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कर्ज माफी की सौगात

इसके साथ ही इस साल गेहूं की खरीद में भारी बढ़ोतरी की गई है और आलू किसानों को अच्छी कीमत दिलाने के लिए समिति गठित की जाएगी।

Author April 6, 2017 4:31 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही चुनावी वादों को पूरा करने और किसानों की बदहाली दूर करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। भाजपा ने अपने संकल्पपत्र में सरकार बनने के बाद प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था। योगी सरकार इस वादे को पूरा करने को लेकर जद्दोजहद में थी। केंद्र ने मदद देने से इनकार कर दिया, फिर भी योगी ने आखिरकार किसानों के एक लाख रुपए तक के फसली और अन्य मदों में लिए गए कर्ज माफ करने का एलान कर दिया। इस फैसले से करीब छियासी लाख किसानों को राहत मिलेगी और सरकार पर करीब पांच हजार छह सौ तीस करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।

इसके साथ ही इस साल गेहूं की खरीद में भारी बढ़ोतरी की गई है और आलू किसानों को अच्छी कीमत दिलाने के लिए समिति गठित की जाएगी। इससे खेती और किसानों की दशा में बेहतरी की उम्मीद की जा रही है। लागत के मुताबिक फसलों की कीमत न मिल पाने और मौसम आदि की मार के चलते अक्सर नुकसान उठाने के चलते खेती से किसानों का मोहभंग होता गया है। वे दूसरे रोजगार की तलाश करने लगे हैं, शहरों की तरफ पलायन बढ़ा है, पिछले कुछ सालों में किसानों की खुदकुशी के आंकड़े भी बढ़े हैं। ऐसे में योगी सरकार के फैसले से निस्संदेह कर्ज में डूबे किसानों को कुछ राहत मिलेगी। मगर इससे खेती पर कितना सकारात्मक असर पड़ेगा, कहना मुश्किल है।

किसानों की समस्या सिर्फ खेती पर आने वाला खर्च वहन करने में असमर्थ होना नहीं है। सिंचाई की सुविधा का अभाव और विपणन, भंडारण आदि दूसरी कई बड़ी समस्याएं हैं। नगदी फसलों में पारंपरिक के स्थान पर अधिक उत्पादन के लिए जीन प्रसंस्कृत बीजों का उपयोग बढ़ने से खाद-पानी-रासायनिक दवाओं की खपत बढ़ी है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी क्षीण होती गई है। ऐसे में खेती से जुड़ी समस्याओं को समग्र रूप से दूर करने की जरूरत है। फिलहाल कर्ज माफी से किसान तत्काल राहत जरूर महसूस करेंगे, पर आगे फिर वही समस्याएं उनके सामने होंगी। जब तक उन्हें दूर करने के उपाय नहीं होते कर्ज का दुश्चक्र समाप्त नहीं होने वाला। हालांकि किसानों को राहत देने की मंशा से कर्ज माफी का यह फैसला नया नहीं है।

उत्तर प्रदेश में ही पहले समाजवादी पार्टी ने किसानों का बकाया बिजली बिल माफ करने का फैसला किया था। इसी तरह पंजाब, हरियाणा, बिहार आदि राज्यों में अलग-अलग सरकारें कृषि ऋण या फिर बिजली बिल माफ करने का फैसला कर चुकी हैं। मगर पिछले अनुभवों से यही जाहिर है कि इससे किसानों को तत्काल राहत बेशक मिली, पर उनकी दशा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ। ऐसे फैसले चुनावी लोभ-लाभ का सबब भर बन कर रह जाते हैं। जिस तरह योगी सरकार ने गन्ना, गेहूं और आलू किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने की पहल की है, उसी तरह उससे दूसरी फसलों के बारे में और सिंचाई, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण आदि की दिशा में भी व्यावहारिक कदम उठाने की अपेक्षा की जाती है। फसल बीमा योजना लागू है, पर किसानों को उसका समुचित लाभ कैसे मिले, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। खेती की बुनियादी समस्याओं के निराकरण से ही किसानों और फिर गांवों की उन्नति का रास्ता खुल सकता है, कर्ज माफी इसका स्थायी समाधान नहीं है।

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