स्वस्थ रहने के लिए फल और हरी सब्जियों का सेवन जरूरी माना जाता है। चिकित्सक भी लोगों को अपने रोजमर्रा के आहार में इन्हें शामिल करने की सलाह देते हैं। मगर इनकी पैदावार में जहरीले रसायनों का बढ़ता इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय बन गया है। फलों को समय से पहले पकाने, चमकदार बनाने और हरी सब्जियों का आकार जल्दी बढ़ाने के लिए विभिन्न तरह के रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो मनुष्य के लिए घातक हो सकते हैं।
ऐसा ही एक मामला हाल में मुंबई के पायधोनी इलाके में सामने आया, जहां तरबूज खाने के बाद एक परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों के आंतरिक अंगों और तरबूज के नमूनों में चूहे मारने की दवा के अंश पाए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तरबूज के अंदर यह दवा कैसे आई। इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं तरबूज को पकाने के लिए तो इस दवा का इस्तेमाल नहीं किया गया।
इस मामले में पुलिस की जांच के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर परिवार के चार सदस्यों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? फसलों को कीटों और अन्य जंतुओं से बचाने के लिए कीटनाशक तैयार किए गए हैं, लेकिन इनका अंधाधुंध और अवैज्ञानिक इस्तेमाल अब मानव के स्वास्थ्य तथा जीवन पर भारी पड़ रहा है।
ऐसी खबरें भी आती रहती हैं कि कच्चे फल-सब्जियों को पकाने और उनका आकार जल्दी बढ़ाने के लिए इंजेक्शन से उनके भीतर रसायन डाला जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से कीटनाशकों की खरीद-बिक्री और इनके इस्तेमाल को लेकर नियम-शर्तें लागू की गई हैं, लेकिन इन पर कड़ाई से अमल सुनिश्चित करने में विभिन्न स्तरों पर लापरवाही साफ नजर आती है।
ऐसे में इसकी नितांत जरूरत है कि संबंधित महकमे की ओर से नियमित तौर पर फल-सब्जियों की जांच की जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल से सेहत पर दुष्प्रभाव को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाई जाए, ताकि लोगों के स्वास्थ्य एवं जीवन के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न हो।
