ताज़ा खबर
 

दहशत की जमीन

ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बहाली के कुछ सार्थक प्रयास शुरू हुए हैं, पठानकोट के वायुसेना ठिकाने पर आतंकवादी हमला उसमें खलल डालने के मकसद से अंजाम दी गई हरकत है।

Author January 4, 2016 12:34 AM

ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बहाली के कुछ सार्थक प्रयास शुरू हुए हैं, पठानकोट के वायुसेना ठिकाने पर आतंकवादी हमला उसमें खलल डालने के मकसद से अंजाम दी गई हरकत है। पठानकोट का वायुसेना अड्डा अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यहां मिग और एमआइ जैसे जंगी विमानों के बेड़े हैं। शनिवार की रात अंधेरे का फायदा उठा कर आतंकवादी इस अड्डे में घुस आए और उन्होंने जंगी विमानों को निशाना बनाने की कोशिश की, मगर उनकी साजिश नाकाम हुई। वे अपने साथ भारी मात्रा में गोला-बारूद लेकर आए थे। सुरक्षा बलों की मामूली चूक से भी बहुत बड़ा नुकसान हो सकता था।

इस हमले के पीछे मसूद अजहर की अगुआई वाले जैशे-मोहम्मद का हाथ बताया जा रहा है। इसकी वजहें भी साफ हैं। पिछले दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के जन्मदिन पर बधाई देने पाकिस्तान पहुंचे, तो मसूद अजहर ने सरेआम ऐलान किया था कि इस बढ़ती दोस्ती को वह किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेगा। यह छिपी बात नहीं है, जब दोनों देश साथ मिल कर अमन बहाली के लिए कोई कदम बढ़ाते हैं तो सबसे ज्यादा परेशानी वहां की फौज, खुफिया एजंसी आइएसआइ और जैशे-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को होती है। वे कोई न कोई ऐसी योजना रचते हैं, जिससे दोनों देशों की हुकूमत के बीच राजनीतिक दरार पैदा हो, शांति बहाली की प्रक्रिया भंग हो। मगर अच्छी बात है कि पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हमले के बाद भारत ने संयम से काम लिया। उसने जल्दबाजी में न तो कोई भड़काऊ बयान जारी किया, न प्रतिक्रिया में कोई राजनयिक कठोरता दिखाई।

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने जरूर पाकिस्तान को सबक सिखाने वाला कोई कठोर कदम उठाने के लिए सरकार को उकसाने की कोशिश की, पर उसने दृढ़ निश्चय के साथ स्पष्ट कर दिया कि वह शांति बहाली के रास्ते में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने देगी। इस वक्त दोनों देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद से पार पाने की है। यह सही है कि पाकिस्तानी हुकूमत के लिए दहशतगर्दों के साथ सख्ती से निपटना आसान नहीं है। उस पर कई तरह के दबाव हैं। ऐसे में अगर भारत राजनीतिक दबाव बना कर या नाराजगी में शांति प्रक्रिया को भंग करके उससे इस दिशा में मदद की अपेक्षा करेगा तो किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद धुंधली बनी रहेगी।

अब तक ज्यादातर मौकों पर यही हुआ है। जब अमन बहाली की कोशिशों में रुकावट आती है, तो उसका फायदा सबसे ज्यादा आतंकवादी संगठन उठाते हैं। कट्टरपंथी ताकतें दोनों देशों के लोगों का भावनात्मक दोहन कर अपना वजूद कायम रख पाती हैं। जब तक दोनों मुल्कों के बीच राजनीतिक मनमुटाव बना रहेगा, आतंकवाद से लड़ना मुश्किल बना रहेगा। इसलिए भारत सरकार ने पाकिस्तानी हुकूमत पर कोई तात्कालिक दबाव न बना कर एक तरह से सही कदम उठाया है। इस वक्त पूरी दुनिया में आतंकवाद से लड़ने के व्यावहारिक उपाय आजमाए जा रहे हैं। उसमें भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्तों पर भी नजर है। इसलिए भारत ने पाकिस्तान के साथ दोस्ती का जो हाथ बढ़ाया है, इस घटना से विचलित होकर उसे वापस खींच लेता है तो उससे उसकी कमजोरी ही साबित होगी। अगर दोनों देश आपसी विश्वास के साथ दहशतगर्दी से निपटने के प्रयास करेंगे तो उससे न सिर्फ आतंकवादी संगठनों, बल्कि उन्हें पोसने वाले कट्टरपंथियों और पाकिस्तानी हुकूमत पर लगातार दबाव बनाए रखने वाली ताकतों का भी मनोबल कमजोर होगा।

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App