पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से गहरा रहे वैश्विक संकट के बीच क्वाड देशों की महत्त्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। खास बात यह है कि भारत की मेजबानी में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यह बैठक होगी। खबरों के मुताबिक, इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श के अलावा विश्व भर में पैदा हुए ऊर्जा संकट से निपटने के उपायों पर भी मंथन किया जाएगा।
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे को लेकर भी यह उम्मीद जताई जा रही थी कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली का कोई रास्ता निकलेगा, मगर दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की वार्ता के नतीजे में ऐसा कुछ नजर नहीं आया।
क्वाड में शामिल देशों में से भारत पर इस वैश्विक संकट का मौजूदा परिस्थितियों में सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। चूंकि वर्तमान में भारत क्वाड की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए यह उम्मीद है कि इस बैठक में ऊर्जा संकट का मसला प्रमुखता से रखा जाएगा। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि क्वाड में अमेरिका भी शामिल है और ईरान के साथ उसके और इजरायल के संघर्ष से ही संकट की यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक 26 मई को होगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को भारत पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं, विशेषकर रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर विचार-विमर्श किया। साथ ही पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की गई।
अब सबकी नजरें क्वाड की बैठक पर टिकी हैं कि उसमें किन मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच फिलहाल युद्धविराम जारी है, लेकिन होर्मुज जलमार्ग को खुलवाने के लिए अमेरिका के प्रयास अभी तक नाकाम रहे हैं। इसके बजाय होर्मुज के आसपास अमेरिका की नाकेबंदी से स्थिति और जटिल हो गई है।
दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं, जिस कारण शांति वार्ता के मार्ग पर अनिश्चितता की बर्फ जम गई है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी का संकट लगातार गहराता जा रहा है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष से उपजे वैश्विक संकट का भारत पर कितना असर हुआ है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दस दिनों से भी कम समय में शनिवार को तीसरी बार बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर, जबकि डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। सीएनजी की कीमत में भी एक रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।
जाहिर है कि ईंधन के दामों में इजाफे से आने वाले दिनों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं भी महंगी होंगी। कुल मिलाकर इस संकट की सबसे ज्यादा मार आमजन पर ही पड़ेगी। इसलिए जरूरी है कि क्वाड की बैठक में इस मसले को प्रमुखता से रखा जाए और संकट का स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश की जाए।
इस संगठन में भारत, अमेरिका के अलावा आस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक प्रमुख समूह के रूप में उभरा है। क्वाड की इस बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि इसमें समुद्री सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और संपर्क सुविधा जैसे मसलों पर गहन मंथन किए जाने की संभावना है।
