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संपादकीय: हृदय-रोग की मार

आमतौर पर ये जीवनशैली और खानपान से जुड़ी ऐसी बीमारियां हैं, जिनका बहुत थोड़ा ध्यान रख कर बचा जा सकता है। लेकिन लोगों के आलस्य और लापरवाही की वजह से कोई बीमारी उनके भीतर घर बनाती है और पलते-बढ़ते हुए आखिरकार उनकी जान ले लेती है।

संपादकीयबढ़ते हृदय रोगों के पीछे लोगों की अनियंत्रित जीवन शैली और आलस्य बड़ा कारण है।

सेहत के मामले में सामान्य रोगों से बचाव को लेकर बढ़ती जागरूकता के बावजूद कुछ ऐसी बीमारियां चुपचाप अपना पांव पसारती जा रही हैं, जिनका समय पर इलाज नहीं हो पाने की वजह से बहुत सारे लोग मारे जा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक ताजा रिपोर्ट में हृदय से संबंधित रोगों से मरने वालों का जो आंकड़ा सामने आया है, वह बेहद चिंताजनक है। इसके मुताबिक हृदय की बीमारियों के चलते पहले के मुकाबले अब काफी ज्यादा लोगों की मौत हो रही है और पिछले दो दशकों के दौरान विश्व स्तर पर होने वाली मौतों की संख्या में इस रोग का सबसे बड़ा हाथ है।

सन् 2000 में जहां हृदय रोग की चपेट में आकर दुनिया भर में बीस लाख लोग जान गंवा बैठे, वहीं 2019 में यह आंकड़ा बढ़ कर नब्बे लाख हो गया। यों मधुमेह और मनोभ्रंश भी दुनिया की शीर्ष दस बीमारियों की सूची में शामिल हैं, जिससे बहुत ज्यादा लोगों की मौत होती है, लेकिन बाकी सभी कारकों से होने वाली मृत्यु के मामलों में से सोलह फीसद मौत अकेले हृदय रोगों से होती है।

अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस बीमारी को लेकर समाज में प्रत्यक्ष तौर पर उतनी चिंता नहीं जताई जाती, वह आज इतनी बड़ी तादाद में लोगों को अपना शिकार बना रही है। डब्ल्यूएचओ की बुधवार को जारी 2019 वैश्विक स्वास्थ्य आकलन रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन दस बीमारियों से विश्व में सबसे ज्यादा लोगों की मौतें होती हैं, उनमें से सात गैर-संचारी बीमारियां हैं। फेफड़ों और किडनी से जुड़ी बीमारियों के अलावा कुछ अन्य रोगों की स्थिति में भी भारी तादाद में लोगों की जान जा रही है।

आमतौर पर ये जीवनशैली और खानपान से जुड़ी ऐसी बीमारियां हैं, जिनका बहुत थोड़ा ध्यान रख कर बचा जा सकता है। लेकिन लोगों के आलस्य और लापरवाही की वजह से कोई बीमारी उनके भीतर घर बनाती है और पलते-बढ़ते हुए आखिरकार उनकी जान ले लेती है। मसलन, ज्यादातर लोगों को इस बात के बारे में जानकारी है कि धूम्रपान से किस तरह के नुकसान हो सकते हैं। खुद डब्ल्यूएचओ की ओर से भी अपनी एक रिपोर्ट में यह बताया जा चुका है कि फेफड़ों के जुड़ी बीमारियां होने के अलावा तंबाकू के कारण होने वाले हृदय रोगों से हर साल दुनिया में करीब बीस लाख लोगों की मौत हो रही है; हृदय रोगों से होने वाली हर पांचवीं मौत की वजह तंबाकू या धूम्रपान है।

विडंबना यह है कि इन तथ्यों के बावजूद लोग बेफिक्र होकर खुद को धुएं में गुम कर राहत की तलाश करते हैं। एक समय था जब मामूली बीमारियों का सही समय पर उचित इलाज नहीं होने की वजह से मरीजों की मौत हो जाती थी। लेकिन वक्त के साथ वैज्ञानिक उपलब्धियों के बीच चिकित्सा विज्ञान ने काफी उन्नति की और रोगों के इलाज के नए तरीके सामने आए, किसी रोग से मृत्यु के दरवाजे पर पहुंचे मरीजों के फिर से स्वस्थ होने की दर बढ़ी और इस तरह लोगों के जीवन की औसत आयु में भी इजाफा हुआ। लेकिन हृदय रोग सहित जीवनशैली और खानपान में तेजी से आते बदलाव की वजह से होने वाली कई बीमारियों की वजह से मौतों के आंकड़े भी तेजी से बढ़े।

ज्यादातर मामलों में अपनी सेहत को व्यक्ति खुद ही दुरुस्त रख सकता है या फिर दांव पर लगा सकता है। जीवनशैली में थोड़ी नियमितता लाई जाए तो जानलेवा रोगों की चपेट में आने से बचा जा सकता है। सवाल है कि जीवनशैली में घुली ऐसी लापरवाहियां या आदतें किस काम की, जो तात्कालिक तौर पर राहत की तरह लगती हैं, लेकिन सेहत को दीर्घकालिक और गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।

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