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संपादकीय: लापरवाही की हद

देखने में आ रहा है कि पूर्णबंदी हटने के बाद जिस तरह लोगों की आवाजाही और बाजारों में गतिविधियां बढ़ी हैं, उसमें लोग सुरक्षा के प्रति जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे। ऐसे में कई बार लगता है कि सख्ती जरूरी है, लेकिन जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए पूर्ण या आंशिक बंदी जैसा कदम हमेशा व्यावहारिक नहीं कहा जा सकता।

coronavirus delhi covid19दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ने शुरू हो गए हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

देश में रोजाना जिस संख्या में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, उससे यह तो स्पष्ट है कि महामारी का प्रसार अभी कमजोर नहीं पड़ा है। हालांकि पिछले एक हफ्ते के दौरान संक्रमण के मामलों में कमी तो आई है और स्वस्थ होने की दर भी बढ़ रही है, लेकिन चिंता की बात यह है कि महामारी के प्रति लोग अब लापरवाह होते जा रहे हैं और इससे बचाव के उपायों को नजरअंदाज कर रहे हैं। लोगों के इस लापरवाह रवैए पर देश के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का क्षुब्ध होना स्वाभाविक है। इसीलिए उन्हें आमजन से फिर यह अपील करने को मजबूर होना पड़ा कि लोग बचाव के जरूरी उपायों का कठोरता से पालन करें और महामारी को फैलने से रोकें।

देखने में आ रहा है कि पूर्णबंदी हटने के बाद जिस तरह लोगों की आवाजाही और बाजारों में गतिविधियां बढ़ी हैं, उसमें लोग सुरक्षा के प्रति जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहे। ऐसे में कई बार लगता है कि सख्ती जरूरी है, लेकिन जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए पूर्ण या आंशिक बंदी जैसा कदम हमेशा व्यावहारिक नहीं कहा जा सकता।

महामारी को फैलने से रोकने के लिए देश में अब भी कई प्रतिबंध हैं, जैसे- शिक्षण संस्थान पूरी तरह से नहीं खुले हैं, सिनेमाघर बंद हैं, साप्ताहिक बाजारों पर पाबंदी है। पर यह सब जनता की सुरक्षा के लिए है। लेकिन समस्या यह है कि ज्यादातर लोग मास्क लगाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और जरूरी नियम का पालन करते नहीं दिख रहे। ऐसा हर जगह देखने में आ रहा है। लगता है लोगों ने कोरोना महामारी को नियति मानते हुए अपने को भाग्य भरोसे छोड़ दिया है।

हाल में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में तो हद तब हो गई जब उपचुनावों के प्रचार के लिए बड़ी-बड़ी रैलियां की गईं जिनमें कोरोना से बचाव के सारे नियमों-उपायों की धज्जियां उड़ाई गर्इं। राजस्थान में पंचायत चुनाव मतदान के दौरान किसी ने यह नहीं सोचा कि उसे महामारी से बचाव के नियमों का पालन करना चाहिए। हाल में गुजरात के एक विधायक कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद एक मंदिर में भीड़ के सामने नाचते नजर आए थे। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं जो कोरोना को लेकर लोगों की लापरवाही को बताते हैं।

यह नहीं भूलना चाहिए कि जब तक इस महामारी से बचाव का कोई इलाज नहीं खोज लिया जाता, तब तक इससे बचाव के उपाय ही हमारी रक्षा कर सकते हैं। यह मान बैठना बड़ी भूल होगी कि संक्रमण का प्रसार अब खत्म हो चुका है, इसलिए अब खतरे की कोई बात नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञ ऐसी आशंका भी जता रहे हैं कि तमाम मामलों में अभी भी लक्षणों का उभर कर नहीं आना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और ऐसे संक्रमिक लोग भी विषाणु के वाहक बन रहे हो सकते हैं।

इसके अलावा महामारी विशेषज्ञ संक्रमण के दूसरे को लेकर भी आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं। इन दिनों डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां भी जोर पकड़ने लगी हैं। सर्दियों में दिल्ली सहित कई शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति जानलेवा हो जाती है। ऐसे में अगर कोरोना संक्रमण का प्रसार नहीं रुका तो हालात कितने बदतर हो जाएंगे, कोई सोच भी नहीं सकता। इसलिए लोगों के साथ-साथ सरकारों को भी अभी पूरी तरह से सतर्क रहने की जरूरत है और बचाव के उपायों को अपनाना ही इस समस्या से निजात पाने का एकमात्र रास्ता है।

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