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संपादकीयः सख्ती और सुरक्षा

यह अच्छी बात है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपराध पर लगाम लगाने को लेकर गंभीर दिख रही है। अपराधियों के खिलाफ वह सख्ती से पेश आने का मन बना चुकी है।

यह अच्छी बात है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपराध पर लगाम लगाने को लेकर गंभीर दिख रही है।

उत्तर प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के चलते सरकार को काफी किरकिरी झेलनी पड़ रही है। अपराधी इस कदर बेलगाम हो चुके हैं कि दिन दहाड़े किसी की हत्या, बलात्कार करके निकल भागते हैं और पुलिस कुछ कर नहीं पाती। ऐसे में सरकार ने विशेष सुरक्षा बल के गठन का फैसला किया है, जिसे बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के भी गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। इस विशेष बल को फिलहाल मेट्रो रेल, हवाई अड्डों, अदालतों और बैंकों जैसे महत्त्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस विशेष सुरक्षा बल अधिनियम में कुछ नया नहीं जोडाÞ गया है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा बल को पहले से प्राप्त अधिकार उसे राज्य में दे दिए गए हैं। अपराधियों को गिरफ्तार करने में पुलिस को कई बार इसलिए परेशानी पैदा होती है कि उसके लिए उसे मजिस्ट्रेट से आदेश लेना पड़ता है। इस बीच अपराधी भाग निकलते और अपराध संबंधी साक्ष्य मिटाने में कामयाब हो जाते हैं। विशेष सुरक्षा बल के सामने ऐसी कोई अड़चन नहीं होगी, तो वह तुरंत कार्रवाई कर सकेगा। सरकार का मानना है कि विशेष सुरक्षा बल के गठन से राज्य में आपराधिक प्रवृत्ति पर लगाम लगाने में आसानी होगी।

यह अच्छी बात है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपराध पर लगाम लगाने को लेकर गंभीर दिख रही है। अपराधियों के खिलाफ वह सख्ती से पेश आने का मन बना चुकी है। मगर देखना है, वह अपने इस मकसद में कहां तक कामयाब हो पाती है। विशेष सुरक्षा बल के गठन को लेकर विपक्ष सरकार की कड़ी आलोचना पर उतर आया है। विपक्ष का काम है आलोचना करना, पर अगर उसके तर्कों और आशंकाओं में दम हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में अपराध न रुक पाने के पीछे केवल यह कारण नहीं माना जा सकता कि पुलिस को विशेष अधिकार प्राप्त न होने से अपराधियों का मनोबल बढ़ता गया है। असल कारण है पुलिस का राजनीतिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल और उसके हाथ बांधे रखना। खुद वहां के मुख्यमंत्री आरोप लगाते रहे हैं कि पिछली सरकार ने अपराधियों को संरक्षण दिया और पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई करने से रोके रखा। मगर करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी अगर योगी सरकार अपराधियों में भय पैदा नहीं कर पाई है, तो साफ है कि वह भी कोई अलग रास्ता अख्तियार नहीं कर पाई है। अगर वह सचमुच अपराध रोकने को लेकर गंभीर होती तो निश्चय ही पुलिस ने अब तक अपराधियों पर काबू पा लिया होता।

ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि विशेष सुरक्षा बल का उपयोग कहीं विरोधियों को सबक सिखाने के लिए न किया जाने लगे। जब भी सुरक्षा बलों को असीमित अधिकार प्रदान किए जाते हैं, तो अक्सर वे मानवाधिकारों का उल्लंघन करने से भी परहेज नहीं करते देखे जाते हैं। उसमें बहुत सारे बेगुनाह लोग भी प्रभावित होते हैं। पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को मिले विशेषाधिकार के नतीजे सब जानते हैं। आतंकवाद निरोधक कानून लागू होने के बाद भी अनेक निर्दोष लोगों पर सुरक्षाबलों के अत्याचार सामने आए। उत्तर प्रदेश में इस विशेषाधिकार का सुरक्षा बल कितनी सावधानी से इस्तेमाल करेगा, कहना मुश्किल है। उत्तर प्रदेश कोई आतंकवाद प्रभावित राज्य नहीं है, वहां गुंडा तत्त्व सक्रिय हैं। उन्हें काबू करने के लिए सरकार की राजनीतिक इच्छा काफी है। अगर सरकार पुलिस को सख्ती की छूट दे दे और उसकी जवाबदेही तय कर दे, तो गुंडों पर नकेल कसना मुश्किल नहीं।

 

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