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संपादकीय: आतंक का दायरा

अब यह एक जगजाहिर तथ्य है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई खतरनाक आतंकी संगठन पाकिस्तान स्थित ठिकानों से अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं, जो न केवल सीमावर्ती इलाकों में सीधे हमले करते हैं, बल्कि देश के अन्य इलाकों में भी घुसपैठ करके अपनी मंशा का विस्तार करने की कोशिश करते हैं।

Jammu and Kashmir,जम्मू-कश्मीर में आतंकी लगातार भाजपा नेताओं को निशाना बना रहे हैं। (ANI)

राजधानी दिल्ली में एक संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी और उत्तर प्रदेश में उसके घर से हथियारों के जखीरे की बरामदगी निश्चित रूप से पुलिस और खुफिया तंत्र की एक बड़ी कामयाबी है, जिसने एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया। इससे यह भी साबित होता है कि अगर समूचा तंत्र एक बेहतर तालमेल और सक्रियता के साथ काम करे तो किसी बड़े आतंकी हमले या उसकी योजना को समय रहते नाकाम किया जा सकता है। गौरतलब है कि दिल्ली के धौलाकुआं इलाके में एक मुठभेड़ के बाद पुलिस के स्पेशल सेल की टीम ने संदिग्ध मोहम्मद मुस्तकीम उर्फ अब्दुल युसूफ को गिरफ्तार किया।

उसके तीन अन्य संबंधियों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। अब्दुल युसूफ की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित उसके घर से दो आत्मघाती जैकेट, घातक विस्फोटकों सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद किया। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर समय रहते वह पकड़ में नहीं आया होता तो देश को एक बार फिर किस तरह की आतंकी घटना का सामना करना पड़ सकता था।

दरअसल, कुछ साल पहले तक इसी तरह दिखने में छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों को जरिया बना कर बड़े आतंकी संगठनों ने देश के कई इलाकों को दहलाया था। सिलसिलेवार बम धमाकों से लेकर सीधे हमलों के जरिए आतंक परोसने वालों ने आम लोगों के भीतर आतंकवाद को लेकर एक तरह का दहशत कायम कर दिया था। यह कोई छिपा तथ्य नहीं रहा है कि सीमा पार के ठिकानों से संचालित आतंकवादी संगठनों के सदस्य हमारे देश के युवाओं तक पहुंच बना कर आतंकी गतिविधियों में उनका इस्तेमाल करते हैं।

वे हर वक्त पुलिस की ओर से किन्हीं वजहों से जरूरी चौकसी और निगरानी में कमी होने का फायदा उठा कर अपनी मंशा को कामयाब करने की ताक में होते हैं। लेकिन हाल के कुछ सालों में पुलिस की ओर से अब खुफिया तंत्र और सूचनाओं के जाल का विस्तार किया गया है और साधारण दिखने वाली बातों का भी गंभीरता से मूल्यांकन किया जाता है। यही वजह है कि ऐसे मामले भी सामने आने लगे हैं जिनमें किसी वारदात को अंजाम देने के पहले ही उसका पता लगा लिया जाता है। दिल्ली में संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी और भारी पैमाने पर विस्फोटकों की ताजा बरामदगी को भी इसी कड़ी में देखा जा सकता है।

निश्चित रूप से इसे पुलिस की मेहनत, चौकसी और संदिग्धों पर निगरानी का हासिल कहा जा सकता है। लेकिन इससे यह भी जाहिर होता है कि जमीनी स्तर पर वैश्विक पैमाने पर काम करने वाले आतंकी संगठनों की पहुंच है और वे कमजोर मनोबल वाले युवाओं को मामूली लोभ या गलत धार्मिक व्याख्याओं के जरिए बहका कर उनका अतिवादीकरण करने की कोशिश करते हैं। निगरानी तंत्र के जाल में आकर आमतौर पर वैसे युवा तो पकड़ में आ जाते हैं, लेकिन जरूरत उनके असली स्रोत पर चोट करने की है।

अब यह एक जगजाहिर तथ्य है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई खतरनाक आतंकी संगठन पाकिस्तान स्थित ठिकानों से अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं, जो न केवल सीमावर्ती इलाकों में सीधे हमले करते हैं, बल्कि देश के अन्य इलाकों में भी घुसपैठ करके अपनी मंशा का विस्तार करने की कोशिश करते हैं। जाहिर है, एक ओर जहां पुलिस और खुफिया महकमे को हर स्तर पर निगरानी, चौकसी और तत्काल कार्रवाई के तंत्र को और ज्यादा सक्रिय रखने की जरूरत है, वहीं समाज के स्तर पर भी सरकार को नई और सकारात्मक योजनाओं के साथ युवाओं को आतंकियों के जाल में फंसने से बचाने की पहलकदमी करनी होगी।

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