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संपादकीयः दावों के बरक्स

उन्नाव में सामूहिक बलात्कार के एक आरोप के बाद उत्तर प्रदेश में जो स्थिति बनती दिख रही है, उसमें यही लगता है कि प्रशासन कानून के बजाय आरोपियों को बचाने की कोशिश में लगा है।

Author April 12, 2018 2:54 AM
आरोपी के रसूख के असर में पुलिस को पीड़ित की शिकायत पर गौर करना जरूरी नहीं लगा

उन्नाव में सामूहिक बलात्कार के एक आरोप के बाद उत्तर प्रदेश में जो स्थिति बनती दिख रही है, उसमें यही लगता है कि प्रशासन कानून के बजाय आरोपियों को बचाने की कोशिश में लगा है। इसमें पुलिस का अब तक जो रवैया रहा है, उससे साफ है कि आरोपों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। सामूहिक बलात्कार के आरोप पर कोई कार्रवाई न होने से निराश पीड़ित लड़की ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की, तब भी पुलिस को संवेदनशील होने और अपनी ड्यूटी निभाने की जरूरत महसूस नहीं हुई!

इस मामले में कार्रवाई की मांग करने वाले लड़की के पिता की आरोपी विधायक के भाई और उसके साथियों ने बर्बरतापूर्वक पिटाई की। पर पुलिस ने मारपीट करने वालों के बजाय उल्टे लड़की के पिता को ही हिरासत में ले लिया। बाद में हिरासत में ही उसकी मौत हो गई। पहले उस पर भी परदा डालने की कोशिश की गई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह बेरहमी से पिटाई सामने आई।

अब लड़की के पिता की बुरी तरह घायल अवस्था में अंगूठा निशान लेते वीडियो और विधायक की धमकी वाले ऑडियो में जो तथ्य सामने आए हैं, उससे साफ है कि समूचे प्रकरण में पुलिस और आरोपियों की भूमिका संदिग्ध रही है। इससे पहले भी अस्पताल में बने एक वीडियो में मौत से कुछ दिन पहले लड़की के पिता ने अपने साथ मारपीट के मामले में विधायक के भाई का नाम लिया था।

मगर जैसा कि आमतौर पर देखा जाता है, शायद आरोपी के रसूख के असर में पुलिस को पीड़ित की शिकायत पर गौर करना जरूरी नहीं लगा और जब पिटाई में गंभीर चोटों की वजह से उसके पिता मौत हो गई तो अब मामले के तूल पकड़ने के डर से आनन-फानन में विधायक के भाई सहित कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अखिलेश यादव सरकार पर अपराधों से निपटने में नाकाम रहने और लचर कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया था। पर सत्ता में आने के बाद इस मोर्चे पर भाजपा सरकार के अब तक के प्रदर्शन के ऐसा नहीं लगता कि उसके लिए कानून का शासन कोई अहम मसला है। अपराध पर काबू पाने के नाम पर मुठभेड़ों में हुई मौतों पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में छेड़छाड़, बलात्कार आदि अपराधों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ी पहल करने का दावा करते हुए एंटी रोमियो दलों का गठन किया गया। मगर कुछ प्रेमी जोड़ों को गैरकानूनी तरीके से परेशान करने के अलावा उस दल की कोई खास उपलब्धि सामने नहीं आ सकी। खुद उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा हेल्पलाइन के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं का डर कम नहीं हो सका है।

उन्नाव मामले में आरोपी विधायक और उसके रिश्तेदारों सहित पुलिस की जो भूमिका सामने आ रही है, उससे साफ है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा भाजपा के लिए शायद एक चुनावी नारा भर था। अगर उत्तर प्रदेश सरकार को लगता है कि वह अपराध के शिकार पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रति ईमानदार है, तो उसे पुलिस की कोताही के बावजूद अब तक सामने आ चुके तथ्यों के बाद इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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