ताज़ा खबर
 

संपादकीय: हौसले की जीत

आस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेट टीम ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत कर यह साबित किया है कि किसी भी चुनौती से पार पाने और कामयाब होने के लिए सबसे जरूरी कारक हौसला होता है।

cricketजीत का जश्‍न। फाइल फोटो

वरना मैचों के पहले और उसके दौरान टीम की जो तस्वीर दिख रही थी, उसमें तमाम विश्लेषक इस तरह का निश्चित अंदाजा लगाने में नाकाम थे कि नतीजों में इतनी बड़ी उलट-फेर हो सकती है। खासतौर पर जब भारतीय टीम के कई अहम माने जाने वाले खिलाड़ी शृंखला के बीच में ही गंभीर रूप से चोटिल हो गए और विराट कोहली सिर्फ पहला टैस्ट खेलने के बाद छुट्टी लेकर स्वदेश लौट आए, तब यह आशंका खड़ी हुई कि अब मजबूत आस्ट्रेलियाई टीम की चुनौती का सामना कैसे किया जाएगा!

सच यह है कि जब दोनों टीमों के बीच टैस्ट मैचों की शुरुआत हुई थी, तब आस्ट्रेलिया की टीम ने इसे हल्के में लिया और शायद इसी का असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा। अब स्थिति यह है कि आस्ट्रेलियाई टीम सहित सभी विश्लेषक भारतीय टीम की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। आस्ट्रेलिया में मीडिया ने भी भारत की शृंखला में 2-1 से जीत को ‘सबसे बेहतरीन वापसी के साथ मिली जीत’ कहा।

गौरतलब है कि एडिलेड मैच में टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी टैस्ट इतिहास में अपने सबसे कम स्कोर यानी महज छत्तीस रन पर आउट हो गए थे और उसमें आस्ट्रेलियाई टीम हारी हुई बाजी जीत गई थी। अगर इसको उदाहरण माना जाए तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता और मनोबल को किस स्तर से देखा गया होगा।

लेकिन क्षमताओं की असली परीक्षा विपरीत हालात में होती है। चार मैचों की शृंखला में शुरुआत से ही भारतीय टीम जिन मुश्किलों से दो-चार थी, कई अहम खिलाड़ी चोट का सामना कर रहे थे और बाकी खिलाड़ियों को अनुभवहीन माना जा रहा था, उसमें खुश कर देने वाले किसी नतीजे उम्मीद कम थी। इसके अलावा, ब्रिसबेन के गाबा मैदान पर आखिरी टैस्ट में टीम के सामने एक दिन में तीन सौ रन बनाने का लक्ष्य था।

ऐसी स्थिति में ज्यादातर मौकों पर कोई टीम किसी तरह मैच को बराबरी पर खत्म कर लेने के मकसद से खेलती है। लेकिन भारतीय टीम ने चुनौती के इस मौके पर अपने हौसले का सहारा लिया, सामना किया, तीन सौ अट्ठाईस रन का पीछा किया और आखिरकार तीन विकेट से जीत दर्ज की। इस तरह पिछले बत्तीस सालों से ब्रिसबेन के गाबा मैदान पर आस्ट्रेलिया की अजेय बादशाहत भी टूट गई।

जाहिर है, टैस्ट मैचों के आम नतीजों के मुकाबले इस शृंखला की अहमियत भारत के लिए बेहद खास है। इसमें टीम इंडिया को जहां जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, अश्विन, अजिंक्य रहाणे, उमेश यादव जैसे कई खिलाड़ियों ने भविष्य की उम्मीदों को लेकर आश्वस्त किया, वहीं इस मैच ने यह भी दर्ज किया कि हौसला साथ हो तो हार की हालत को भी जीत में तब्दील किया जा सकता है।

यह ध्यान रखने की जरूरत है कि आस्ट्रेलियाई टीम और वहां के मीडिया की ओर से कमतर करके आंकने के समांतर मैच के दौरान दर्शक दीर्घा की ओर से कई अवांछित और नस्लवादी टिप्पणियां खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ने के काफी थीं, मगर टीम इंडिया ने शायद इन्हीं प्रतिक्रियाओं को चुनौती के तौर पर लिया और इसका जवाब मैदान में देने का मन बनाया। यही वजह है कि आस्ट्रेलिया के कई वरिष्ठ खिलाड़ियों से लेकर वहां के मीडिया तक को भारतीय खिलाड़ियों के बारे में अपनी हड़बड़ी की धारणा के बरक्स तारीफ करनी पड़ी। अब यह उम्मीद स्वाभाविक है कि आने वाले दिनों में एक बार फिर विश्व क्रिकेट में भारतीय टीम अपनी चमक बिखेरेगी।

Next Stories
1 संपादकीय: बाइडेन की चुनौतियां
2 संपादकीय: हादसे की सड़क
3 संपादकीय: सुरक्षा का सवाल
ये पढ़ा क्या?
X