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संपादकीयः कामयाबी की मिसाल

दरअसल, बचने की न्यूनतम संभावना के बावजूद गुफा में फंसे सभी तेरह लोगों को जिस तरह बचा लिया गया, उसे चमत्कार की तरह ही देखा जाएगा। ऐसी कल्पना मात्र से दिल दहल जाता है कि घुप अंधेरे में बच्चों ने कैसे दस दिन गुजारे।

Author July 12, 2018 04:55 am
थाईलैंड में एक गुफा से बारह बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित निकालने का अभियान अब पूरा हो चुका है। इस मिशन को कामयाब बनाने में जुटे दल और थाईलैंड सरकार की जितनी तारीफ की जाए, कम होगी।

थाईलैंड में एक गुफा से बारह बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित निकालने का अभियान अब पूरा हो चुका है। इस मिशन को कामयाब बनाने में जुटे दल और थाईलैंड सरकार की जितनी तारीफ की जाए, कम होगी। अठारह दिन से गुफा में चार किलोमीटर से भी ज्यादा अंदर पानी के बीच फंसे बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित निकालने के लिए थाई नेवी सील और सेना के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जापान, म्यांमा और चीन के विशेषज्ञ मोर्चे पर डटे रहे। यह एक बड़ा और जोखिम से भरा बचाव अभियान था। जरा-सी चूक, असावधानी, जल्दबाजी या कोई भी गलत फैसला गुफा में फंसे बच्चों के साथ बचावकर्मियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता था। इसलिए पूरे अठारह दिन फूंक-फूंक कर कदम रखे गए। सभी को गुफा से सुरक्षित निकालने लिए दुनिया भर में दुआएं मांगी जाती रहीं। इसलिए जब अभियान खत्म हुआ तो थाई नेवी सील ने अपने पहले फेसबुक पोस्ट में लिखा- हम नहीं जानते कि यह कोई चमत्कार है या विज्ञान या फिर कुछ और।

दरअसल, बचने की न्यूनतम संभावना के बावजूद गुफा में फंसे सभी तेरह लोगों को जिस तरह बचा लिया गया, उसे चमत्कार की तरह ही देखा जाएगा। ऐसी कल्पना मात्र से दिल दहल जाता है कि घुप अंधेरे में बच्चों ने कैसे दस दिन गुजारे। खाने का सामान नहीं, सांस लेना तक दूभर। गुफा में चारों ओर जमा गंदा पानी पीकर ही सबने काम चलाया। ऐसे में बनने वाली मन:स्थिति की बस कल्पना ही की जा सकती है। वाइल्ड बोर नाम की थाईलैंड की बच्चों की फुटबॉल टीम के तेरह सदस्य 23 जून को गुफा में भटकते हुए चार किलोमीटर से ज्यादा आगे तक निकल गए थे। बाहर तेज बारिश के कारण पानी अंदर आता गया और ये बचाव के लिए आगे बढ़ते गए और अंत में फंस गए। पहली बार दो जुलाई को दो ब्रिटिश गोताखोरों ने इन्हें खोजा था। इन्हें बचाने में जुटे विशाल दल ने हालात भांपते हुए जितनी भी रणनीतियां हो सकती थीं, सब पर विचार किया। गुफा में आॅक्सीजन की कमी, अंधेरा, बाढ़ का भरा पानी और लगातार बिगड़ता मौसम इस बचाव अभियान में बड़ी बाधा थे। पहाड़ खोद कर भी बच्चों तक पहुंच बनाने की कोशिश पर विचार हुआ था।

जिस तरह से पूरे अभियान को अंजाम दिया गया, वह पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। सबसे बड़े जोखिम भरे संकट से निपटने के लिए जिस तरह रणनीति बनाई गई, उस पर अमल किया गया और सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया, वह सब एक कुशल आपदा प्रबंधन का उदाहरण है। हालांकि बच्चों को बचाने में थाई नेवी सील के एक सदस्य की मौत गई, क्योंकि बीच गुफा में उसका ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया था। इसके बावजूद पूरे मिशन में अति-सावधानी बरतते हुए आगे बढ़ा गया। कोई प्रचार नहीं हुआ, न कोई शोर मचा। मीडिया में भी ऐसी कोई बात नहीं आने दी गई जो सनसनी फैलाती और अभियान पर उसका असर पड़ता। सिर्फ नपे-तुले बुलेटिन जारी हुए। सबसे बड़ी और अच्छी बात यह रही कि मिशन पूरा होने के बाद तक किसी ने भी, यहां तक कि थाईलैंड सरकार तक ने कोई श्रेय लेने की होड़ नहीं दिखाई। इस मामले में बच्चों के कोच की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने ध्यान के जरिए बच्चों का मनोबल बनाए रखा और उन्हें विचलित या प्रतिकूल मनोस्थिति का शिकार होने से बचा लिया। सारे बच्चों में और अपने भीतर आत्मविश्वास बनाए रखा। ऐसी घटनाएं-हादसे हमें सबक भी देकर जाते हैं। हालात कितने ही जटिल क्यों न हों, हताश नहीं होना चाहिए।

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