ईरान और अमेरिका के बीच पहले युद्धविराम और फिर शांतिवार्ता की शुरुआत से यह उम्मीद जगी थी कि शायद होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकेगी। यह मुद्दा सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अनेक देशों के लिए बेहद अहम है। लेकिन हालात एक बार फिर उलझते नजर आ रहे हैं। इजराइल और अमेरिका के साझा हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को बाधित कर दिया। तब से अब तक उस रास्ते से केवल चीन और कुछ गिने-चुने देशों के जहाजों के गुजरने की ही खबर है।

ऐसे में भारत समेत कई देशों के लिए यह निराशाजनक स्थिति है। एक तरफ ईरान इस मार्ग को खोलने के लिए तैयार नहीं है, तो दूसरी ओर अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए इलाके की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जिससे संकट और गहरा गया है। अब ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है कि जब तक अमेरिका नाकेबंदी नहीं हटाएगा, तब तक मार्ग बंद रहेगा। वहीं अमेरिका भी अपनी जिद पर कायम है कि जब तक ईरान रास्ता नहीं खोलेगा, तब तक प्रतिबंध जारी रहेंगे।

सवाल यह है कि अगर दोनों पक्ष इसी तरह अड़े रहे, तो क्या शांति की कोशिशें कभी किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाएंगी? एक अजीब स्थिति यह है कि युद्धविराम के बावजूद दोनों देश सीधे हमले नहीं कर रहे, लेकिन होर्मुज जलमार्ग सहित मध्य-पूर्व से तेल और गैस की आपूर्ति अब भी प्रभावित है। इसके कारण कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, तेल भंडार घट रहे हैं, महंगाई बढ़ रही है और रसोई गैस की कमी से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

अमेरिका और ईरान के अड़ियल रुख के कारण दुनिया संकट झेलने को मजबूर है

यानी इस टकराव की सबसे बड़ी कीमत वे देश चुका रहे हैं, जो इस संघर्ष का हिस्सा भी नहीं हैं। क्या अमेरिका और ईरान को यह नहीं सोचना चाहिए कि उनके अड़ियल रुख के कारण दुनिया की बड़ी आबादी संकट झेलने को मजबूर है?

गौरतलब है कि होर्मुज जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। इस इलाके में ईरान की स्थिति मजबूत मानी जाती है। शांति वार्ता से पहले ईरान ने इस मार्ग को खोलने के संकेत दिए थे, लेकिन युद्धविराम के बावजूद इजराइल द्वारा लेबनान पर हमले जारी रहने के बाद उसने फिर से आवाजाही रोक दी।

अमेरिका और इजराइल समेत अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिहाज से होर्मुज को बंद करना ईरान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जबकि अमेरिका की ओर से लगातार आ रही चेतावनियां हालात को और जटिल बना रही हैं। अगर यही स्थिति बनी रही, तो न युद्धविराम का कोई असर दिखेगा और न ही शांति वार्ता आगे बढ़ पाएगी – और सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि इस टकराव का आखिर हासिल क्या होगा?

यह भी पढ़ें: ईरान ने होर्मुज को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका को दिया नया प्रस्ताव- रिपोर्ट में दावा

ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और युद्ध खत्म करने का एक नया प्रस्ताव दिया है। अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने रविवार को एक अमेरिकी अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। हालांकि न्यूक्लियर बातचीत को बाद में टालने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी टॉप नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी टीम के साथ ईरान पर एक सिचुएशन रूम मीटिंग करेंगे, जिसमें वे आगे की कार्रवाई का रिव्यू करेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक