ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका के साझा हमले के बाद दुनिया भर में इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि अगर युद्ध और लंबा खिंचा तो इसके असर से बहुत सारे देशों में बहुस्तरीय संकट पैदा होंगे। युद्ध शुरू होने के करीब एक महीने के बाद यह साफ देखा जा सकता है कि कई देशों में तेल और गैस का व्यापक संकट खड़ा हो गया है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। युद्ध में शामिल देशों के शीर्ष नेतृत्व से यह उम्मीद की जाती है कि वे संयम और धीरज के साथ घटनाओं और परिस्थितियों पर परिपक्व टिप्पणी करें, ताकि तनाव को कम करने में मदद मिले और युद्ध को खत्म करने का कोई रास्ता निकले।
मगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शायद इन बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत महसूस नहीं होती। यह बेवजह नहीं है कि आए दिन वे कोई न कोई ऐसी टिप्पणी कर देते हैं, जिससे स्थितियां ज्यादा जटिल हो जाती हैं। गौरतलब है कि गुरुवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर बड़ा हमला करने जा रहा है और हम उन्हें पाषाण युग में पहुंचा देंगे।
यह कोई पहला मौका नहीं है, जब ट्रंप ने कोई ऐसा बयान दिया है, जिससे युद्ध खत्म होने की कोई राह निकलने के बजाय स्थिति और बिगड़ने की ही भूमिका बनी। इससे पहले भी वे अपने गैरजरूरी बयानों के जरिए तनाव और टकराव को ज्यादा तीखा बनाने की कोशिश कर चुके हैं। सवाल है कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति होने के नाते कही गई उनकी बातों से केवल डर और समर्पण ही पैदा होगा। ऐसे बयानों का हासिल आखिर क्या होता है, सिवाय इसके कि तनाव में और ज्यादा बढ़ोतरी हो जाती है, दोतरफा हमले और तेज हो जाते हैं। अपने ऊपर हमले के बाद ईरान ने जिस तरह लगातार कड़ी प्रतिक्रिया दी है, मिसाइलों के जरिए अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं, उससे साफ है कि वह फिलहाल सामना करने के रुख पर कायम है। मगर इस सबका नतीजा यह सामने आ रहा है कि दुनिया के बहुत सारे देश अब धीरे-धीरे कई तरह की संकटों से घिर रहे हैं।
ईरान ने जब से होर्मुज जलमार्ग को बाधित किया है, उसके बाद भारत सहित कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति व्यापक पैमाने पर बाधित हुई है। ऊर्जा की कमी से उपजी मुश्किल अब जिस स्तर पर गहराती जा रही है, उससे समूची दुनिया किसी न किसी रूप से प्रभावित होने वाली है। अभी से दबे स्वर में ऊर्जा संकट की वजह से सब ठप पड़ने की आशंका जताई जाने लगी है। जिन देशों के पास अपने संसाधन हैं, वे शायद संकट का सामना कुछ समय तक कर लेंगे, लेकिन जहां कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए अन्य देशों पर निर्भरता है, वहां आने वाले दिनों में कैसी परिस्थिति पैदा हो सकती है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
इस संकट की व्यापकता की अनदेखी करते हुए ट्रंप जिस तरह जंग की आग को और भड़काने वाले बयान देते हैं, उससे यही लगता है कि शायद समस्या का हल निकालने और शांति कायम करने में उनकी कोई रुचि नहीं है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि युद्ध भले ही अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हो रहा हो, लेकिन उसकी मार कई देशों को झेलनी पड़ रही है। जबकि यह भी तय है कि समस्या का हल आखिर संवाद के जरिए ही निकलना है।
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अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जनरल रैंडी जॉर्ज को अपना पद छोड़ने के लिए कह दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच यह बड़ा फैसला लिया गया है। पेंटागन ने अभी तक इस फैसले को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी है। एपी से बात करते हुए पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि जॉर्ज 41वें सेना प्रमुख के रूप में रिटायर होने जा रहे हैं। पीट हेगसेथ ने 2025 में रक्षा मंत्री का पद संभाला था, तब से कई बड़े सैन्य अधिकारियों को हटा दिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
