हरियाणा में भी बच्चियों संग यौन शोषण! यूं हुआ खुलासा - 38 children rescue in nuh children shelter home - Jansatta
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हरियाणा में भी लड़के-लड़कियों संग यौन शोषण! यूं हुआ खुलासा

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जब छापेमारी की तो ऐसी कई अन्य चौंकाने वाली जानकारियों का खुलासा हुआ है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर और यूपी के देवरिया के बाद अब हरियाणा में भी कथित तौर पर लड़के-लड़कियों संग यौन शोषण का मामला सामना आया है। यहां नूंह जिले के सेसौला गांव में एक एनजीओ द्वारा संचालित बाल गृह में भारी अनियमितताएं हुई हैं। बाल गृह में 38 लड़के-लड़कियों को बगैर रिकॉर्ड के रखा गया है। ये बच्चे भी किसी धर्म विशेष के बताए जाते हैं। इन्हें अपनी परिवार से मिलने की अनुमति भी नहीं है। इन बच्चों से यह भी लिखाया गया कि अगर दुर्घटना में किसी बच्चे को कुछ हो जाए तो उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जब छापेमारी की तो ऐसी कई अन्य चौंकाने वाली जानकारियों का खुलासा हुआ है। आशंका है कि इन बच्चों का यौन शोषण किया जाता है। मामले में आयोग ने सरकार को रिपोर्ट सौंपते हुए एनजीओ के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की मांग की है। जानकारी के मुताबिक 2016 से चल रहा ये बाल गृह ऐसी जगह है, जहां करीब तीन किलोमीटर तक कच्चा रास्ता है। यहां बच्चों के रखने के नियम को भी पूरी तरह दरकिनार किया गया है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ज्योति बैंदा ने बताया कि उन्होंने नूंह में ऑर्फन इन नीड एनजीओ द्वारा संचालित बाल गृह का दौरा किया। दस्तावेजों की जांच की तो कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए। कहीं भी इसका जिक्र ही नहीं किया गया कि इन बच्चों को कहां से लाया गया है। किसी फाइव स्टार होटल की तर्ज पर बने इस बाल गृह में एक तहखाना भी है, जिसमें किसी कंट्रोल रूम की तरह कंप्यूटर रखे हुए हैं। एक ऑफिस के जरिए तहखाने में जाने का रास्ता है, जिसे ढक्कन से बंद करके रखा जाता है।

बैंदा के मुताबिक जिन कागजों को जब्त किया गया वो भी संबंधित एक्ट के मुताबिक नहीं है। छापेमारी के दौरान एनजीओ के पदाधिकारियों से जब पूछा गया कि वो बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया में क्यों नहीं ला पाए तो वो इसका भी जवाब नहीं दे पाए। एनजीओ में रखा गया स्टाफ भी तय मानकों पर फिट नहीं बैठता।

बता दें कि नियमों के मुताबिक जब कोई अनाथ बच्चा मिलता है तो उसे जिले के बाल गृह में भेजा जाता है, लेकिन यहां बच्चे किसी धर्म विशेष के पलवल से यहां भेजे गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बाल गृह का चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर्स द्वारा दौरा किया जाता रहा है। मगर उनकी जांच के दौरान कभी कोई खामी सामने नहीं आई।

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