Stephen Hawking will always Unsurpassed example, he was a Star scientist - Jansatta
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संपादकीयः जीवट की मिसाल

किसी इंसान के भीतर हौसला और जीवट हो तो वह कैसे मौत को मात दे सकता है और दुनिया को नई राह दिखा सकता है, स्टीफन हॉकिंग अब हमेशा के लिए इसकी एक नायाब मिसाल रहेंगे।

Author March 15, 2018 3:04 AM
स्टीफन हॉकिंग

किसी इंसान के भीतर हौसला और जीवट हो तो वह कैसे मौत को मात दे सकता है और दुनिया को नई राह दिखा सकता है, स्टीफन हॉकिंग अब हमेशा के लिए इसकी एक नायाब मिसाल रहेंगे। आठ जनवरी, 1942 को इंग्लैंड के आॅक्सफोर्ड में जन्मे हॉकिंग ने यों तो छिहत्तर साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन इस दौरान उन्होंने जो दिया, उसकी अहमियत के साथ वे विज्ञान के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए। महज इक्कीस साल की उम्र में जब उन्हें मोटर न्यूरॉन नामक बीमारी हो गई और दिमाग को छोड़ कर शरीर ने सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया तो यह एक तरह से उनके सक्रिय जीवन का अंत था। उनका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने तो यहां तक कह दिया कि अब उनके पास जीने के लिए सिर्फ दो साल हैं। लेकिन स्टीफन हॉकिंग की बुनावट ऐसे आघात के सामने लाचार हो जाने वाली नहीं थी। हौसले और इच्छाशक्ति से लबरेज हॉकिंग को दिमाग की बात को सुन कर आवाज देने वाले कंप्यूटराइज्ड वॉइस सिंथेसाइजर जैसे उन्नत उपकरणों का साथ मिला और फिर उन्होंने अपनी बीमारी से पैदा सारी चुनौतियों को पीछे छोड़ दिया।
इसी हालत में जीते हुए उन्होंने आगे मुश्किल पढ़ाई की बारह डिग्रियां हासिल कीं।

उनकी ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री आॅफ टाइम’ सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब के रूप में जानी गई। ब्रह्मांड की गुत्थियों को समझने में दुनिया की मदद करने वाले हॉकिंग ने ‘बिग बैंग’ सिद्धांत के अध्ययन के दौरान ही 1974 में ब्लैक होल सिद्धांत की सबसे अहम खोज की। इसके अलावा, उन्होंने पहली बार विज्ञान के क्वांटम सिद्धांत और सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत को एक साथ ला दिया था। अपनी ‘थ्योरी आॅफ एवरीथिंग’ में उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड का निर्माण साफतौर पर परिभाषित सिद्धांतों के आधार पर हुआ है। तमाम चुनौतियों का सामना करके हासिल की गई कामयाबियों के जरिए दुनिया के करोड़ों युवाओं को उन्होंने विज्ञान का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। एक बार जब उन्होंने अपने प्रशंसकों को जिज्ञासु बनने की नसीहत दी थी, तो दरअसल वे अपने ही बारे में बता रहे थे कि अपने भीतर इसी भाव की वजह से वे दुनिया की कई जटिल गुत्थियों को खोल सके। उनकी यह बात जीव के शरीर की व्याख्या को आसान बनाती है कि हमारा दिमाग एक कम्प्यूटर की तरह है और खराब हो चुके कम्प्यूटरों के लिए स्वर्ग और उसके बाद का कोई जीवन नहीं है।

एक समय वे शारीरिक रूप से जिस हालत में पहुंच गए थे, उसमें बहुत सारे लोग हार मान कर सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ देते हैं। लेकिन स्टीफन हॉकिंग ने न सिर्फ भगवान की धारणा को खारिज किया, बल्कि यह साबित किया कि इंसान के भीतर जीवट हो तो उसकी जिंदगी की कामयाबी के सूत्र इसी दुनिया में बसे हैं; स्वर्ग केवल अंधेरे से डरने वालों के लिए बनाई गई कहानी है। हालांकि अपनी किताब ‘द ग्रांड डिजाइन’ में जब उन्होंने भगवान के अस्तित्व पर सवाल उठाया था, तब धार्मिक समुदायों की ओर से उन्हें आलोचना का भी सामना करना पड़ा। यों हमेशा ही विज्ञान की दुनिया में जीने वाले स्टीफन हॉकिंग जिंदगी को खूबसूरत बनाने वाली बातों के साथ भी जीते थे। उनका कहना था कि अगर आपको आपका प्यार मिल गया तो कभी इसे अपनी जिंदगी से बाहर मत निकालना; जिंदगी दुख से भर जाएगी, अगर हम मनोरंजक नहीं होंगे। इसमें कोई शक नहीं कि विज्ञान के प्रयोग हमेशा आगे बढ़ेंगे, इसके बावजूद भौतिकी के इस महान वैज्ञानिक की कमी की भरपाई शायद कभी न हो!

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