तमिलनाडु में सिनेमा और सियासत का खासा प्रभाव रहा है, जहां कई लोकप्रिय अभिनेताओं ने फिल्मी परदे से निकलकर सत्ता के गलियारों तक का सफर तय किया है। राज्य में अभिनेता से नेता बनने की परंपरा की नींव एमजी रामचंद्रन ने रखी थी। उन्होंने वर्ष 1972 में द्रमुक से अलग होकर अन्नाद्रमुक पार्टी का गठन किया और लंबे समय तक राज्य की सत्ता संभाली। अब तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता विजय भी उनकी राह पर हैं। उनकी पार्टी टीवीके राज्य विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
टीवीके की इस जीत को इसलिए अहम माना जा रहा है कि यह उसका पहला चुनाव था और उसने राज्य के इतिहास में एक बार फिर राजनीति की दिशा बदल दी है। इससे पहले यहां की सियासत केवल दो दलों द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द केंद्रित रहती थी। हालांकि, विजय की पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है, लेकिन राज्य में उनकी सरकार बननी लगभग तय है। अब देखना होगा कि सत्ता संभालने के बाद वे जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतर पाएंगे।
गौरतलब है कि तमिलनाडु की सियासत में एमजी रामचंद्रन के बाद कई फिल्मी सितारों ने कदम रखा, जिनमें जयललिता का नाम सबसे ऊपर है। अभिनेता विजयकांत और कमल हासन ने भी नए दलों का गठन किया, लेकिन उन्हें खास कामयाबी नहीं मिल पाई। इसके अलावा, रजनीकांत ने भी वर्ष 2020 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए। वहीं, अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को बने हुए लगभग दो साल का ही वक्त हुआ है और पहले ही चुनाव में उसने राज्य की मुख्यधारा के दोनों दलों को करारी शिकस्त देकर शानदार जीत हासिल की है।
विजय को अभिनेता के रूप में जिस तरह की फिल्मों से लोकप्रियता मिली है, उनमें से ज्यादातर व्यवस्था की जटिलता एवं उसमें सुधार पर केंद्रित रही हैं। अब यह देखने की बात होगी कि इससे पहले सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाली द्रमुक की राज्य में शासन और विकास की नीतियों के समांतर अब विजय और उनकी टीवीके तमिलनाडु की राजनीति को कौन-सी नई दिशा देते हैं।
