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संपादकीयः बड़ी कामयाबी

गौरतलब है कि बीते दो महीनों के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने कई हमले किए, जिसका सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया और अड़तीस आतंकियों को मार गिराया।

Author Published on: May 30, 2020 12:26 AM
चार-पांच दिन पहले ही सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि आइइडी जैसे बेहद संवेदनशील विस्फोटकों से लदी एक कार कहीं जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में लगातार चौकसी से वहां आतंकी हमलों पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, लेकिन आज भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं, जिससे यह लगता है कि वहां हर समय सावधानी बरतने की जरूरत है। सुरक्षा बलों ने इस जरूरत को समझा है और यही वजह है कि गुरुवार को पुलवामा में एक बार फिर ऐसा हमला नाकाम किया जा सका, जिसकी धमक शायद लंबे समय तक बनी रहती। दरअसल, चार-पांच दिन पहले ही सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि आइइडी जैसे बेहद संवेदनशील विस्फोटकों से लदी एक कार कहीं जा रही है। उसके बाद हर स्तर पर निगरानी और चौकसी बरती गई। एक जगह पर जब कार को रोका गया तो उसमें सवार व्यक्ति उतर कर भाग गया, लेकिन कार को बरामद कर लिया गया। जांच के बाद जब देखा गया कि उसमें रखे विस्फोटक को अलग करना मुश्किल है तब उसे कार सहित उड़ा कर एक बड़े हमले को नाकाम कर दिया गया। निश्चित रूप यह सुरक्षा बलों की एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन इस समूचे मामले से यह भी साबित होता है कि आज भी वहां आतंकवादियों के मंसूबों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है।

इस घटना के संदर्भ में मिली खुफिया सूचना के मुताबिक आइइडी जैसे चालीस-पैंतालीस किलो विस्फोटकों से लदी कार का निशाना बीस वाहनों में सवार सीआरपीएफ के चार सौ जवान होने वाले थे। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर आतंकी किसी तरह अपने मकसद में कामयाब हो जाते तो कैसे हालात पैदा हो सकते थे। यह सही है कि सुरक्षा बलों की चौकसी की वजह से इस आतंकी हमले को नाकाम कर दिया गया, इसके बावजूद इसने पिछले साल फरवरी में हुए ऐसे ही बड़े हमले की याद दिला दी, जिसमें बयालीस जवानों की जान चली गई थी। वह घटना जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद के इतिहास में सुरक्षा बलों के लिए एक त्रासद जख्म की तरह कायम है। यही वजह है कि उस हमले के बाद से सुरक्षा के मोर्चे पर कोई मामूली-सी चूक की गुंजाइश न छोड़ने की कोशिश की जाती है। सुरक्षा बलों, स्थानीय पुलिस और अलग-अलग मोर्चों पर तैनात खुफिया सूत्रों के बीच तालमेल बेहतर हुआ है। ताजा हमले को नाकाम करने में सही समय पर मिली संभावित हमले की खुफिया जानकारी ही थी।

गौरतलब है कि बीते दो महीनों के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने कई हमले किए, जिसका सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया और अड़तीस आतंकियों को मार गिराया। माना जा रहा है कि आतंकियों की ताजा हमले की कोशिश अपने साथियों के लगातार मारे जाने के बदले के तौर पर ही थी। जिस हमले को नाकाम किया गया, उसके बारे में कश्मीर पुलिस ने बताया कि इस साजिश में जैश-ए-मोहम्मद का एक पाकिस्तानी कमांडर शामिल था। अगर ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि इस तरह के आतंकी हमलों को कहां से संचालित किया जा रहा होगा। यह हकीकत कई बार सामने आ चुकी है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्करे-तैयबा जैसे संगठन पाकिस्तान स्थित अपने ठिकानों से ही आतंकी गतिविधियां संचालित करते हैं। हो सकता है कि पाकिस्तान को इस तरह के आरोपों और आतंकी संगठनों से छुटकारा पाना जरूरी नहीं लगता हो, लेकिन भारत के लिए ऐसे आतंकवादी संगठनों और उनके हमलों का मुंहतोड़ जवाब देना हर लिहाज से जरूरी है।

 

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