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अटल स्मृति: अटल ने लिखी नए भारत की नई इबारत

आर्थिक सुधारों की दिशा में उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए, जिनसे उनके दौर में, 1998 से 2004 के बीच भारत का सकल घरेलू उत्पाद का आंकड़ा आठ फीसद पर बना रहा। मुद्रास्फीति की दर घट कर चार फीसद पर आ गई और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ अटल बिहारी वाजपेयी 4 जनवरी 2004 को इस्लामाबाद में।

प्रधानमंत्री के नाते अटल बिहारी वाजपेयी की नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक स्वरूप प्रदान किया और वे आज भी प्रासंगिक हैं। नेहरू युग की तर्ज पर उन्होंने रोड, रेल, वायुमार्ग जैसी आधारभूत ढांचा परियोजनाओं पर जोर दिया। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना महत्त्वाकांक्षी फैसले रहे। दूरसंचार क्रांति का दूसरा दौर शुरू किया। उनके दौर की कई अहम नीतियां ऐसी रहीं, जिनसे आज के मजबूत भारत को स्वरूप मिला। अटल बिहारी वाजपेयी ने नौकरशाहों की एक बैठक में कहा था, ‘एक व्यक्ति के सशक्तिकरण का मतलब देश का सशक्तिकरण है। तेज रफ्तार आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन से ही सशक्तिकरण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।’ उनके ये शब्द देश में उनके योगदान को दर्शाते हैं। उन्होंने न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर स्वरूप प्रदान किया, बल्कि कमजोर वर्गों के उत्थान की नीतियां लागू कीं।

आर्थिक सुधारों की दिशा में उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए, जिनसे उनके दौर में, 1998 से 2004 के बीच भारत का सकल घरेलू उत्पाद का आंकड़ा आठ फीसद पर बना रहा। मुद्रास्फीति की दर घट कर चार फीसद पर आ गई और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई। उनके दौर में देश ने छह आपदाएं झेलीं- 2001 का भूकंप, 1999 और 2000 के चक्रवाती तूफान, 2002 से 2003 के बीच सूखा, 2003 का तेल संकट, 1999 का करगिल युद्ध और संसद पर हमला। ये ऐसी घटनाएं थीं, जिनसे अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो सकती थी, लेकिन भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखा। उन्होंने मौद्रिक जवाबदेही अधिनियम लागू किया, जिससे सरकार का मौद्रिक घाटा कम हुआ और सरकारी कंपनियों का संचय बढ़ा। निजीकरण से संबंधित फैसले उनके दौर में खूब लिए गए। उन्होंने देश में निजी कंपनियों को बढ़ावा दिया। उन्होंने विनिवेश मंत्रालय का गठन किया था। भारत एल्युमीनियम कंपनी (बाल्को), हिंदुस्तान जिंक, भारतीय पेट्रोकेमिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) का विनिवेश उनके दौर के चर्चित फैसले रहे। अटल की सरकार ने नई दूरसंचार नीति लागू की, जिसके तहत दूरसंचार कंपनियों को फिक्स लाइसेंस फीस की नीति से मुक्ति मिली। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का गठन किया गया, जो सेवाओं और नीतियों की सर्वोच्च संस्था बनाई गई। उनकी सरकार ने दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय पंचाट और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन सेवा कंपनी वीएसएनएल का गठन किया। उनके दौर की शिक्षा नीति चर्चा में आज भी है। पहली बार भारत में छह से 14 साल के बच्चों के लिए शिक्षा मुफ्त की गई। 2001 में यह योजना लागू की गई और इससे स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में 60 फीसद तक की कमी आ गई।

विदेश नीति में कामयाबी

अटल के दौर में चीन और अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार आया। चीन के साथ कारोबार बढ़ा और सीमा विवाद कम हुए। वर्ष 2000 में उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को भारत आने का न्योता दिया। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ को उन्होंने दो दिन के आगरा सम्मेलन के लिए 14 से 16 जुलाई 2001 को भारत बुलाया, जिसमें पाकिस्तान पोषित आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर खासी प्रगति हुई। ऐतिहासिक दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू की गई। विज्ञान के क्षेत्र में चंद्रयान-एक परियोजना अटल जी की सरकार ले आई। 1998 में एक सप्ताह के भीतर पांच परमाणु परीक्षण किए गए।

 

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के साथ अटल बिहारी वाजपेयी 21 मार्च 2000 को नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस में।

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