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मैं फिल्में बिजनेस के लिए नहीं बनाता : हासन

साउथ के सुपरस्टार और हिंदी में अपनी खास जगह बना चुके अभिनेता, राजनीतिज्ञ निर्माता और निर्देशक कमल हासन अपनी फिल्म विश्वरूपम 2 के जरिए अब एक बार फिर बॉलीवुड मे धमाका मचाने जा रहे हैं। बिग बजट फिल्म विश्वरूपम हमेशा से चर्चा में रही है। पहली विश्वरूपम भी दर्शकों के द्वारा सराही गई थी। अब एक बार फिर विश्वरूपम 2 रिलीज के लिए तैयार है। हाल ही में कमल हासन ने खासतौर पर अपनी फिल्म विश्वरूपम 2 को लेकर बातचीत की। साथ ही उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी कई व्यक्तिगत और प्रोफेशनल बातों से भी अवगत कराया। पेश है लीजेंड अभिनेता कमल हासन से हुई बातचीत के खास अंश...

Author August 10, 2018 2:52 AM
साउथ के सुपरस्टार और हिंदी में अपनी खास जगह बना चुके अभिनेता, राजनीतिज्ञ निर्माता और निर्देशक कमल हासन।

आरती सक्सेना

सवाल : आपकी हाल ही में रिलीज होने वाली फिल्म विश्वरूपम 2 काफी चर्चा में है। इसे लेकर क्या कहेंगे?

’इस फिल्म के निर्माण में बहुत मेहनत की है। पहली विश्वरूपम के बाद मैं दूसरी विश्वरूपम जल्द ही बनाना चाहता था लेकिन पैसों के इंतजाम और कहानी मेकिंग के कारण देर हो गई। पहली विश्वरूपम 2013 में आई थी, अब ये 2018 में रिलीज हो रही है। दर्शक इस फिल्म को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं। ये देख कर खुशी हो रही है।
सवाल : आपने इस फिल्म में काफी सारे खतरनाक स्टंट किए हैं और इसके कई शॉट अफगानिस्तान में फिल्माते हुए दिखाए गए हैं। क्या आपने इस फिल्म के फाइट शॉट अफगानिस्तान में शूट किए हैं?
’नहीं हमने उनसे अफगानिस्तान में फिल्म शूट करने की परमिशन मांगी थी लेकिन उन्होंने कहा कि हमने अगर वहां जाकर शूट किया तो वो हमें शूट कर देंगे। लिहाजा आर्ट डायरेक्टर इलियाराजा ने चेन्नई में ही एक अफगानिस्तान की लोकेशन जैसा गांव और माहौल तैयार किया है, जहां पर पूरी शूटिंग हुई है।

सवाल : आपकी पहली विश्वरूपम विवादों में घिरी रही। ऐसे में आपने विश्वरूपम 2 बनाने के बारे में कैसे सोचा?
’क्योंकि वो विवाद जानबूझ कर पैदा किए गए थे। जैसे कि अमर अकबद एंथोनी में मुसलमानों का अपमान किया गया। ‘शोर’ फिल्म के जरिए बधिरों का अपमान हुआ। रोटी, कपड़ा और मकान के जरिए सरदार समुदाय का अपमान हुआ। कहने का मतलब ये है कि अगर हम शराब पर कोई फिल्म बना रहे हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि हम शराब की पब्लिसिटी कर रहे हैं। सच बात तो ये है कि हमने कोई ऐसी फिल्म नहीं बनाई जिसकी वजह से विवाद हो। मैंने फिल्म में ऐसा कुछ नहीं डाला जिससे मुसलिम समुदाय को ठेस पहुचें।
सवाल : आपकी ज्यादातर फिल्मों में देशभक्ति का जज्बा देखने को मिलता है। असल जिंदगी में आप अपने आपको कितना देशभक्त मानते हैं?
’मेरी देशभक्ति सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। मैं अपने भारत देश को इंटरनेशनल लेवल पर प्रसिद्ध होते देखना चाहता हूं। मुझे बहुत ज्यादा खुशी होती है जब हमारे देश का नाम दुनिया के दूसरे देशों में गर्व से लिया जाता है। जैसे कि गांंधी जी सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरे संसार में प्रसिद्ध थे। वैसे ही मेरी देशभक्ति अपने देश को हर देश में देखने का सपना देखती है।

सवाल : आपकी फिल्में अप्पू राजा, तमिल में विरासत, नायकन आदि सभी फिल्मों में कोई ना कोई मैसेज जरूर होता है। क्या इसके पीछे कोई खास वजह है?
’क्योंकि मैं फिल्में सिर्फ धंधा या बिजनेस करने के लिए नहीं बनाता। मेरा मकसद फिल्मों के जरिए मनोरंजन करना और मैसेज देना भी होता है। क्योंकि ये हमारी जिम्मेदारी है। हमारी इंडस्ट्री के दिग्गज लोग जैसे कि आसिफ, उदय शंकर, सत्यजीत रे, बड़े गुलाम अली खां आदि महान लोगों ने समाज के वास्तविक पहलुओं से हमें अवगत कराया है। मैं भी इन्हीं में से एक हूं। अच्छे दिन आ रहे हैं। ये सिर्फ पॉलिटिशियन ही नहीं कह सकते। बल्किे ये हम कलाकार भी कह सकते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी फिल्मों के जरिए अच्छे मैसेज दें। साथ ही मनोरंजन भी करें।

सवाल : आपकी लव स्टोरी पर आधारित फिल्मों जैसे एक दूजे के लिए और सदमा को आज भी दर्शक याद करते हैं। एक दूजे के लिए का असर तो प्रेमियों पर ऐसा हुआ था कि कई प्रेमियों ने आत्महत्या करना शुरू कर दिया था। अपनी इन यादगार फिल्मों के बारे में आप क्या कहेंगे?
’हां… जब के बालचंदर को और मुझे पता चला कि एक दूजे को देखकर लोगों ने आत्महत्या करना शुरू कर दिया है। हमारी फिल्म के जरिए दर्शकों तक गलत मैसेज गया है तो हमें बहुत धक्का लगा था। लिहाजा हमने तमिल में इसके विपरीत स्टोरी की और एक फिल्म बनाई थी। हम फिलासफर नहीं हैं लेकिन हमारा काम जिम्मेदारी का है। हम दर्शकों तक गलत संदेश नहीं पहुंचा सकते। दर्शक एक्टर से बहुत कुछ सीखते हैं। जैसे कि एक भांड जो संदेश दर्शकों तक पहुंचा सकता है वो एक राजा भी नहीं पहुंचा सकता। जहां तक सदमा फिल्म का सवाल है तो ये फिल्म मेरे लिए यादगार फिल्म है। इसकी वजह से कोई विवाद नहीं हुआ था। इन दोनों ही फिल्मों ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सफलता हासिल की थी।

सवाल : आज आप निर्माता, निर्देशक और अभिनेता हैं। आज ऐसी इमोशनल फिल्में नहीं बन पा रही हैं। क्या आप इस तरह की लव स्टोरी फिर से लाना चाहेंगे?
’मुझे लव स्टोरी तो बनानी है लेकिन लव पर नहीं बल्कि राजनीति के साथ लव पर। जिसका नाम है इंडिया। मैं इस पर फिल्म बना रहा हूं। इस पर काम चल रहा है। इंडिया के जरिए मैं साबित करना चाहता हूं कि सिर्फ इसांनी प्रेम पर ही नहीं बल्कि देशप्रेम पर भी फिल्म बन सकती।

सवाल : आपकी सफलता का मंत्र क्या है?
’जब मैं 30 साल का था तब मैंने फिल्म नायकन में करैक्टर रोल किया था। 30 साल की उम्र में मैंने पिता का रोल किया था। मैंने कभी स्टार या सुपरस्टार बनने की कोशिश नहीं की। मैंने हमेशा दर्शकों की इज्जत की। अपने किरदार के साथ हमेशा न्याय करने की कोशिश की। यहां तक कि मुझे अपनी खुद की फिल्में बतौर दर्शकदेखने में मजा आता है। ताकि मैं जान सकूं दर्शकों को मुझसे क्या चाहिए।

सवाल : आप एक मेकर हैं एक अभिनेता हैं लेकिन आज आप राजनीतिज्ञ भी हैं। कौन सा क्षेत्र ज्यादा मुश्किल है?
’राजनीति करना आसान नहीं है। राजनीति में जाना अपना किरदार सही तरीक से निभाना आसान नहीं होता। क्योंकि राजनीति में जाकर बड़े-बड़े सूरमा लोग फेल हो गए। इतना ही नहीं उन्हें काफी कुछ झेलना भी पड़ा।

सवाल : आपको अभिनय ज्यादा पसंद है या डायरेक्शन?
’मुझे शुरू से ही डायरेक्टर बनना था। लेकिन मेरे गुरु के बालचंदर जी ने मुझे कहा कि मेरा अभिनय में ज्यादा अच्छा स्कोप है। डायरेक्टर बनने के लिए अभी मेरी उम्र छोटी है। मेरे अंदर अभिनय का टैलेंट है तो मुझे उसको पेश करना चाहिए। पहले अभिनय के जरिए पैसा कमाना चाहिए फिर डायरेक्शन करना चाहिए। आज मैं उन्हीं की वजह से आप लोगों के सामने बैठा हूं और इंटरव्यू दे रहा हूं। आज मैं डायरेक्शन भी कर रहा हूं। लेकिन मुझे लगता है कि मुझे आज भी डायरेक्शन में बहुत कुछ सीखना बाकी है। जैसे किरदारों और टीम को अपने पक्ष में रखना। मेरे गुरु ने मुझे बताया था कि एक एक्टर बहुत सेंसटिव होता है। वो तारीफ और बुराई दोनों ही बहुत अच्छे से याद रखता है। हमें दोनों चीजें अपने कलाकारों के साथ मेंटेन रखनी होती है। ये सब चीजें मुझे सीखना रह गया है।

सवाल : आपके अलावा रजनीकांत भी राजनीति में हैं, क्या आप उनको अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं?
’नहीं क्योंकि हम दोनों ही पब्लिक सर्वेंट हैं और हम दोनों ही देश के लिए अच्छा काम करने की कोशिश कर रहे हैं लिहाजा हम प्रतिद्वंद्वी नहीं सहपाठी हैं।
सवाल : आपकी दोनों बेटियां फिल्मों में सक्रिय हैं। क्या आप उनके मेंटोर हैं? क्या आप उनको गाइड करते हैं?
’नहीं..मैं ऐसा नहीं कर पाता समय की कमी के चलते। मेरी इच्छा है उनको भी मेरी तरह अच्छा मेंटोर मिले जो उनको सही सलाह दे। हर एक की जिंदगी में एक सच्चा सलाहकार बहुत जरूरी है। जैसे कि मेरी जिंदगी में मेरे गुरु के बालचंदर साहब थे। मैं चाहता हूं श्रुति के जीवन में भी एक सच्चा मार्गदर्शक आए। जो उनको सही फिल्मों का चुनाव सिखा सके। मैंने जब एक दूजे के लिए की थी तब तक मैं 100 फिल्में कर चुका था। ‘एक दूजे के लिए’ मेरी 101वीं फिल्म थी। ऐसे ही मैं चाहता हूं। मेरी दोनों बेटियां भी फिल्मों में अपनी जगह बनाएं। वैसे मैं और श्रुति एक फिल्म साथ कर रहे हैं। जिसका नाम शाबाश कुंडू है। शाबाश कुंडू हिंदी में बन रही है और सुभाष नायडू तमिल में बन रही है।

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