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संपादकीय: कामयाबी की उड़ान

दरअसल, दुनिया भर में हथियारों की होड़ जिस कदर बढ़ रही है, उसमें भारतीय सेना को आधुनिक तकनीकी से लैस हथियारों से लैस करना वक्त का तकाजा है। इसी के मद्देनजर पिछले कुछ समय में भारत ने कई देशों के साथ हथियारों की खरीद के बड़े सौदे किए हैं, लेकिन इस बात की भी जरूरत महसूस की जाती रही है कि अपने मोर्चे को मजबूत करने के मामले में हम आत्मनिर्भर बनें।

एचएसटीडीवी का सफल परीक्षण युद्ध के हालात का सामना करने के लिहाज से भारत को एक नई ऊंचाई दी है।

पिछले कुछ सालों से वैश्विक परिदृश्य जिस तेजी से बदल रहा है और कई देशों के बीच खुद को सबसे ज्यादा शक्तिशाली के रूप में पेश करने की जैसी होड़ दिख रही है, उसमें आने वाले दिनों में सैन्य मोर्चे पर कैसी स्थिति रहेगी, कहा नहीं जा सकता है। खासतौर पर भारत के कुछ पड़ोसी देशों के साथ जैसे उतार-चढ़ाव से भरे संबंध चल रहे हैं, उसमें न केवल कूटनीतिक स्तर पर, बल्कि सैन्य मोर्चे पर भी पूरी तैयारी रखनी जरूरी है। यों भारत ने अपनी सेना के अलग-अलग मोर्चों को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं।

यही वजह है कि पाकिस्तान इस मामले में भारत से उलझने की हिम्मत नहीं कर पाता है और यहां तक कि चीन को भी किसी सैन्य टकराव से पहले सोचना पड़ रहा है। इसके बावजूद कुछ हकीकतों को स्वीकार करना ज्यादा बेहतर होता है। पिछले कुछ सालों के दौरान चीन की मदद से पाकिस्तान ने अपने यहां घातक हथियारों का जखीरा खड़ा किया है। हालांकि भारत इस मामले में पहले ही एक अपराजेय ताकत हासिल कर चुका है, इसके बावजूद आपात स्थितियों में कामयाबी से सामना करने के लिए अपने मोर्चे को मजबूत करना जरूरी है।

इस लिहाज से देखें तो सोमवार को भारत ने जिस हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी निदर्शक यान यानी एचएसटीडीवी का सफल परीक्षण किया है, उसने युद्ध के हालात में सामना करने के लिहाज से भारत को एक नई ऊंचाई दी है। इस कामयाब परीक्षण के साथ ही एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत अब रूस, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है, जिसने अपनी खुद की हाइपरसोनिक तकनीक विकसित कर ली है। इस तकनीक की क्षमताओं पर गौर करें तो स्वाभाविक ही भारत की इस कामयाबी के बाद पाकिस्तान और चीन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई होंगी।

दरअसल, इस मिसाइल के मोर्चे में शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना आने वाले समय में चीन और पाकिस्तान के युद्धपोतों पर ध्वनि से छह गुना ज्यादा रफ्तार से वार करने वाली मिसाइलें दाग सकेगी। इस तकनीकी की मदद से भारत अब एंटी-शिप मिसाइलें बना सकेगा, जो पलक झपकते ही शत्रुओं के लड़ाकू विमानों को तबाह कर सकता है। यों हाइपरसोनिक मिसाइल के मामले में दुनिया भर में रूस सबसे आगे है। फिलहाल रूस के अत्याधुनिक एस- 500 एयर डिफेंस सिस्टम के अलावा किसी भी देश के पास हाइपरसोनिक मिसाइलों का वार रोकने या उसका रास्ता बाधित करने की क्षमता नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह मिसाइल भी उसी ढांचे पर आधारित है।

दरअसल, दुनिया भर में हथियारों की होड़ जिस कदर बढ़ रही है, उसमें भारतीय सेना को आधुनिक तकनीकी से लैस हथियारों से लैस करना वक्त का तकाजा है। इसी के मद्देनजर पिछले कुछ समय में भारत ने कई देशों के साथ हथियारों की खरीद के बड़े सौदे किए हैं, लेकिन इस बात की भी जरूरत महसूस की जाती रही है कि अपने मोर्चे को मजबूत करने के मामले में हम आत्मनिर्भर बनें।

कहा जा सकता है कि इस कसौटी पर भारत ने एक ठोस उपलब्धि हासिल की है। आजकल सीमा क्षेत्र में चीन के साथ जिस तरह की तनातनी चल रही है, पाकिस्तान की ओर से युद्ध विराम के उल्लंघन जैसी हरकतें सामने आती रहती हैं, उसके मद्देनजर यह मिसाइल उनकी सैन्य रणनीति पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव का भी काम करेगा। खासतौर पर दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनाने की तैयारी में लगे चीन और उससे अपनी नौसेना के लिए घातक युद्धपोत हासिल करके एक बड़ी ताकत बनने का सपना देखने में लगे पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी।

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