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संपादकीय: हताशा की रणनीति

पाकिस्तान से सड़क के रास्ते तिजारत रुक जाने, कश्मीर में अलगाववादी संगठनों, स्थानीय राजनीति दलों पर अंकुश लगने, सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ने, दहशतगर्दों को मिलने वाली मदद पर रोक लगने से पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों की घाटी में अशांति फैलाने की रणनीति कामयाब नहीं हो पा रही।

Pakistan, border, terroristपाकिस्तान सीमा पर चौकसी करते भारतीय जवान।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन जैसे पाकिस्तान की आदत बन चुकी है। यह लगभग रोज की बात हो गई है जब पाकिस्तानी सेना सरहद पर बेवजह गोलीबारी करती है। उसकी ऐसी हरकतों से कभी सीमा पर बसे गांवों के लोग मारे जाते हैं, तो कभी भारतीय सेना के जवान।

सोमवार को राजौरी और नौशेरा में पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार दागे, जिसमें भारतीय सेना के एक हवलदार की जान चली गई। पिछले चार-पांच सालों में बार-बार चेतावनी के बावजूद पाकिस्तान हजारों बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। पिछले लगभग दस महीनों में, जबसे कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर खत्म हुआ है, पाकिस्तानी सेना ने बौखलाहट में सीमा पर ऐसी गतिविधियां तेज कर दी हैं। शायद ही कोई हफ्ता हो, जब वह गोलीबारी न करती हो। इसकी कुछ वजहें साफ हैं।

अक्सर पाकिस्तानी सेना गोलीबारी तब करती है, जब उधर से आतंकियों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराने की कोशिश की जाती है। पर पिछले डेढ़-दो सालों से कश्मीर में सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों की मुस्तैदी और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ सघन अभियान चलाने के बाद आतंकवादी घटनाओं पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। अलगाववादी संगठनों पर अंकुश लगने और स्थानीय लोगों का आतंकवादियों को अपेक्षित सहयोग न मिल पाने की वजह से उनमें हताशा है। स्वाभाविक ही इससे पाकिस्तानी सेना बौखलाई है। संघर्ष विराम का उल्लंघन काफी कुछ इसी हताशा का नतीजा है।

पाकिस्तानी सेना की भारतीय सेना को उकसाने के पीछे की रणनीति भी साफ रही है। यह तो पाकिस्तानी हुक्मरान भी जानते हैं कि उनकी सेना भारत से सीधे युद्ध में मुकाबला नहीं कर सकती, पर इस तरह उकसावे के मकसद से गोले दाग कर वे भारतीय सेना का ध्यान बंटाने और दहशतगर्दों की घुसपैठ कराने का प्रयास करती रही है। मगर भरतीय सेना ने उसकी रणनीति अच्छी तरह समझ ली है और नाहक जवाबी कार्रवाई करने के बजाय संयम से काम लेते हुए, उसके असल मंसूबों को कामयाब होने से रोकती रही है।

पाकिस्तान से सड़क के रास्ते तिजारत रुक जाने, कश्मीर में अलगाववादी संगठनों, स्थानीय राजनीति दलों पर अंकुश लगने, सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ने, दहशतगर्दों को मिलने वाली मदद पर रोक लगने से पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों की घाटी में अशांति फैलाने की रणनीति कामयाब नहीं हो पा रही। स्थानीय स्तर पर जिस तरह वे पहले नौजवानों को उकसा कर हाथों में पत्थर उठाने और स्थानीय लोगों को अपनी ढाल के रूप में खड़ा कर लेने में कामयाब हो पा रहे थे, वह भी रुक गया है। ऐसे में पाकिस्तान सीमा पर अशांति का माहौल बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

यह छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ ही भारत के खिलाफ आतंकवाद को पोसते रहे हैं। अब जब उन्हें कश्मीर का मुद्दा अपने हाथ से छिन गया लगता है और दहशतगर्दी की रणनीति भी कामयाब होती नजर नहीं आ रही, तो वहां की सेना ने संघर्ष विराम की परवाह किए बगैर अपनी झुंझलाहट निकालनी शुरू कर दी है।

हालांकि भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में लगभग अलग-थलग कर दिया है और उस पर आतंकवाद रोकने का चौतरफा दबाव है, पर अब भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम के मसले पर जिस दिन भारत सख्त रुख अख्तियार करेगा, पाकिस्तानी सेना की कोशिश भी नाकाम साबित होगी।

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