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संपादकीयः फिलहाल एहतियात

अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए वाट्सऐप ने संदेशों की संख्या सीमित करने का जो कदम उठाया है, उम्मीद की जानी चाहिए कि वह कारगर साबित होगा और अफवाहों पर लगाम लगेगी।

Author July 23, 2018 3:26 AM
WhatsApp: इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए वाट्सऐप ने संदेशों की संख्या सीमित करने का जो कदम उठाया है, उम्मीद की जानी चाहिए कि वह कारगर साबित होगा और अफवाहों पर लगाम लगेगी। ऐसा सख्त कदम तात्कालिक जरूरत है। पिछले कुछ महीनों में देश भर में भीड़ द्वारा हत्याओं के जितने मामले सामने आए, उन सबके पीछे पहला और बड़ा कारण अफवाहों का फैलना था। ज्यादातर अफवाहें बच्चा चोर को लेकर उड़ीं। ऐसी अफवाहें वाट्सऐप के जरिए फैलाई जातीं, लोग जमा होते और कोई निर्दोष इनकी हिंसा का शिकार हो जाता। इसके अलावा और भी कई ऐसी दहला देने वाली घटनाएं हुर्इं, जिनका कारण वाट्सऐप के जरिए फैली अफवाहें बनीं। संदेशों और बातचीत के इस ऐप का ऐसा भयानक दुरुपयोग चिंता का विषय बना हुआ है।

वाट्सऐप ने फिलहाल जो रास्ता निकाला है, उससे अफवाहों को फैलने से कितना रोका जा सकेगा, यह देखने की बात है। लेकिन फिलहाल इतनी उम्मीद तो की जानी चाहिए कि भड़काऊ और झूठे संदेश जिस तेजी से फैल रहे थे, उसमें कमी जरूर आएगी। हालांकि हकीकत यह है कि इसे पूरी तरह से बंद कर पाना संभव नहीं है। लेकिन फिर भी वाट्सऐप में अभी कुछ खास इंतजाम किए गए हैं। सबसे पहले तो किसी दूसरे व्यक्ति या समूह से आए संदेशों को दूसरों को भेजने की संख्या पांच तक सीमित कर दी गई है। कंपनी ऐसे तरीकों पर विचार कर रही है, जिनसे वीडियो और फोटो वाट्सऐप के जरिए न भेजे जा सकें, इनके लिए अलग से बंदोबस्त होगा। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारतीय लोग ही हैं जो आए हुए संदेशों, वीडियो और फोटो को दूसरों की तरफ बढ़ा देते हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए ही सरकार ने वाट्सऐप को चेताया था कि वह इसका रास्ता निकाले। लेकिन सवाल है कि क्या वाट्सऐप ऐसे समूहों की पहचान कर सकता है, जो अफवाहें और झूठ फैलाने के काम को अंजाम दे रहे हैं? क्या वाट्सऐप ऐसा तरीका निकाल सकता है, जिसमें फर्जी और झूठे संदेशों, वीडियो और फोटो को शुरू में ही पहचान कर रोक दिया जाए?

लेकिन समस्या की जड़ कहीं और भी है। स्मार्टफोन और डाटा क्रांति ने सबके हाथ में मोबाइल और इंटरनेट सुलभ करा दिया है। हालत यह है कि लोग ज्यादातर वक्त वाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया की लत के शिकार हो गए हैं। मुश्किल यह भी है कि जितने और जैसे संदेश, वीडियो और फोटो वाट्सऐप और दूसरे जरियों से हमें मिलते हैं, उनकी सत्यता की पुष्टि कैसे हो। किसी भी संदेश को पढ़ने या वीडियो-फोटो देखने के बाद ज्यादातर लोग विवेक का जरा भी इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं करते। सोचते तक नहीं कि यह सच भी होगा या नहीं और यहीं से भीड़ जमा होनी शुरू हो जाती है। यह सरकार और समाज के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि फर्जी खबरों की असलियत जानने के लिए वाट्सऐप ने वैरिफिकेडो मॉडल लाने की बात कही है। ऐसा मॉडल मैक्सिको और ब्राजील में चुनाव से पहले इस्तेमाल किया गया था। भारत में भी आगामी चुनावों में फर्जी खबरों, अफवाहों के खतरों को देखते हुए इसके प्रयोग की बात उठी है। जरूरी है कि सोशल मीडिया के ऐसे दुरुपयोग पर रोक लगे। इसके लिए लोगों को जागरूक और विवेकशील बनाने की जिम्मेदारी भी सरकार को निभानी होगी।

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