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संपादकीयः कार्रवाई के मायने

उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच चरम तनाव का माहौल लगातार बना रहा है। फिर भी, बुधवार की रात भारतीय सेना ने जो कार्रवाई की, वह थोड़ी अप्रत्याशित जरूर है।

Author September 30, 2016 4:01 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच चरम तनाव का माहौल लगातार बना रहा है। फिर भी, बुधवार की रात भारतीय सेना ने जो कार्रवाई की, वह थोड़ी अप्रत्याशित जरूर है। इस मायने में कि आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान को घेरने के लिए भारत एक के बाद एक कूटनीतिक उपायों में ही लगा हुआ था। इस सिलसिले में सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार के लिए प्रधानमंत्री ने एक अंतर-मंत्रालयी कार्यबल का गठन किया। इसके एक रोज बाद, भारत ने सार्क के आगामी यानी इस्लामाबाद सम्मेलन के बहिष्कार का फैसला किया, यह कहते हुए कि आतंक-मुक्त माहौल में ही आपसी सहयोग बढ़ाने वाली बातचीतका कोई महत्त्व हो सकता है। भारत के इस रुख की देखादेखी भूटान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने सम्मेलन में शिरकत को लेकर अपनी असमर्थता जताई और नेपाल ने सम्मेलन का स्थान बदलने की मांग उठाई है। फिर, पाकिस्तान के अलग-थलग पड़ने के संकेतों के बीच सरकार ने सेना को नियंत्रण रेखा लांघ कर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की इजाजत क्यों दी? शायद इसलिए कि उड़ी हमले के बाद भी सीमापार से घुसपैठ की घटनाएं जारी थीं। सेना ने जो किया वह एक सीमित और लक्षित कार्रवाई थी। सैन्य कार्रवाई महानिदेशक के मुताबिक भारतीय सेना के कमांडो ने नियंत्रण रेखा के तीन किलोमीटर भीतर तक घुस कर तीन आतंकी शिविर नष्ट कर दिए और अड़तीस आतंकियों को मार गिराया, जो घुसपैठ के लिए तैयार और कश्मीर घाटी में आतंकी वारदात करने की फिराक में थे। लेकिन पाकिस्तान ने इस दावे को निराधार ठहराया है; उसका कहना है कि भारत की तरफ से कोई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ नहीं हुई, अलबत्ता उसके दो सैनिक गोलीबारी में मारे गए हैं, मगर सरहद पर गोलीबारी कोई अपूर्व घटना नहीं है। जो हो, भारत की इस कार्रवाई के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव तथा गर्जन-तर्जन बढ़ना तय है।

पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की संभावना और युद्ध के अंदेशों के बीच सेना को हाई अलर्ट कर दिया गया है और सरहदी इलाकों के गांव खाली करा लिए गए हैं। गुरुवार को हुई सर्वदलीय बैठक में अमूमन सभी दलों ने इस कार्रवाई के लिए सेना को बधाई दी। लेकिन दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता का भाव है, क्योंकि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियारों से लैस हैं। अमेरिका ने साफ शब्दों में संयम बरतने की सलाह दी है। भारत जानता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, युद्ध छेड़ने का उसका इरादा भी नहीं है। उसने साफ कर दिया है कि ‘आॅपरेशन’ फिलहाल खत्म हो गया है। दरअसल, उसने वैसी ही कार्रवाई की है, जैसी पिछले साल म्यांमा की सीमा में की थी, जब भारतीय सेना ने अड़तीस नगा विद्रोहियों को मार गिराया था।

कार्रवाई का मकसद पाकिस्तान को अपनी फितरत से बाज आने के लिए चेताने के साथ-साथ देश के लोगों को यह भरोसा दिलाना भी रहा होगा कि आतंकवाद से निपटने के लिए सरकार कुछ भी करने को तैयार है। जनवरी 2004 में ही पाकिस्तान ने भरोसा दिलाया था कि वह आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा। पर इस घोषणा के बावजूद सीमापार से आतंकवाद नहीं थमा; भारत आतंकवाद के जख्म झेलता रहा। भारत की ओर से तमाम सबूत सौंपे जाने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकी गुटों के खिलाफ कोई विश्वसनीय कार्रवाई नहीं की। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता वाजिब है, पर उसे यह भी सोचना होगा कि पाकिस्तान की जमीन से चलने वाली आतंकी गतिविधियों को बंद करने का भरोसा कौन दिलाएगा?

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