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चिंता के आंकड़े

पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र और केरल सहित देश के कुछ राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में अचानक से आई तेजी ने फिर से चिंता बढ़ा दी है।

Author Updated: February 23, 2021 6:08 AM
coronaकोरोना मरीज का सैंपल लेते स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी। फाइल फोटो।

महाराष्ट्र के हालात तो नए खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। अमरावती जिले में एक हफ्ते की पूर्णबंदी लगा दी गई है, पुणे में हफ्ते भर के लिए शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए और नाशिक में अड़तालीस घंटे का कर्फ्यू लगा। राज्य में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नागरिकों के लिए पूर्व की भांति सख्त नियम लागू कर कर दिए हैं।

महाराष्ट्र सरकार के इन कदमों ने दस महीने पहले की भयावह स्थिति की याद दिला दी है। केरल में मामले बढ़ते देख कर्नाटक ने उससे लगने वाली सीमा को सील कर दिया है। एक पखवाड़े पहले तक देश में संक्रमितों की संख्या काफी कमी आ गई थी और लगने लगा था कि अब हम महामारी से मुक्त होने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन अब फिर से संक्रमण के नए मामलों में तेज वृद्धि से लग रहा है कि महामारी कहीं फिर से तो नहीं लौट रही। महाराष्ट्र और केरल के अलावा मध्यप्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़ और यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में भी संक्रमण लगातार नए मामलों का मिलना बता रहा है कि अगर हम अब भी नहीं चेते तो देश फिर संकट में फंस सकता है।

देश में कोरोना की सबसे ज्यादा मार महाराष्ट्र पर पड़ी है। हालांकि भारत में पहला कोरोना संक्रमित मरीज पिछले साल फरवरी में केरल में मिला था। ऐसे में अब केरल और महाराष्ट्र के हालात को हल्के में नहीं लिया जा सकता। लंबे समय से देखने में आ रहा है कि महामारी के खतरे को लेकर लोग एकदम बेपरवाह हो गए हैं और मास्क लगाने व सुरक्षित दूरी जैसे बचाव के जरूरी उपायों का कहीं पालन नहीं कर रहे।

ऐसी स्थिति देश के सभी राज्यों में देखने को मिल रही है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में तो विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं और वहां चुनावी सभाओं में कोरोना प्रोटोकॉल की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे पहले बिहार में भी ऐसा ही हाल देखने को मिला था। ऐसे में सबसे बड़ा संकट यह खड़ा हो गया है कि जब लोगों को मास्क और सुरक्षित दूरी जैसे नियम का पालन करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, तभी वे घोर लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे में संक्रमण को फैलने से कैसे रोका जा सकता है?

देश के ज्यादातर राज्यों में तो अब स्कूल, कालेज सहित सभी शिक्षण संस्थान, सरकारी-निजी दफ्तर खुल गए हैं और आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए भी कवायदें जारी हैं। मुंबई में तो कुछ समय पहले लोकल ट्रेन सेवा भी अब सामान्य हो गई है। जाहिर है हर जगह भीड़ बढ़ रही है और साथ ही खतरा भी। कोरोना के नए स्वरूप के भी कुछ मामले में भारत में आए हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत अब है।

राहत की बात यह है कि भारत के पास अब कोरोना का टीका भी है और व्यापक स्तर पर टीकाकरण का काम चल रहा है। लेकिन सभी को टीका मिलने में वक्त लगेगा। यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी हम गंभीर संकट से निकले ही हैं और खतरा अभी टला नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में जहां लोगों ने न केवल पूर्णबंदी का विरोध किया, बल्कि मास्क लगाने तक से परहेज किया, वहां अब महामारी की दूसरी लहर से लोगों की जान खतरे में है। ऐसे में महामारी से निपटने के लिए बिना जन सहयोग के सरकारें कुछ नहीं कर पाएंगी।

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