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चौपालः जनसंख्या विस्फोट

आम आदमी को बताना व समझाना होगा कि तरक्की का रास्ता कम बच्चे पैदा करने वाली सड़क से गुजरता है। कम संतान मतलब कम जिम्मेदारी व अच्छा पालन-पोषण है जो अपनी व बच्चों की योग्यता से समाज में मिलता है और समृद्धि के रास्ते खुलते हैं।

Author July 11, 2019 2:01 AM
जब तक देश को कुशल श्रम नहीं मिलेगा, तकनीकी का प्रशिक्षण कारगर तरीके से नहीं मिलेगा, जनसंख्या एक बोझ लगती रहेगी।

इन दिनों दक्षिण एशिया, अफ्रीकी महाद्वीप और विशेष रूप से भारत जनसंख्या विस्फोट से त्रस्त हैं। भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या आज सबसे बड़ी समस्या है। जनसंख्या वृद्धि दर में कमी के बावजूद हम सारी दुनिया में तेजी से आबादी बढ़ा रहे हैं और यही हाल रहा तो चीन को भी पीछे छोड़ देंगे। क्षेत्रफल की दृष्टि से चीन हमसे कई गुना बड़ा है, लेकिन जनसंख्या में हम करीब-करीब उसके बराबर हैं। जनसंख्या विस्फोट नकारात्मक व सकारात्मक दोनों ही कारणों से हुआ है। हमारे देश में शिक्षा का अभाव, परिवार नियोजन के साधनों या उनके सही उपयोग का पता न होना, संतान उत्पत्ति को ईश्वरीय देन मान बैठना, वर्ग संघर्ष में संख्या बल से विजय पाने की चाह और दूरदृष्टि की कमी आदि अनेक कारण हैं, जिन्होंने जनसंख्या को तेजी से बढ़ाया है। इसे रोकने के लिए जन जागरण बहुत जरूरी है।

आम आदमी को बताना व समझाना होगा कि तरक्की का रास्ता कम बच्चे पैदा करने वाली सड़क से गुजरता है। कम संतान मतलब कम जिम्मेदारी व अच्छा पालन-पोषण है जो अपनी व बच्चों की योग्यता से समाज में मिलता है और समृद्धि के रास्ते खुलते हैं। जरूरी यह भी है कि देश की बढ़ती जनसंख्या को कुशल बनाया जाए। जब तक देश को कुशल श्रम नहीं मिलेगा, तकनीकी का प्रशिक्षण कारगर तरीके से नहीं मिलेगा, जनसंख्या एक बोझ लगती रहेगी। हमें चीन और जापान से सीखना होगा कि मानव संसाधन का बेहतर व प्रभावशाली उपयोग कैसे किया जा सकता है। चीन ने तो अपनी बढ़ती आबादी का उपयोग इस कदर किया कि वह आज विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। वास्तव में जनसंख्या को बिना किसी धर्म, राजनीति या क्षेत्र से पक्षपात किए, श्रम कुशल बना कर देश के विकास को सुनिश्चित करना होगा।
’दुर्गेश शर्मा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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