगर कॉरपोरेट कर घटने से जब कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा, तो वे अपने उत्पाद की कीमत घटा सकेंगी। उम्मीद है कि सामान सस्ते होंगे। बड़े स्टार्टअप शुरू होने की उम्मीद जगी है। जब नई कंपनियां और स्टार्टअप शुरू होंगे, तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार को उम्मीद है कि कई नई विदेशी कंपनियां भारत आएंगी। और ये कंपनियां खास तौर से वो होंगी, जो अमेरिका-चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध की वजह से प्रभावित हो रही हैं।

लोगों को सीधे क्या फायदा पहुंच रहा है, इसे लेकर सरकार रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में की गई कटौती की बात कर रही है। वित्त मंत्री के मुताबिक, रेपो रेट में कटौती से बैंकों ने भी कर्ज दरों में कटौती की है। इससे गृह, वाहन और अन्य खुदरा कर्ज की ईएमआइ सस्ती होगी। गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को जारी किए गए पूवर्भुगतान नोटिसों की बैंक निगरानी करेंगे। वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) को और आसान करने का ऐलान किया गया है। आॅटो सेक्टर को राहत देने के लिए कई उपायों का ऐलान है। सरकारी विभागों द्वारा गाड़ियों की खरीद पर लगी रोक को हटा लिया गया है। साथ ही मांग बढ़ाने के लिए पुरानी गाड़ियों को कबाड़ करने की नीति भी लाई जाएगी।

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपए की पूंजी डालेगी। इस कदम से बैंकों की वित्तीय प्रणाली में पांच लाख करोड़ रुपए तक की तरलता आएगी। इन घोषणाओं के साथ सरकार कह रही है कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) का उल्लंघन अब आपराधिक मामला नहीं होगा। अब सीएसआर नियमों का उल्लंघन दीवानी मामला होगा। लेकिन ऐसा कोई नियामक नहीं सोचा गया है, जो सीएसआर का गलत इस्तेमाल रोके और सुनिश्चित करे कि ऐलान के मुताबिक फायदा लोगों तक पहुंचे।

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