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कैद में कत्ल

समूचे एशिया में सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली दिल्ली की तिहाड़ जेल में मंगलवार को एक कैदी की हत्या से इस परिसर में सुरक्षा-व्यवस्था और कैदियों पर निगरानी की हकीकत फिर से सामने आई है। हैरानी की बात है कि जेल से बाहर जिन आपराधिक गतिविधियों की सजा के तौर पर दोषियों को जेल में […]

Author August 14, 2015 8:32 AM
तिहाड़ में कैदी की सनसनीखेज हत्या, 4 अन्य कैदियों पर मर्डर का आरोप

समूचे एशिया में सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली दिल्ली की तिहाड़ जेल में मंगलवार को एक कैदी की हत्या से इस परिसर में सुरक्षा-व्यवस्था और कैदियों पर निगरानी की हकीकत फिर से सामने आई है। हैरानी की बात है कि जेल से बाहर जिन आपराधिक गतिविधियों की सजा के तौर पर दोषियों को जेल में डाला गया है, वैसा करने से उन्हें वहां भी नहीं रोका जा पा रहा। किसी मामूली बात पर विवाद के बाद उच्च सुरक्षा वाले वार्ड में बंद चार कैदियों ने दीपक नाम के एक कैदी की पहले आंख फोड़ दी, फिर लोहे के टुकड़े से बनाए धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी।

उस वक्त ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे? उच्च सुरक्षा के दर्जे में रखे गए इस वार्ड की निगरानी की क्या व्यवस्था है? अब बेशक इस हत्या के आरोपियों के खिलाफ जेल प्रशासन कोई सख्त कदम उठाए, मगर इस घटना ने वहां की खामियां एक बार फिर उजागर कर दी हैं। ताजा घटना में संलिप्त आरोपी पहले से ही कई संगीन मामलों में सजा काट रहे हैं। जेल के भीतर दूसरे कैदियों को धमकाने, जेलकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और परिसर में प्रतिबंधित वस्तुओं के इस्तेमाल आदि के लिए कई बार उन्हें अलग से कठोर दंड दिया जा चुका है। लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

यों जेलों में कैदियों के अलग-अलग समूहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चलती रहती है। लेकिन जिन जेलों को सख्ती के साथ-साथ सुधार के ठौर के तौर पर भी देखा जाता है, वहां उन्हें मारपीट, हिंसा या किसी की हत्या करने का मौका कैसे मिल जाता है? आंकड़ों के मुताबिक आत्महत्या, चिकित्सीय लापरवाही और दूसरे कारणों से इस साल तिहाड़ में अब तक बीस मौतें हो चुकी हैं।

जून में दिल्ली सरकार से उच्च न्यायालय ने जनवरी से अप्रैल के बीच तिहाड़ में पंद्रह कैदियों की मौत पर रिपोर्ट मांगी थी। यह सही है कि जेल में रहते हुए कई सजायाफ्ता कैदियों ने पढ़ाई-लिखाई की और अपने अच्छे आचरण से खुद में सुधार को साबित किया। इसी आधार पर ऐसे कई कैदियों को एक सीमित दायरे में नियमों के तहत आसपास रोजगार के लिए जाने की छूट भी दी गई। लेकिन विडंबना यह है कि जिन कैदियों को सख्ती के साथ-साथ काउंसिलिंग या परामर्श की सबसे ज्यादा जरूरत है, उन पर शायद खास ध्यान नहीं दिया गया।

तिहाड़ में कैदियों की संख्या के बरक्स संसाधनों की जो हालत है उसमें सभी कैदियों को इसका लाभ मिल पाना एक सपना ही है। निर्धारित संख्या से पांच हजार से ज्यादा कैदी रखना और कुल चौदह हजार कैदियों के लिए किन्हीं हालात में काउंसिलिंग की जरूरत पड़ने पर महज दो मनोचिकित्सक का होना अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि इस जेल में संसाधनों की हकीकत क्या है! हालांकि तिहाड़ को सुधार कार्यक्रम के लिए भी जाना जाता है। लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

 

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