इसमें दोराय नहीं कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास ने मानव जीवन की राह को आसान बना दिया है। मगर तकनीक तभी सुविधाजनक होती है, जब उसे कौशल, संवेदनशीलता और सतर्कता के दायरे में रखा जाए। जरा-सी लापरवाही पर यह सुविधा कब जोखिम में बदल जाए, इसका आभास भी नहीं हो पाता है। बीते बुधवार की रात को दिल्ली के हौजखास इलाके में ऐसी ही एक घटना सामने आई, जिसमें एयर कंडीशनर यानी एसी में विस्फोट से लगी आग की वजह से सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी धनेंद्र कुमार की जान चली गई।

वह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे। एसी में विस्फोट किन कारणों से हुआ, यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन सवाल है कि जिन उपकरणों को घरों में सुविधा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, उनमें तकनीकी खराबी से पैदा होने वाले खतरे से सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या ऐसी घटनाओं में जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत नहीं है?

गौरतलब है कि हर साल गर्मी में एयर कंडीशनर की वजह से हादसों का सिलसिला शुरू हो जाता है। पिछले एक माह में देश भर में एसी में विस्फोट या आग लगने से मौत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। निस्संदेह इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल करते समय लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर एसी के मामले में ज्यादा सतर्कता की जरूरत होती है, क्योंकि इससे और भी कई तरह के जोखिम होते हैं।

मसलन, बहुत ठंडे कमरे से अचानक तेज गर्मी में जाने से शरीर का तापमान बदल जाता है, जिससे मस्तिष्काघात का खतरा बढ़ जाता है। एयर कंडीशनर कमरे की नमी को सोख लेता है, जिससे सांस और त्वचा संबंधी विकार पैदा हो सकते हैं। यही नहीं, इस उपकरण से गैस का रिसाव होने पर बंद कमरे में दम घुटने जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। यानी किसी भी तकनीकी संसाधन के उपयोग के साथ ही उनके संचालन के लिए एक मुकम्मल प्रशिक्षण भी बेहद जरूरी है।

जरूरत इस बात की भी है कि ऐसे उपकरणों में तकनीकी खराबी की वजह से कोई हादसा न हो, इसके लिए सरकार की ओर से स्पष्ट नीति एवं नियम बनाए जाएं, ताकि इनके निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

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उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी का सीधा असर अब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) की सेवाओं और उसकी कमाई पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली से सटे हाइटेक शहर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रोडवेज के पास एक भी एसी बस न होने का खामियाजा विभाग को भुगतना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच लोग रोडवेज की सामान्य बसों में सफर करने से कतरा रहे हैं और विकल्प के तौर पर निजी एसी बसों को चुन रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक