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संपादकीय: मरकज और सवाल

अब जैसे-जैसे मरकज के भीतर जांच का दायरा बढ़ रहा है, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सैकड़ों लोगों का रोजाना बेरोकटोक आना-जाना, केंद्र और दिल्ली सरकार की सख्ती के बाद भी गुपचुप तौर पर आयोजनों का जारी रहना, मरकज में लोगों का छिपे रहना आदि ऐसे सवाल हैं जो हमारी खुफिया व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस तंत्र, सरकार प्रशासन सभी को कठघरे में खड़ा करते हैं।

Author Published on: April 7, 2020 6:24 AM
तबलीगी जमात के मरकज में शामिल हुए लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से पूरे देश में हड़कंप है।

अगर तबलीगी मरकज ने लापरवाही नहीं की होती तो देश में कोरोना को बड़े पैमाने पर फैलने से रोका जा सकता था। दिल्ली में कोरोना संक्रमित जितने लोग सामने आए हैं, उनमें से कम से कम तीस फीसद मरीज तबलीगी मरकज की देन हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोरोना संक्रमण फैलने की दर में तेजी मरकज से निकले लोगों की वजह से ही आई। खौफनाक यह है कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, तबलीगी मरकज से देश के ज्यादातर हिस्सों में लोग पहुंचे और दूसरों को संक्रमित किया। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में कोरोना संक्रमित मरीजों में ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं है जो पिछले दिनों से मरकज से लौटे हैं।

अब जैसे-जैसे मरकज के भीतर जांच का दायरा बढ़ रहा है, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सैकड़ों लोगों का रोजाना बेरोकटोक आना-जाना, केंद्र और दिल्ली सरकार की सख्ती के बाद भी गुपचुप तौर पर आयोजनों का जारी रहना, मरकज में लोगों का छिपे रहना आदि ऐसे सवाल हैं जो हमारी खुफिया व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस तंत्र, सरकार प्रशासन सभी को कठघरे में खड़ा करते हैं।

दिल्ली में जिस जगह तबलीगी मरकज है, वह कोई ऐसा इलाका भी नहीं है जहां किसी की नजर न पड़ती हो, महानगर के बीचोंबीच है। मरकज से सटा पुलिस थाना है। ऐसे में तबलीगी मरकज की हर गतिविधि चलते रहने के लिए सरकार और पुलिस को क्यों नहीं जिम्मेवार ठहराया जाना चाहिए? और सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तो यह कि मरकज का मुखिया मौलाना साद अभी तक पुलिस पुलिस की पकड़ से बाहर है। जमात के आयोजन के नाम बीस-पच्चीस दिन तक मौलाना साद जिस तरह से लोगों को वहां जमा करता और लोगों में संक्रमण के शिकार होते रहे, वह किसी आपराधिक कृत्य से कम नहीं है।

मरकज में पिछले महीने उन देशों से भी बड़ी संख्या में लोग आते-जाते रहे जहां कोरोना तेजी से फैला हुआ है। जबकि मार्च में ही सरकार ने कोरोना संक्रमित देशों से आने वालों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी थी, फिर भी तबलीगी जमात में लोग आते रहे और देश के भीतर घूमते रहे। इतनी ही नहीं, पहले के मुकाबले इन दिनों पूरे देश में जिस तरह की सख्ती और पूर्ण बंदी है, उसमें भी गुजरे रविवार को तबलीगी जमात में आए कुछ मलेशियाई नागरिक इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे भागते हुए पकड़े गए। सवाल है कि इतने दिनों तक ये बचे कैसे रहे, कहां छिपे रहे, किसी को जानकारी थी इसकी? ये घटनाएं बता रही हैं कि तबलीगी मरकज ने हमारे निगरानी तंत्र की भी पोल खोल कर रख दी है।

तबलीगी मरकज के बारे में अब चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई है कि मरकज का निर्माण पूरी तरह से अवैध है। अब नगर निगम के अधिकारियों की आंखें खुलीं और अवैध निर्माण को लेकर मरकज के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। लेकिन सवाल है अब तक नगर निगम क्या करता रहा? इतनी बड़ी इमारत कोई एक दिन में तो खड़ी हो नहीं गई! जैसा कि बताया जा रहा है कि सिर्फ ढाई मंजिल का ही नक्शा पास है, तो फिर कैसे सात मंजिल बनती चली गर्इं और नगर निगम सोता रहा? अवैध निर्माण को लेकर मरकज के खिलाफ तो कार्रवाई हो ही, साथ ही उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी मेहरबानी से यह मरकज इतना फल-फूल गया और आज बड़ी तबाही का कारण बन गया।

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