विचित्र बात है कि सर्वोच्च न्यायालय के तमाम दिशा-निर्देशों के बावजूद न तो रिहायशी इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने पर गंभीरता दिखाई जा रही है और न ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए स्थानीय निकाय ईमानदारी से प्रयास करते नजर आ रहे हैं। नतीजा यह कि कई जगहों पर आज भी नागरिक भय और जोखिम में हैं।

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हाल में हुई आवारा कुत्ते के काटने की एक खौफनाक घटना ने आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दुल्हन की विदाई के समय बारातघर में घुसे आवारा कुत्ते ने साठ से अधिक लोगों को काट लिया। अचानक हुए इस हमले में वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और इससे कई लोगों को चोटें भी आईं।

हैरत की बात है कि इतनी बड़ी घटना होने पर भी स्थानीय प्रशासन की ओर से आवारा कुत्ते को पकड़ने की कोशिश नहीं की गई। परिणाम यह हुआ कि उसने बारातघर से निकल कर कई राहगीरों और दुकानदारों को भी काटा और फिर एक गांव में मवेशियों पर हमला किया। इस घटना की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सौ से ज्यादा लोगों को रेबीजरोधी टीके लगवाने पड़े।

यह निराशाजनक ही है कि शीर्ष अदालत की कड़ी हिदायत के बाद भी आक्रामक कुत्तों को पकड़ने और उन्हें आश्रय स्थलों पर भेजने की माकूल व्यवस्था नहीं की जा रही है। अगर जिला प्रशासन और नगर निकाय ही अपना दायित्व नहीं निभाएंगे, तो आखिर नागरिक अपनी फरियाद लेकर कहां जाएंगे? बदायूं में हुई घटना से वहां के लोग सहमे हुए हैं और इस बात का खतरा बना हुआ है कि कहीं कोई और कुत्ता इस तरह से आक्रामक न हो जाए।

इसमें दोराय नहीं कि अगर आवारा कुत्ते को समय रहते पकड़ लिया गया होता, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग जख्मी नहीं होते। स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि अगर आवारा कुत्ते आक्रामक हो रहे हैं, तो तत्काल समुचित उपाय किए जाने चाहिए। इस तरह की लापरवाही के लिए जो भी दोषी हों, उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाना जरूरी है, क्योंकि यह मसला आम नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा है।

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राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ का गीत, ‘आवारा हूं, या गर्दिश में हूं, आसमान का तारा हूं’ ने सड़कों की जिंदगी को एक रुमानियत दी थी। भारतीय शहरों में यह रुमानियत सड़कों पर कुत्तों को लेकर भी उमड़ी। आवारा कुत्तों को खिलाने व उनकी देखभाल करने का एक बड़ा तबका तैयार हुआ। जल्द ही यह रुमानियत खौफ में बदल गई, जब आवारा कुत्तों के काटने से लोगों की जान पर बन आई। क्या बच्चे और बड़े, सभी आवारा कुत्तों के काटने के शिकार हुए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक