उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि की वजह से जैसे हालात पैदा हुए, उसने एक बार फिर यही दर्शाया कि मौसम की मार से बचाव के लिए एहतियात बरतने से लेकर सटीक पूर्वानुमान को लेकर तकनीकी स्तर पर अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। राज्य के कई इलाकों में बुधवार की शाम को तेज आंधी-तूफान, बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि एक तरह से कहर बरपा रही थी और आम लोग उसके सामने लाचार थे।
कई जगहों पर तेज हवाओं ने भारी तबाही मचाई। कितनी ही जगहों पर भारी पेड़ उखड़कर वाहनों पर गिर गए और सड़कों के किनारे लगे बोर्ड उड़कर तेज रफ्तार से जमीन पर गिरे। करीब चौबीस घंटों के दौरान करीब सौ लोगों की जान चली गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए। कई जिलों में दो हजार से ज्यादा गांवों में बिजली गुल हो गई। कुदरत के इस कहर के बाद मौसम विभाग ने राज्य के अड़तीस जिलों में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की आशंका के मद्देनजर पीली चेतावनी जारी की, लेकिन अफसोस की बात यह है कि पूर्वानुमानों के बावजूद कई बार ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं, जिनमें तूफान या बिजली गिरने की घटनाएं आम लोगों पर कहर बनकर टूटती हैं।
जाहिर है, मौसम की अपनी गति होती है और प्रकृति में उथल-पुथल के नतीजे में ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि अमूमन हर वर्ष अचानक मौसम का रुख बिगड़ने की आशंका के बावजूद आम लोग इससे बचाव के लिए एहतियात नहीं बरत पाते। इसका खमियाजा यह सामने आता है कि जिन हालात में कुछ लोगों की जान बच सकती थी, उसमें नाहक ही कई लोगों की जान चली जाती है।
राज्य में मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती ढांचे और दक्षिण राजस्थान से आ रही हवाओं के प्रभाव से वहां कई जगहों पर अस्सी से सौ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। नतीजतन, बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ। कई जगहों पर न केवल घरों की छत उड़ गई, बल्कि लोगों के लिए पांव टिकाना भी मुश्किल था। अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे मौसम में बचाव को लेकर जरूरी प्रशिक्षण के अभाव का नुकसान आम लोगों को किस स्तर पर उठाना पड़ता है।
संभव है कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने के साथ-साथ मौसम साफ होने लगे और उसके बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो, लेकिन इसके साथ यह भी सच्चाई है कि साल के इन महीनों में कई बार तेज रफ्तार से चलने वाला तूफान और ओलावृष्टि कई स्तर पर आम लोगों के लिए व्यापक क्षति और खतरे का वाहक बनते हैं।
पिछले कुछ वर्षों से हर बार यह देखा जाता है कि एक ओर तूफान में पेड़ या घर गिरने जैसी घटनाओं की वजह से कई लोग मारे जाते हैं, तो दूसरी ओर घर से लेकर फसलों तक को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा, इस बात का अध्ययन किए जाने की जरूरत है कि हाल के वर्षों में बिजली गिरने की घटनाओं में तेज इजाफा क्यों हुआ है, क्योंकि अकेले इस कारण से भी देश भर में काफी संख्या में लोगों की जान जा रही है। मौसम में तेज उतार-चढ़ाव को रोकना भले ही संभव न हो, लेकिन उससे बचाव के कुछ मामूली उपाय करके जानमाल के नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है।
