ताज़ा खबर
 

संपादकीयः प्रतिबंध का राजनय

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से मुसलिम बहुलता वाले छह देशों के लोगों की यात्रा पर प्रतिबंध संबंधी फैसले को मंजूरी मिल जाने से माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तेज करने में मदद मिल सकती है।
Author December 7, 2017 02:27 am
डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय से मुसलिम बहुलता वाले छह देशों के लोगों की यात्रा पर प्रतिबंध संबंधी फैसले को मंजूरी मिल जाने से माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तेज करने में मदद मिल सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव के समय ही कुछ घोषणाएं की थी, जिनमें अमेरिकी युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना और मुसलिम बहुल देशों के नागरिकों के अमेरिका प्रवास पर प्रतिबंध लगाना अहम था। इसलिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के हफ्ते भर के भीतर उन्होंने ईरान, लीबिया, सीरिया, यमन, सोमालिया और चाड के नागरिकों के अमेरिका आने पर रोक लगा दी थी। ट्रंप का मानना है कि इन देशों में आइएसआइएस नामक चरमपंथी संगठन का दबदबा है और वहां से आने वाले नागरिकों से अमेरिका को खतरा पैदा हो सकता है। इन देशों पर प्रतिबंध लगा कर एक तरह से उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम का संकेत भी दिया था। मगर वहां के कुछ संगठनों और सरकार के भीतर के लोगों ने ही इस फैसले पर आपत्ति जाहिर कर दी थी, जिसके चलते उस पर अमल नहीं किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार किया गया। अब ट्रंप प्रशासन के सामने अपने इस फैसले को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। मगर यह कदम कितना कारगर साबित होगा, अभी दावा करना मुश्किल है।

दरअसल, विश्व व्यापार केंद्र और दो अन्य जगहों पर हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिकी लोगों में अजीब तरह का भय व्याप्त है, खासकर युवाओं में उसे लेकर मुसलिम समुदाय के प्रति आक्रोश है। इसकी वजह से अनेक स्थानों पर मुसलिम समुदाय के लोगों पर जानलेवा हमले भी हुए। उसी आक्रोश को ट्रंप ने चुनाव में भुनाने का प्रयास किया था। छह मुसलिम बहुल देशों के नागरिकों पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध की घोषणा कर अमेरिकी युवाओं से किए अपने वादे को ट्रंप ने आनन-फानन पूरा तो कर दिया, पर इसके दूरगामी नतीजे क्या होंगे, समझना मुश्किल नहीं है। कुछ कट्टरपंथी संगठन लगातार अमेरिका के विरोध में रहे हैं। पहले अल-कायदा का आतंक था, पर अमेरिकी सख्ती के बाद इस्लामिक स्टेट ने काफी तेजी से अपना प्रभाव कायम किया और इस समय वह कई देशों के लिए चुनौती बना हुआ है। इस संगठन के सदस्य मुसलिम बहुल देशों में अधिक हैं, पर अनेक प्रमाण मौजूद हैं कि उसकी सक्रियता सिर्फ ऐसे देशों में नहीं है। इसलिए यह मान लेना कि अमेरिका के इस फैसले से आइएसआइएस की कमर टूट जाएगी, जल्दबाजी होगी।

छिपी बात नहीं है कि आतंकवादी संगठनों को उकसाने या पोसने का काम अक्सर ताकतवर राष्ट्र करते रहे हैं, ताकि उनका इस्तेमाल वे उन राष्ट्रों के खिलाफ कर सकें, जिन पर वे अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। अमेरिका के उकसावे पर ही अल-कायदा पनपा था, जो बाद में उसी को आंखें तरेरने लगा। अब आइएसआइएस को लेकर भी कुछ राष्ट्रों की सहानुभूति देखी जाती है। वे उसे अमेरिका के खिलाफ उकसाए रखने या पोसते रहने का प्रयास नहीं करेंगे, यह दावा नहीं किया जा सकता। यात्रा प्रतिबंध संबंधी फैसले से पहले ही मुसलिम कट्टरपंथी संगठन अमेरिका से नाराज हैं, इसका प्रतिबंध वाले देशों के साथ राजनयिक संबंधों पर तो असर पड़ेगा ही, दुनिया में आतंकवाद से लड़ने की मुहिम को भी कड़ी चुनौती मिल सकती है। इसलिए ट्रंप प्रशासन को इस फैसले पर बहुत सावधानी से अमल करना होगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.