Swachh Vayu Survekshan 2026: स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 का परिणाम एक ओर कुछ शहरों के लिए राहत भरा है, तो दूसरी ओर इसने कई शहरों की चिंता बढ़ा दी है। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में उत्तर प्रदेश के लखनऊ का पहला स्थान निश्चित ही उत्साह जगाता है, मगर इसी सूची में दिल्ली का 21वें पायदान पर होना और शीर्ष दस में हिमाचल प्रदेश के सिर्फ एक शहर का शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।
पहाड़ों को हम स्वच्छ हवा, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता का पर्याय मानते रहे हैं और यदि वहां भी प्रदूषण की दस्तक तेज हो रही है, तो समस्या विकास को लेकर हमारे दृष्टिकोण की भी है।
हालांकि, वायु गुणवत्ता में सुधार के मामले में चंडीगढ़ का उदाहरण महत्त्वपूर्ण है। वर्ष 2024 में वह 27वें स्थान पर था, 2025 में आठवें पायदान पर पहुंचा और अब सातवें स्थान पर है।
जिन शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर कम हुआ है, उसके पीछे कई कारण हैं। हरित क्षेत्र बढ़ाने, निर्माण स्थलों की धूल नियंत्रित करने, कचरे के वैज्ञानिक निपटान, इलेक्ट्रिक वाहनों और यातायात प्रबंधन जैसे उपायों ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन-सा शहर सूची में ऊपर है, बल्कि यह भी महत्त्वपूर्ण है कि किस शहर ने सुधार की राह पर चलकर अपने नागरिकों के लिए हवा को स्वच्छ बनाया और कौन केवल कागजी आंकड़ों में ही उलझा रहा।
पहाड़ी प्रदेशों में वायू प्रदूषण का बढ़ाना भी गंभीर चिंता पैदा करता है। हैरत की बात है कि हिमाचल का इकलौता शहर कांगड़ा का डमटाल ही स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की सूची में शीर्ष दस में जगह बना पाया है। यह इस बात का संकेत है कि अगर समय रहते नहीं चेते, तो पर्यटन, निर्माण, यातायात और कचरे का दबाव पहाड़ों की हवा को सांस लेने योग्य नहीं छोड़ेगा>
सवाल यह भी है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सरकारें, नगर निकाय, प्रदूषण नियंत्रण संस्थाएं, उद्योग, वाहन या फिर आम नागरिक। इसमें दोराय नहीं कि प्रदूषण को कम करने में सभी की भागीदारी जरूरी है, लेकिन नीति निर्माताओं और कानून प्रवर्तन एजंसियों की जिम्मेदारी अधिक है। स्वच्छ हवा सभी नागरिकों का अधिकार है और इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने की जरूरत है।
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने वायु प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण और हवा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों के चलते केंद्र सरकार के ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में एक लाख से अधिक नहीं, बल्कि 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा रखने वाला इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा। पढ़िए पूरी खबर…
